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World Hearing Day 2026: 2050 में हर दस में से एक को होगी सुनने की समस्या! WHO ने बताया इसके पीछे का मूल कारण

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Mon, 02 Mar 2026 03:36 PM IST
सार

WHO Hearing Report :आज के समय कम सुनने की समस्या हर दिन बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि बहुत से लोग कान से जुड़ी समस्या से परेशान रहते हैं। कल यानी 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस है। इसलिए आइए इस मौके पर जानते हैं कि कान से जुड़ी समस्या होने के पीछे का मूल कारण क्या है?

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World Hearing Day 2026: 1 in 10 People Could Face Hearing Loss by 2050 WHO Reveals the Shocking Root Cause
world hearing day 2026 - फोटो : Adobe Stock

World Hearing Day 2026: विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार आज के समय में दुनिया में करीब 43 करोड़ लोग बहरेपन या सुनने की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें 3 करोड़ से अधिक संख्या बच्चों की है। यह रिपोर्ट पिछले साल यानी फरवरी 2025 की है और इस रिपोर्ट में हैरान करने वाली बात यह है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 70 करोड़ से अधिक हो जाएगी, यानी तब हर 10 में से एक व्यक्ति को सुनने में दिक्कत होगी।



इसका सीधा मतलब है कि तब दुनिया का हर दसवां व्यक्ति सुनने की शक्ति खो चुका होगा या गंभीर श्रवण दोष से जूझ रहा होगा। WHO के अनुसार, इस संकट का मुख्य कारण सिर्फ उम्र बढ़ना नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली में शामिल कुछ गड़बड़ आदतें और तकनीक का गलत इस्तेमाल है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर हम आज से ही अपनी आदतों में सुधार नहीं किए, तो आने वाले समय में ये खतरा और अधिक बढ़ सकता है।

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World Hearing Day 2026: 1 in 10 People Could Face Hearing Loss by 2050 WHO Reveals the Shocking Root Cause
इयर केयर - फोटो : Adobe Stock

क्या है इस संकट का सबसे बड़ा कारण?

  • WHO के अनुसार अधिक वाली जगहों पर रहना इस संकट की सबसे बड़ी वजह है, जो हमारी सुनने की नसों को धीरे-धीरे नष्ट कर रहा है।
  • कई बार केमिकल फैक्ट्री से निकलने वाले ओटोटॉक्सिक (Ototoxic) केमिकल भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है।
  • साथ ही कान के संक्रमणों का समय पर इलाज न होना इस समस्या को और विकराल बना रही है।

 

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World Hearing Day 2026: 1 in 10 People Could Face Hearing Loss by 2050 WHO Reveals the Shocking Root Cause
युवाओं में बढ़ती कान की समस्या - फोटो : Adobe Stock Images

क्यों युवाओं और बच्चों पर मंडराता खतरा?

  • करोड़ों युवा सिर्फ स्मार्टफोन और पर्सनल ऑडियो डिवाइसेस के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण सुनने की समस्या से परेशान हैं।
  • गेमिंग कल्चर और तेज आवाज वाले संगीत कार्यक्रमों ने युवाओं के कानों की संवेदनशील कोशिकाओं को समय से पहले बूढ़ा बना दिया है।
  • बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम और हेडफोन का अधिक उपयोग उनके कानों के शुरुआती विकास बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

 

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World Hearing Day 2026: 1 in 10 People Could Face Hearing Loss by 2050 WHO Reveals the Shocking Root Cause
इयरफोन का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com

कौन-सी सामान्य आदतें इस जोखिम को बढ़ा देती हैं?

  • ईयरफोन पर 60% से अधिक वॉल्यूम रखना और बिना ब्रेक लिए घंटों तक संगीत सुनना कानों के लिए सबसे नुकसानदायक आदत है।
  • कान साफ करने के लिए नुकीली चीजों या ईयर बड्स का इस्तेमाल करना, जो पर्दे को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संक्रमण फैला सकते हैं।
  • शोर वाली जगहों (जैसे ट्रैफिक या फैक्ट्री) पर बिना किसी सुरक्षात्मक ईयरप्लग के लंबे समय तक रहना सुनने की शक्ति को स्थायी रूप से छीन लेता है।

 

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World Hearing Day 2026: 1 in 10 People Could Face Hearing Loss by 2050 WHO Reveals the Shocking Root Cause
इयरफोन के बजाय हेडफोन का यूज करें - फोटो : Freepik.com
क्या सावधानियां बरतना जरूरी?
  • शोर-शराबे वाले वातावरण में नॉइज-कैंसलिंग हेडफोन्स या ईयरप्लग का उपयोग करें।
  • कानों में दर्द, भारीपन या 'टिनिटस' (घंटी बजना) जैसे लक्षण दिखने पर घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • ईयरफोन के बजाय हेडफोन का उपयोग करें और वो भी एक घंटे के बाद कान को थोड़ी देर के लिए आराम जरूर दें।

स्रोत और संदर्भ
Deafness and hearing loss

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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