राजधानी लखनऊ में सआदतगंज के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में सोमवार सुबह शिवाजी तिवारी (60), उनके भाई शंभू तिवारी (55) और बेटे सुयश तिवारी (30) की पड़ोसी ऋषभ शुक्ला ने गोली मारकर हत्या कर दी। किसी ने नहीं सोचा था कि कार पार्किंग और बरगद के पेड़ का चबूतरा बनाने के लिए शुरू हुआ झगड़ा खूनी संघर्ष में बदल जाएगा।
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लखनऊ तिहरा हत्याकांड: 'हाथ जोड़ती हूं', सुमेधा की चीखों से भी नहीं पसीजा कातिल; आंखों के सामने उजड़ गया परिवार
Tue, 27 Oct 2026 02:47 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 27 Oct 2026 02:47 PM IST
सार
लखनऊ में कार पार्किंग और चबूतरे के मामूली विवाद को लेकर पड़ोसी ऋषभ शुक्ला ने अंधाधुंध फायरिंग कर पूर्व कर्मचारी शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू तिवारी और होने वाले दूल्हे बेटे सुयश तिवारी की हत्या कर दी। परिवार का आरोप है कि पुलिस की कथित लापरवाही के चलते तीन लोगों की जान चली गई। वहीं, शादी की खुशियां मातम में बदल गईं।
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मुख्य आरोपी ऋषभ शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी
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मृतक सुयश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की छानबीन में ऋषभ के परिजनों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके चाचा राजेश शुक्ला के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई थी। यही वजह है कि राजेश को छह महीने के लिए जिलाबदर किया गया था। कोर्ट से स्टे लेने के बाद वह इलाके में खुलेआम टहलता रहता था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि राजेश पुलिसकर्मियों के साथ भी नजर आता था। पुलिस का कहना है कि वारदात में शामिल सभी लोगों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो न होती वारदात
चबूतरे के विवाद की जानकारी पुलिस को पहले से थी। पुलिस ने मामले में गंभीरता दिखाई होती तो शायद तीन लोगों की जान बच सकती थी। शिवाजी लगातार थाने में मामले की पैरवी कर रहे थे। बीते माह पार्षद ने चबूतरा बनाने का काम शुरू कराया था। इस पर ऋषभ ने मजदूरों की पिटाई कर दी थी। शिवाजी ने थाने में शिकायत की पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मृतक शिवाजी तिवारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंस्पेक्टर के सामने थाने में दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। बावजूद इसके दोनों पक्षों को पाबंद भी नहीं किया गया। रविवार रात भी शिवाजी थाने गए थे लेकिन वहां ऋषभ के चाचा राजेश बैठे थे। पुलिसकर्मियों ने शिवाजी को बैरंग लौटा दिया। इसके अगले दिन वारदात हो गई। शिवाजी के परिवार में उनकी पत्नी उषा और शंभू तिवारी के परिवार में पत्नी रुचि व बेटी सुमेधा बचे हैं।
पांच दिसंबर को होनी थी सुयश की शादी
शिवाजी तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। मोहल्ले में उनके प्रभाव के कारण भी ऋषभ और उसके घरवाले रंजिश रखते थे। पांच दिसंबर को शिवाजी के बेटे सुयश की शादी थी। घर में इसकी तैयारियां चल रही थीं लेकिन पल भर में इसकी खुशियां मातम में बदल गईं।
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आरोपी अधिवक्ता सुनील
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शंभू की पत्नी रुचि ने बताया कि 21 मई को सुयश की सगाई हुई थी। उसकी घर के पास ही इलेक्ट्रिक की दुकान है। वह शादी समारोहों में बिजली का ठेका भी लेता था। शिवाजी शक्ति भवन में स्टेनो पद से सेवानिवृत्त हुए थे। शंभू लखनऊ यूनिवर्सिटी में बड़े बाबू थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों पक्षों में कहासुनी के दौरान ऋषभ के पिता दिनेश शुक्ला ने शिवाजी को डंडा मार दिया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था। ऋषभ की बहनों ने भी पथराव शुरू कर दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ऋषभ ने 10 से 12 राउंड गोली चलाई। पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। मंगलवार को रिश्तेदारों के आने पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दोनों पक्षों में कहासुनी के दौरान ऋषभ के पिता दिनेश शुक्ला ने शिवाजी को डंडा मार दिया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था। ऋषभ की बहनों ने भी पथराव शुरू कर दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ऋषभ ने 10 से 12 राउंड गोली चलाई। पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराया। मंगलवार को रिश्तेदारों के आने पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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मौके पर जांच करती पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी