एचआईवी संक्रमण एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, जिसकी वजह से अब तक करीब 3.5 करोड़ लोग अपनी जान गवां चुके हैं।यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन का है। इन आंकड़ों के मुताबिक बीते साल एचआईवी से जुड़ी समस्याओं की वजह से करीब 10 लाख लोगों की मौत हो गई थी।करीब 3.7 करोड़ लोग इस वायरस की चपेट में हैं। ऐसे लोगों की 70 फीसदी आबादी अफ्रीका में रहती है।साल 2017 में यहां 18 लाख नए लोग इस जानलेवा वायरस के शिकार बने।
किसी वर्जिन से संबंध बनाने का मतलब एड्स से बचाव नहीं
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मिथ: एचआईवी संक्रमित लोगों के साथ रहने से एड्स हो जाता है
यह एक गलतफहमी है, जिसका प्रचार काफी लंबे वक्त से होता आ रहा है। इसे दूर करने के लिए जागरूकता अभियान तक चलाए गए हैं पर उसका कोई बहुत ज़्यादा असर देखने को नहीं मिला है।साल 2016 में 20 फीसदी लोगों का मानना था कि एचआईवी संक्रमण हाथ मिलाने, गले मिलने से फैलते हैं। उनका यह भी मानना था कि यह इंसान के लार और पेशाब के जरिए भी फैलता है। लेकिन सच ये है कि छूने, पसीने, थूक और पेशाब से एचआईवी नहीं फैलता।
तो फिर ये कैसे नहीं फ़ैलता?
-एचआईवी कभी भी एक ही वातावरण में सांस लेने से नहीं फैलता।
-गले मिलने, किस करने और हाथ मिलाने से भी यह नहीं फैलता है।
-एक ही बर्तन में खाने से नहीं फैलता है।
-एक ही नल से नहाने से ये नहीं फैलता है।
-निजी वस्तुएं एक दूसरे के साथ साझा करने से एचआईवी नहीं फैलता है।
-जिम में कसरत करने के उपकरणों को साझा करने से ये नहीं फैलता है।
-टॉयलट सीट छूने, दरवाजे की कुंडी या हैंडल छूने से ये नहीं फैलता है।
-एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर में मौजूद तरल पदार्थ यानी ख़ून, वीर्य, योनि के तरल पदार्थ या दूध से फैल सकता है।
मिथक: अपरंपरागत उपचार से एचआईवी का इलाज संभव है
ये बात बिल्कुल सही नहीं है।वैकल्पिक चिकित्सा, यौन संबंध बनाने के बाद नहाने या किसी कुंवारे व्यक्ति या महिला के साथ यौन संबंध रखने से एचआईवी से सुरक्षा नहीं तय हो जाती।वर्जिन के साथ संबंध बनाने' की दलील अफ्रीका के कुछ इलाकों, भारत और थाईलैंड के कुछ जगहों में दी जाती थी लेकिन ये असल में खतरनाक है।इस सोच ने कई युवतियों के बलात्कार और कुछ मामलों में बच्चों को भी एचआईवी संक्रमण के खतरे में डाल दिया।
माना जाता है कि इस सोच की जड़ें 16वीं सदी के यूरोप से जुड़ी हैं जब लोगों को सिफलिस और गोनोरिया जैसी बीमारियां होने लगीं थीं।इस तरह के कदम इन बीमारियों के इलाज में भी कारगर साबित नहीं होते।जहां तक प्रार्थनाओं और धार्मिक पूजापाठ का सवाल है वो लोगों को मुश्किल परिस्थितियों से जूझने की ताकत तो देते हैं लेकिन इससे शरीर के भीतर का वायरस खत्म करने में मदद नहीं मिलती।
मिथक: मच्छर के काटने से फैलता है एचआईवी
इस बात से इनकार नहीं है कि एचआईवी वायरस खून से फैलता है लेकिन कई अध्ययन इस बात की तस्दीक करते हैं कि मच्छर या आपके शरीर से खून चूसने वाले कीड़ों के काटने से एचआईवी नहीं फैलता। इसके पीछे दो कारण हैं-
1. जब खून चूसने वाले कीड़े या मच्छर काटते हैं तो वो पहले जिसे काटते हैं उसका खून दूसरे के शरीर में इन्जेक्ट नहीं करते हैं।
2. इनके शरीर में एचआईवी वायरस केवल थोड़े समय के लिए जीवित रहता है।
तो अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां मच्छर अधिक हैं या फिर एचआईवी तेजी से फैलता है तो भी इसका संबंध कीड़े से वायरस फैलने से नहीं है।