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Kidney Disease: ये गलतियां करते हैं तो आपकी भी किडनी हो सकती है खराब, कैसे करें बचाव?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 07 Mar 2025 03:09 PM IST
सार

लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के चलते किडनी की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। किडनी डैमेज होने को जानलेवा स्थिति के रूप में जाना जाता है। अब सवाल उठता है कि आखिर किडनी डैमेज क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

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Sign Of Kidney Damage Causes And Prevention know kidney damage hone ke kya lakshan hote hain
किडनी की बीमारी के बारे में जानना जरूरी - फोटो : Freepik.com

किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। ये रक्त को फिल्टर करके अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने, शरीर में द्रव संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। हालांकि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के चलते शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग की सेहत पर गंभीर असर होता जा रहा है।



किडनी, हार्ट और लिवर की बीमारियां कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ देखी जाती थीं, हालांकि अब कम उम्र के लोग न सिर्फ इसका शिकार हो रहे हैं, बल्कि इसके कारण मौत के मामले भी बढ़े हैं। 

किडनी डैमेज होने को जानलेवा स्थिति के रूप में जाना जाता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर रही होती है तो शरीर में विषाक्त पदार्थ बढ़ने लग जाते हैं, खून में अशुद्धि बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है। अगर किडनी की इस समस्या का समय पर पता न चले या इलाज न हो पाए तो इसके कारण जान भी जा सकती है।

अब सवाल उठता है कि आखिर किडनी डैमेज क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

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किडनी से संबंधित बीमारियों के मामले - फोटो : Freepik.com

क्रोनिक किडनी डिजीज का बढ़ता खतरा

साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) एक गंभीर समस्या के रूप में उभर रही है, जो दुनियाभर में 10% से अधिक आबादी को प्रभावित करती है। पिछले दो दशकों में इससे संबंधित मौतों में भी  उल्लेखनीय वृद्धि भी हुई है।

भारतीय आबादी के लिए भी ये समस्या गंभीर रही है। महाराष्ट्र में 2018 से 2023 के बीच किडनी फेलियर से होने वाली मौतें दोगुनी हो गईं, जबकि 2022 और 2023 के बीच मौतों में 40% की वृद्धि देखी गई।

लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के अलावा कुछ अंतर्निहित बीमारियां भी किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित करती जा रही हैं।

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ब्लड प्रेशर और किडनी की समस्या - फोटो : Freepik.com

ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों में खतरा

किडनी डैमेज होने के जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थितियों में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज प्रमुख है। 

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण और कमजोर कर देती है। यह किडनी से अपशिष्ट को छानने और तरल पदार्थों को संतुलित रखने में दिक्कत बढ़ा देती है। समय रहते अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो इससे किडनी डैमैज होने का जोखिम बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर के अलावा शुगर लेवल बढ़ने से भी किडनी को नुकसान पहुंचता है। हाई शुगर के कारण किडनी में रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग इकाइयों को क्षति होने लगती है। जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें किडनी डैमेज होने का खतरा भी अधिक होता है। 

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किडनी रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock

इन स्थितियों पर भी दें ध्यान

हाई ब्लड प्रेशर और हाई शुगर के अलावा भी कुछ स्थितियां किडनी को गंभीर रोगों का कारण बन सकती हैं। 

  • दर्द निवारक दवाओं और एंटीबायोटिक्स का लम्बे समय तक या अत्यधिक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है। 
  • किडनी या मूत्र मार्ग में पथरी के कारण भी किडनी में सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। 
  • कुछ अनुवांशिक स्थितियां जैसे पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज, किडनी की संरचना और कार्य को प्रभावित करती है।
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पौष्टिक आहार का सेवन जरूरी - फोटो : Freepik.com

किडनी डैमेज से बचाव के उपाय

लाइफस्टाइल और आहार में सुधार के साथ ब्लड प्रेशर और  शुगर को कंट्रोल रखकर किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है।

  • फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लो वसा वाले आहार का सेवन करें। नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि से वजन, ब्लड प्रेशर और  शुगर कंट्रोल रहता है, जिससे किडनी स्वस्थ रहती है।
  • दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से किडनी को विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करने में सहायता मिलती है।
  • दर्द निवारक दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह अनुसार ही करें और अनावश्यक दवाओं से बचें।
  • यूटीआई के लक्षण महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें ताकि संक्रमण किडनी तक न पहुंचे।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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