हिंदी दिवस 2022: हर साल 14 अगस्त को हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत के लिए हिंदी भाषा ही नहीं, पहचान है। हिंदी एक माध्यम है, जिस ने आधे से ज्यादा देश को जोड़ रखा है। भले ही हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला है, लेकिन देश के कई हिस्सों में हिंदी मातृभाषा है तो कई जगहों पर कार्य भाषा है। हिंदी को राजभाषा का दर्जा भी दिया जाता है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कार्यालयों में आधिकारिक भाषा के तौर पर हिंदी का उपयोग किया जाता है। हिंदी जन-जन की भाषा है लेकिन अंग्रेजी के बढ़ते चलन ने लोगों को हिंदी से दूर कर दिया है। कई युवा और बच्चे हिंदी से ज्यादा अंग्रेजी भाषा में बात करते हैं। उन्हें हिंदी बोलना और लिखना कठिन लगता है। आसान तरीके से हिंदी को अपनाने के लिए भाषा को समझें। ये रहीं कुछ सामान्य बातें, जो हिंदी को बनाएगी आसान।
हिंदी दिवस 2022: हिंदी लगती है कठिन तो इन बातों का रखें ध्यान, आसान लगेगी भाषा
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जैसी हिंदी बोलें, वैसी ही लिखें
हिंदी की खास बात है कि जैसा आप बोलते हैं, उसी तरह इसे लिखा जाता है। हालांकि प्रांतीय स्तर पर अलग भाषाओं और बोलियों के असर के साथ हिंदी बोलने वाले जब उसी असर के साथ इसे लिखते हैं तो त्रुटियां हो सकती हैं। जैसे बांग्ला में पानी को खाने का अनुरोध करते हैं। जबकि शुद्ध हिंदी में पानी पिया जाता है। दक्षिण भारतीय भाषाओं में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग के शब्द, हिंदी में बदलते समय असमंजस में आ जाते हैं। इसलिए सही हिंदी लिखने के लिए हिंदी का सही उच्चारण करना चाहिए।
हिंदी की मात्राएं
हिंदी में छोटी और बड़ी मात्राएं होती हैं। बोलने के तरीके से आप छोटी और बड़ी मात्राओं के अंतर को समझ सकते हैं। जैसे- 'भारत-पाकिस्तान' के उच्चारण से आप समझ सकते हैं कि भ, प और त में आ की मात्रा का उपयोग हुआ है, तो वहीं पाकिस्तान के क में छोटी इ लगेगी, न की बड़ी ई। बच्चों को हिंदी पढ़ाते समय बड़ी मात्राओं वाले शब्दों को जोर देकर पढ़ाएं और छोटी मात्राओं वाले शब्द पर कम जोर दें। ताकि वह मात्राओं के सही इस्तेमाल की आदत बचपन से ही डाल सकें।
हिंदी की बिंदी
हिंदी में अक्सर बिंदी को लेकर त्रुटियां होती हैं। किस शब्द में बिंदी लगानी है और कहां बिंदी का उपयोग नहीं होना है, ये उच्चारण से समझ सकते हैं। जैसे- मैं, में और हैं, जैसे शब्दों में अक्सर लोग बिंदी हटा देते हैं। लेकिन सही हिंदी बोलने की आदत, त्रुटि रहित हिंदी लेखन में सहायक होती है।
हिंदी पर गर्व
हिंदी बोलते समय लोगों को यह भी डर रहता है कि कहीं लोग उनका मजाक तो नहीं उड़ाएंगे। इसी डर में या तो लोग हिंदी का उपयोग करते ही नहीं, या डर के कारण गलत हिंदी का उपयोग करते हैं। हिंदी को बोलने, लिखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी भाषा पर गर्व करें। हिचक या शर्म छोड़कर इस बात को समझें कि हिंदी बोलने वालों की एक अलग पहचान होती है, जो उन्हें उनके देश भारत से जोड़ती है। इसलिए हिंदी शर्म नहीं गर्व की भाषा है।