प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (22 फरवरी) को मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 131वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान पीएम ने एआई और तकनीकी विकास के साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर बात की। कार्यक्रम के एक हिस्से में प्रधानमंत्री ने केरल की 10 महीने की अंगदाता एलिन शेरिन अब्राहम की कहानी भी साझा की। गौरतलब है कि हाल ही एक सड़क दुर्घटना में एलिन और उसके माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उसे कोच्चि के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 13 फरवरी को डॉक्टरों ने बच्ची को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था।
Mann Ki Baat: पीएम मोदी ने 10 माह की ऑर्गन डोनर एलिन को किया याद, जानिए भारत में अंगदान की असली स्थिति
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भी एलिन के परिवार के प्रति संवेदना जताई और अंगदान को बढ़ावा देने की अपील की। आइए भारत में अंगदान की स्थिति और चुनौतियों पर एक नजर डाल लेते हैं।
पीएम ने जताई एलिन के परिवार के प्रति संवेदना
देश में अंगदान और इससे संबंधित चुनौतियों के बारे में जानने से पहले जान लेते हैं कि आज पीएम ने इस विषय को लेकर क्या कहा?
'मन की बात' में बोलते हुए पीएम मोदी ने एलिन के परिवार के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने कहा, "किसी भी मां-बाप के लिए अपने बच्चे को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता और जब बच्चा बहुत छोटा हो, तो दर्द और भी गहरा होता है। कुछ दिन पहले ही हमने केरल की एक मासूम बच्ची एलिन शेरिन अब्राहम को खो दिया। कितने सपने और खुशियां अधूरी रह गईं। उसके माता-पिता जिस दर्द से गुजर रहे होंगे वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।
हालांकि इतने गम के बीच भी एलिन के माता-पिता ने एक ऐसा फैसला लिया जिससे हर देशवासी का हृदय उनके प्रति सम्मान से भर गया है।माता-पिता ने बच्ची के अंगदान का फैसला किया। वह बच्ची हमारे बीच नहीं है लेकिन उसका नाम देश के सबसे कम उम्र के ऑर्गन डोनर में जुड़ गया है। देश में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, मेडिकल रिसर्च को भी बढ़ावा मिल रहा है।
हर साल जरूरी अंगों की कमी के कारण हो जाती हैं लाखों मौतें
भारत में अंगदान की स्थिति और आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि यहां चुनौतियां काफी गंभीर हैं।
भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी के कारण करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों का एक बड़ा कारण अंगों की कमी है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2023' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.7 लाख लोग मारे गए, जो संभावित अंगदाता हो सकते थे। इनमें से कई संभावित अंगदाता समय पर पहचान न होने और रेफरल न मिलने के कारण अंगदान नहीं कर पाते हैं।
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने राज्यों से सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के अंग और ऊतकों के दान को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने की अपील की थी।
अगस्त 2025 में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि साल 2024 में देश ने लगभग 18,900 ट्रांसप्लांट करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जो एक साल में सबसे ज्यादा है।
नई दिल्ली में 15वें ऑर्गन डोनेशन डे पर बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2023 में, तीन लाख से ज्यादा नागरिकों ने नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के जरिए ऑर्गन डोनेट करने का वादा किया है। ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन में भारत दुनिया भर में तीसरे नंबर पर है। ऑर्गन डोनेशन इंसानियत के सबसे अच्छे कामों में से एक है। हर ऑर्गन डोनर एक साइलेंट हीरो है जिसका बिना स्वार्थ के किया गया काम दुख को उम्मीद में और नुकसान को जिंदगी में बदल देता है।
लिवर ट्रांसप्लांट के आंकड़े राहत देने वाले
ग्लोबल ऑब्जर्वेटरी ऑन ऑर्गन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन और नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन के आंकड़ों के अनुसार देश में 2024 में लगभग 5000 लिवर ट्रांसप्लांट किए गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया में सबसे अधिक संख्या में लिवर प्रत्यारोपण करने वाला देश बन गया है।
लिवर ट्रांसप्लांटेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अभिदीप चौधरी ने कहा कि भारत का लिवर ट्रांसप्लांट इकोसिस्टम विज्ञान, नैतिकता और मानवता के बीच पूर्ण सामंजस्य का प्रतिनिधित्व करता है। आईएलडीएलटी के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद रेला ने कहा कि लिविंग डोनर लिवर प्रत्यारोपण का भारतीय मॉडल दुनिया के लिए एक स्वर्णिम मानक बन गया है।
18 साल के किशोर के हृदय दान ने बचाई 13 वर्षीय लड़की की जान
भारत में ऑर्गन डोनेशन रेट दुनिया के सबसे कम दरों में से एक है। जागरूकता की कमी, सामाजिक मिथक, धार्मिक भ्रांतियां और प्रक्रिया को लेकर डर को इसका कारण माना जाता है। कई लोग यह नहीं जानते कि मृत्यु के बाद भी उनके अंग जैसे हृदय, लिवर, किडनी, आंखें और फेफड़े किसी और को जीवन दे सकते हैं।
अमर उजाला में सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि था किस तरह से 18 साल के एक किशोर के हृदय दान से 13 वर्षीय लड़की की जान बचाई गई थी। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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