‘क्या मैं सचमुच लच्छू महाराज अवार्ड के काबिल हूं’-प्रसिद्ध अभिनेत्री श्रीदेवी ने जब लखनऊ घराने के मूर्धन्य कथक गुरु पं.लच्छू महाराज की स्मृति में दिए जाने वाले अवार्ड से सम्मानित किए जाने की सूचना पाई थी, तो उनकी यही प्रतिक्रिया थी। अवार्ड समारोह की संयोजिका और वरिष्ठ कथक नृत्यांगना कुमकुम आदर्श कहती हैं कि हम सभी उनकी इस विनम्रता से हतप्रभ रह गए थे। वे अवार्ड लेने जब लखनऊ आईं तो भी उन्होंने यह सवाल दोहराया था और आयोजकों ने फिल्मों में नृत्य के उनके योगदान की चर्चा करते हुए उनके चयन की वजह बताई थी।
श्रीदेवी के रिएक्शन से हर कोई रह गया था हैरान... जब मिला था लच्छू महाराज अवॉर्ड
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यह एक सितंबर 2003 का समारोह था जिसमें प्रसिद्ध अभिनेत्री श्रीदेवी को यह प्रतिष्ठित सम्मान रवीन्द्रालय के खचाखच भरे समारोह में प्रदान किया गया था। उन्हें तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने कई प्रमुख लोगों की उपस्थिति में छठवें लच्छू महाराज अवार्ड से सम्मानित किया था। सम्मान के तहत उन्हें 51 हजार रुपए, सम्मान राशि एवं चांदी का स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। श्रीदेवी ने सदमा, इंकलाब, तोहफा, नगीना, धरम अधिकारी, आखिरी रास्ता, मिस्टर इंडिया, चांदनी, चालबाज, लम्हे, खुदा गवाह, लाडला, जुदाई जैसी फिल्मों के जरिए सिनेप्रेमियों के बीच खास जगह बनाई।
वे जानती थीं कि यह सम्मान कितने बड़े कथक गुरु के नाम के साथ जुड़ा है और इस सम्मान को लेते हुए उनका नाम भी इस सम्मान से पूर्व में सम्मानित हो चुकी रेखा (1998), सितारा देवी (1999), सचिन शंकर (2000), वहीदा रहमान (2001) और बिरजू महाराज (2002) की शृंखला में शामिल हो गया। कुमकुम आदर्श कहती हैं कि यह श्रीदेवी की विनम्रता थी कि उन्होंने लखनऊ में समारोह को पूरा समय दिया। गोलागंज स्थित लच्छू महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने गईं, शाम को समारोह में हिस्सा लिया और फिर अगले दिन संगोष्ठी में शिरकत करके लौटी। उन्होंने कथक के लिए किए जा रहे इन प्रयासों की काफी तारीफ की तथा संस्था से इसे आगे जारी रखने का आह्वान किया।
दुर्गापूजा में हुई थीं शरीक
श्रीदेवी लखनऊ में कई बार आईं। कई बार वह अपने पति बोनी कपूर के साथ आईं। वह सहारा शहर भी आती रहीं। 2013 में वह अपने पति के साथ सहारा शहर के दुर्गापूजा में शामिल हुई थीं और बताते हैं कि उन्होंने कई लोगों से कहा था कि मैं पहली बार किसी दुर्गापूजा में शरीक हो रही हूं। बताते हैं कि उन्होंने बंगाली साड़ी पहनी थी और सिन्दूर खेला में शरीक भी हुई थीं। कुछ लोग यह भी याद करते हैं कि उन्होंने पीठ पर सिन्दूर से अपने पति का नाम भी लिखवाया था।
मई में लखनऊ आने वाली थी
नगर की डिजाइनर अस्मा हुसैन बताती हैं कि इंस्टीट्यूट के वार्षिक फैशन शो में भाग लेने के लिए श्रीदेवी ने स्वीकृति प्रदान की थी। उन्होंने बताया कि अभी कुछ ही दिन पहले सारी बातें तय हुई थीं और उन्होंने शो स्टॉपर के तौर पर भाग लेने की सहमति जताई थी। पिछले वर्ष इस समारोह में अभिनेत्री सोहा अली खान शो स्टॉपर बनी थीं। अस्मा हुसैन ने बताया कि उन्होंने दो टिकट की बात कही थी जिससे यह संभावना थी कि वे अपने पति या बेटी के साथ समारोह में शिरकत करतीं।