फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कभी भी हो सकता है कुशीनगर जैसा दर्दनाक हादसा, जोखिम में है आपके बच्चों की जान, तस्वीरें हैं गवाह

Fri, 27 Apr 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 27 Apr 2018 09:09 AM IST
विज्ञापन
pics of carelessness in school bus and school van.
स्कूल - फोटो : amar ujala

कुशीनगर में स्कूली बच्चों के साथ हुआ हादसा एक बार फिर हमारे सामने सबक लेकर हाजिर है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर संवेदनहीनता और लापरवाही बदस्तूर जारी है। राजधानी की ये चंद तस्वीरें खुद-ब-खुद यहां का हाल बयां कर रही हैं। खास बात ये है कि इस समय सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया जा रहा है। दिखावे के लिए स्कूल-कॉलेजों में जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर ये सारे दावे धराशायी नजर आते हैं और नियमों की धज्जियां उड़ाते स्कूली वाहन पूरे शहर में फर्राटा भरते दिखाई दे जाते हैं। पेश है एक रिपोर्ट :



सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर स्कूल वाहन संचालन को लेकर जो नियम बनाए गए हैं, उन नियमों को सरेआम सड़क पर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हर कदम पर बच्चों के सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सड़क पर अनफिट व कंडम स्कूल वाहन धड़ल्ले दौड़ रहे हैं और दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है। कभी भी कोई अनहोनी होने का अंदेशा बना रहता है, जिससे जान व माल का भारी नुकसान हो सकता है। (तस्वीर में फोन पर बिजी स्कूल बस का ड्राइवर, टैंपों में किसी तरह घुसकर जाते बच्चे और बस से लगभग पूरी तरह लटका बच्चा।)

pics of carelessness in school bus and school van.

स्कूल वाहनों में छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई नियम जारी किए गए हैं, लेकिन अधिकतर स्कूल वाहन उन नियमों का मखौल उड़ाते हुए दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। सामान्य तौर पर स्कूली वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, स्कूल बैग रखने की व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र, ट्रेंड ड्राइवर व कडक्टर, इमरजेंसी द्वार, अलार्म बेल आदि सुविधा होने का प्रावधान है। लेकिन अधिकतर वाहन इन सभी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।

pics of carelessness in school bus and school van.
स्कूल - फोटो : amar ujala

आठ की जगह 18-20 बच्चे तक बिठाते हैं ड्राइवर
स्कूल वैन की बात करें तो नियम के अनुसार उसमें 8 लोग और एक ड्राइवर एक समय पर सवारी कर सकते हैं। लेकिन यदि बच्चे 12 वर्ष से कम हैं तो 12 बच्चों को बैठाने का नियम है। लेकिन हाल ये है कि स्कूल वैन में ठूस-ठूसकर बच्चे बैठाए जाते हैं। बच्चे 12 वर्ष से कम उम्र के हों या फिर उससे ज्यादा वैन संचालक 18-20 बच्चों को एक साथ बैठाते हैं। उनमें न तो बैग रखने की व्यवस्था होती है और नही अन्य कोई सुविधा व सुरक्षा की व्यवस्था। (स्कूल वैन में एक के ऊपर होकर बैठे बच्चे।)

विज्ञापन
विज्ञापन
pics of carelessness in school bus and school van.
स्कूल - फोटो : amar ujala

अधिकतर प्राइवेट वैन वाले अलग से सीएनजी किट लगाकर संचालन करते हैं। जो सुरक्षा की दृष्टि से काफी खतरनाक होता है। वहीं अमूमन एक स्कूल बस में 72 सीटें होती हैं। लेकिन इनमें भी क्षमता से अधिक 90 से ज्यादा छात्रों को बैठाया जाता है। (बस में मौजूद परिचालक की नजर इस बच्चे पर नहीं है।)

विज्ञापन
pics of carelessness in school bus and school van.
स्कूल - फोटो : amar ujala

अधिकतर प्राइवेट वैन वाले अलग से सीएनजी किट लगाकर संचालन करते हैं। जो सुरक्षा की दृष्टि से काफी खतरनाक होता है। वहीं अमूमन एक स्कूल बस में 72 सीटें होती हैं। लेकिन इनमें भी क्षमता से अधिक 90 से ज्यादा छात्रों को बैठाया जाता है। (खतरनाक तरीके से बस पर चढ़ता बच्चा और टैंपो में भूसे की तरह बच्चे।)

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed