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RO Water Side Effect: क्या आप भी सिर्फ आरओ का पानी पीते हैं? डॉक्टर से जान लें इसके नुकसान

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sat, 24 Jan 2026 06:19 PM IST
सार

Mineral Deficiency In RO Water: हमारे समाज में अधिकतर लोग आरओ का पानी पीना पसंद करते हैं। आरओ का पानी पीने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, मगर रोज ये पानी पीने के कुछ नुकसान भी हैं, जिसके बारे में आपको जानना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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RO Water Disadvantages Doctor Warns About 5 Health Risks of Drinking RO Water
आरओ पानी पीने के नुकसान - फोटो : Amar Ujala

RO Water Side Effects: आजकल लगभग हर घर में 'रिवर्स ऑस्मोसिस' यानी आरओ वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल हो रहा है, जिसे हम शुद्धता की गारंटी मानते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि जिस पानी को आप सबसे सुरक्षित समझ रहे हैं, वह धीरे-धीरे आपके शरीर को कमजोर कर रहा है? चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आरओ फिल्टर पानी को साफ करने की प्रक्रिया में उसमें मौजूद धूल और बैक्टीरिया के साथ-साथ शरीर के लिए अनिवार्य प्राकृतिक खनिजों को भी पूरी तरह खत्म कर देता है।



डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि आरओ का पानी शरीर से जरूरी न्यूट्रिएंट्स 'चुरा' रहा है। आरओ तकनीक पानी को साफ करने की प्रक्रिया में उसमें मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे अनिवार्य खनिजों को पूरी तरह खत्म कर देती है। इसकी वजह से शरीर में धीरे-धीरे पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा होने लगता है, जिसे हम अक्सर सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

डब्ल्यूएचओ की कई रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक 'डि-मिनरलाइज्ड' यानी खनिज विहीन पानी पीने से शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी हो सकती है। डॉक्टर सोलंकी के अनुसार, जिस पानी को हम सबसे सुरक्षित मान रहे हैं, वह वास्तव में शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली को धीमा कर रहा है। अगर आप भी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह आरओ पर निर्भर हैं, तो इसके वैज्ञानिक दुष्प्रभावों को समझना आपके और आपके परिवार के लिए बेहद जरूरी है।

 

 

 

 

 

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पीने का पानी - फोटो : Adobe Stock

कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
डॉक्टर सोलंकी के अनुसार, आरओ पानी का सबसे बड़ा नुकसान शरीर से इंपॉर्टेंट मिनरल्स का गायब होना है। जब पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम नहीं होते, तो मांसपेशियों में क्रैंप्स, हड्डियों में कमजोरी और नसों में 'टिंगलिंग सेंसेशन' (झुनझुनी) महसूस होने लगती है। लंबे समय तक इसका सेवन हड्डियों और दांतों को भीतर से खोखला बना सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ता है।


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पीने का पानी - फोटो : Adobe Stock

क्या आरओ का पानी आपकी थकान और हृदय गति को प्रभावित करता है?
अगर आप भरपूर पानी पीने के बाद भी थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तो कारण आपका आरओ वाटर हो सकता है। मैग्नीशियम और आयरन का बैलेंस बिगड़ने से शरीर की ऊर्जा कम हो जाती है। इसके अलावा, इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी आपके हार्ट रिदम (हृदय गति) और बीपी को असंतुलित कर सकती है। डॉक्टर ने बताया कि मिनरल रहित पानी पीने से अक्सर भरपूर पानी के बावजूद बार-बार प्यास लगने का अहसास होता रहता है।


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पीने का पानी - फोटो : Adobe Stock

टीडीएस लेवल और आरओ के इस्तेमाल का सही पैमाना क्या है?
डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने एक बहुत ही काम की सलाह दी है, जिसका पालन आप कर सकते हैं। अपने घर के पानी का टीडीएस जरूर चेक करें। अगर आपके क्षेत्र के पानी का टीडीएस 300 से कम है, तो आपको आरओ की आवश्यकता नहीं है। आरओ का इस्तेमाल केवल तभी करें जब टीडीएस 300 से ऊपर हो। कम टीडीएस वाले पानी के लिए आप 'सिरेमिक फिल्टर' का उपयोग कर सकते हैं, जो खनिजों को सुरक्षित रखता है।

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पीने का पानी - फोटो : Adobe Stock

सेहत के लिए पानी की शुद्धता और गुणवत्ता का संतुलन
यह खबर हमें चेतावनी देती है कि तकनीक का अंधाधुंध उपयोग सेहत पर भारी पड़ सकता है। पानी केवल प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को खनिज देने का माध्यम भी है। डॉक्टर सोलंकी की सलाह मानकर अपने पानी की जांच करें और जरूरत पड़ने पर ही आरओ का सहारा लें। स्वस्थ रहने के लिए पानी का 'शुद्ध' होने के साथ-साथ 'पोषक' होना भी जरूरी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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