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Joint Pain: कहीं खत्म तो नहीं हो रही आपके घुटनों की ग्रीस? ऐसी दिक्कतें हैं तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

Tue, 07 Jul 2026 08:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 07 Jul 2026 08:02 PM IST
सार

हमारे शरीर के हर जोड़ के बीच एक खास तरह का द्रव होता है, जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यही द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने-डुलने में मदद करता है। कहीं घुटनों में इसकी मात्रा कम तो नहीं हो गई?

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हड्डियों में समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आप भी कुछ समय से जोड़ो में दर्द की समस्या से परेशान हैं? चलते समय घुटनों में तेज दर्द होता है, जोड़ जाम से हो जाते हैं? अगर हां तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करा लें। कहीं आपके जोड़ों की चिकनाई तो कम नहीं हो गई है?



घुटनों-जोड़ों में होने वाली दिक्कतों को आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था। हालांकि गड़बड़ होती लाइफस्टाइल ने कम उम्र वालों में भी इसका खतरा काफी बढ़ा दिया है। सुबह बिस्तर से उठते समय घुटनों का अकड़ जाना, बैठने के बाद उठने में तकलीफ होना, चलते समय कट-कट की आवाज आना आपके लिए अलार्मिंग हो सकता है।

अगर आपको लगता है कि जोड़ों की ग्रीस खत्म हो रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। पहले इसके संकेतों को पहचानिए और डॉक्टर से इलाज कराइए। ज्यादातर मामलों में समय रहते इलाज से दिक्कतों को कम किया जा सकता है।

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घुटने का दर्द का कारण - फोटो : Adobe Stock

पहले जान लीजिए क्यों होती है ये दिक्कत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारे शरीर के हर जोड़ के बीच एक खास तरह का द्रव होता है, जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यही द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने-डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। 
 

  • हालांकि उम्र बढ़ने, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, चोट या ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी समस्याओं के कारण यह चिकनाई धीरे-धीरे कम होने लगती है। 
  • इससे जोड़ों में घर्षण बढ़ जाता है और दर्द शुरू हो जाता है जिससे चलना-फिरना भी मुश्किल हो सकता है।
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घुटने में साइनोवियल फ्लूइड की कमी - फोटो : Freepik.com

क्या होता है घुटनों का ग्रीस?

घुटनों का ग्रीस खत्म होने का मतलब है जोड़ों के भीतर मौजूद सिनोवियल फ्लूइड कम होना और कार्टिलेज की गुणवत्ता प्रभावित होना।
 

  • कार्टिलेज एक मुलायम परत होती है, जो हड्डियों को आपस में रगड़ने से बचाती है। 
  • जब यह घिसने लगती है या सिनोवियल फ्लूइड कम हो जाता है, तो दर्द, अकड़न और चलने में दिक्कत होने लगती है। 


स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद ये समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा मोटापा के शिकार, भारी वजन उठाने वाले लोगों और पहले कभी जोड़ में चोट के कारण भी ये समस्या हो सकती है। डायबिटीज, विटामिन-डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी जोड़ों को प्रभावित कर सकती हैं।

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ओमेगा-3 वाली चीजें के फायदे - फोटो : Freepik.com

कैसे पाएं इसमें आराम?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर समय रहते खान-पान में सुधार कर लिया जाए तो जोड़ों की समस्याओं को काफी कम किया जा सकता है।
 

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड, अखरोट, अलसी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध और दही आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।
  • ऑलिव ऑयल सूजन कम करने और जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है।
  •  पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्टिलेज और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है। 
  • विटामिन डी और कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। 
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हड्डियों की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

इन बातों का भी रखें ध्यान

घुटनों की समस्याओं से बचे रहने के लिए कुछ चीजों से दूरी बनाना भी जरूरी है।
 

  • चीनी, प्रोसेस्ड और जंक फूड्स, तला-भुना भोजन कम से कम खाएं। ये शरीर में सूजन बढ़ाती हैं।
  • यदि वजन बढ़ रहा है तो घुटनों पर दबाव भी बढ़ता है इसलिए वेट लॉस जरूरी है।
  • लो-इम्पैक्ट एक्सरसाइज जैसे तेज चाल से चलना, तैराकी, साइकिल चलाना और योग जोड़ों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।


लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार के साथ दवाओं और थेरेपी के माध्यम से आप गंभीर समस्याओं से बचे रह सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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