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सरकार बनाम शंकराचार्य: माघ मेला कांड के बाद 'बटुक पूजा' की सियासत, संघ का दखल या सिर्फ आस्था! छिड़ी सियासी बहस

Fri, 20 Feb 2026 10:10 AM IST
भूपेन्द्र सिंह सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 20 Feb 2026 10:10 AM IST
सार

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बटुकों के सम्मान ने नई बहस छेड़ दी है। इसे सियासी नुकसान की भरपाई की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। अंदाजा यह भी लगाया जा रहा है कि बटुक पूजा में संघ व शीर्ष नेतृत्व की भूमिका भी है, या फिर सिर्फ आस्था है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Deputy CM Brajesh Pathak honour for the students sparked new political debate
शंकराचार्य विवाद, और ब्रजेश पाठक ने की बटुकों की पूजा। - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी
यूपी के प्रयागराज में माघ मेला के दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा बटुकों की शिखा खींचने को लेकर उठे सियासी विवाद के बीच उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बृहस्पतिवार को राजधानी लखनऊ में 101 बटुकों को घर पर बुलाकर सम्मानित करके नई सियासी बहस छेड़ दी है। पाठक के इस पहल को बटुकों की शिखा खींचने की घटना के बाद से उपजी ब्राम्हणों की नाराजगी को दूर करने के तौर पर भी देखा जा रहा है। उनके इस प्रयास को डैमेज कंट्रोल के तौर पर भी देखा जा रहा है।


दरअसल, प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए विवाद के अलावा यूजीसी प्रकरण को लेकर प्रदेश में ब्राह्मण समाज ने जिस तरह से आगे आकर मुखर विरोध जताया था, उसका फायदा उठाने के लिए सपा समेत पूरा विपक्ष इसे हवा दे रहा है। 
 
Deputy CM Brajesh Pathak honour for the students sparked new political debate
ब्रजेश पाठक ने बटुक पूजा की। - फोटो : अमर उजाला
विपक्ष इस घटना को ब्राह्मणों की नाराजगी से जोड़कर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। ब्रजेश पाठक ने बटुक पूजा के जरिये विपक्ष द्वारा भाजपा को ब्राह्मण विरोधी बनाने की धारणा की धार को कुंद करने के लिए सियासी तीर चलाया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्रजेश पाठक की बटुक पूजा सिर्फ उनकी निजी आस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे सियासी नुकसान की भरपाई का प्रयास है। कारण, प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति के बीच पाठक की बटुक पूजा के गहरे निहितार्थ हैं। खासतौर से तब, जब अभी दो दिन पहले ही उन्होंने एक निजी चैनल के कार्यक्रम में इस प्रकरण पर पहली बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि बटुकों पर लाठी चलाने और उनकी शिखा घसीटने वालों को महापाप लगेगा। 
 
Deputy CM Brajesh Pathak honour for the students sparked new political debate
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक। - फोटो : amar ujala
राजनीति में प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में बटुक पूजा और लखनऊ में प्रवास कर रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात संकेत देती है कि इसके पीछे सिर्फ पाठक नहीं, बल्कि संघ और शीर्ष नेतृत्व भी कहीं न कहीं खड़ा है।

एक तीर से दो निशाने

यह भी माना जा रहा है कि पाठक इस पूजा के जरिये एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं। वह ब्राह्मण नेता होने का संदेश भी दे रहे हैं और यह भी बता रहे हैं कि वह किसी दबाव में नहीं हैं। उन्हें पता है कि उनके इस कार्य पर अंगुली उठाना आसान नहीं होगा। अगर कोई सवाल पूछेगा तो वह यह तर्क दे सकते हैं कि वह खुद ब्राह्मण हैं। ऐसे में उन्होंने इसके जरिये अपने निजी समर्थकों को संतुष्ट और शांत करने की कोशिश की है। पर, परिस्थितियों को देखते हुए इस पूजा का उद्देश्य सिर्फ इतना नहीं लगता।
 
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Deputy CM Brajesh Pathak honour for the students sparked new political debate
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 100 बटुकों को किया सम्मानित, - फोटो : अमर उजाला

ब्राह्मण समाज को भी संदेश

पूजा के बाद उनका सरसंघचालक से मिलना बताता है कि यह पूजा किसी न किसी विशेष रणनीति का हिस्सा है। माघ मेला ही नहीं अन्य कुछ घटनाओं, यूजीसी गाइड लाइन, ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का रुख और शेष जातियों से संबंधित विधायकों की बैठक पर उनकी चुप्पी से ब्राह्मणों में फैले असंतोष को देखते हुए यह पूजा खास हो जाती है। जो बताती है कि पाठक ने इसके जरिये ब्राह्मणों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अकेले नहीं है। 

भाजपा ने ब्राह्मणों की पीड़ा को समझा है। उनका यह प्रयास ब्राह्मणों के आक्रोश को कितना शांत करेगा यह तो समय बताएगा लेकिन इस पूजा के जरिये पाठक ने अपने ब्राह्मण नेता होने के संदेश को मजबूती देने का प्रयास जरूर किया है।
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बटुकों का पूजन करने से घटना का नहीं हो सकता प्रायश्चित : अविमुक्तेश्वरानंद

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उधर, लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के द्वारा बटुकों का पूजन करने पर वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बटुकों का पूजन करने से प्रयागराज के माघ मेले के दौरान हुई घटना का प्रायश्चित नहीं हो सकता। 

उन्होंने कहा कि पहले पाप कीजिए और फिर प्रायश्चित करने की कोशिश। बृहस्पतिवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि केवल तिलक लगाने या पैर छूने से उस पाप का प्रायश्चित नहीं हो सकता, जो प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुलिस ने बटुकों के साथ किया।
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