कुशीनगर में स्कूली बच्चों के साथ हुआ हादसा एक बार फिर हमारे सामने सबक लेकर हाजिर है। लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर संवेदनहीनता और लापरवाही बदस्तूर जारी है। राजधानी की ये चंद तस्वीरें खुद-ब-खुद यहां का हाल बयां कर रही हैं। खास बात ये है कि इस समय सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया जा रहा है। दिखावे के लिए स्कूल-कॉलेजों में जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर ये सारे दावे धराशायी नजर आते हैं और नियमों की धज्जियां उड़ाते स्कूली वाहन पूरे शहर में फर्राटा भरते दिखाई दे जाते हैं। पेश है एक रिपोर्ट :
कभी भी हो सकता है कुशीनगर जैसा दर्दनाक हादसा, जोखिम में है आपके बच्चों की जान, तस्वीरें हैं गवाह
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स्कूल वाहनों में छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कई नियम जारी किए गए हैं, लेकिन अधिकतर स्कूल वाहन उन नियमों का मखौल उड़ाते हुए दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। सामान्य तौर पर स्कूली वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, स्कूल बैग रखने की व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र, ट्रेंड ड्राइवर व कडक्टर, इमरजेंसी द्वार, अलार्म बेल आदि सुविधा होने का प्रावधान है। लेकिन अधिकतर वाहन इन सभी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं।
आठ की जगह 18-20 बच्चे तक बिठाते हैं ड्राइवर
स्कूल वैन की बात करें तो नियम के अनुसार उसमें 8 लोग और एक ड्राइवर एक समय पर सवारी कर सकते हैं। लेकिन यदि बच्चे 12 वर्ष से कम हैं तो 12 बच्चों को बैठाने का नियम है। लेकिन हाल ये है कि स्कूल वैन में ठूस-ठूसकर बच्चे बैठाए जाते हैं। बच्चे 12 वर्ष से कम उम्र के हों या फिर उससे ज्यादा वैन संचालक 18-20 बच्चों को एक साथ बैठाते हैं। उनमें न तो बैग रखने की व्यवस्था होती है और नही अन्य कोई सुविधा व सुरक्षा की व्यवस्था। (स्कूल वैन में एक के ऊपर होकर बैठे बच्चे।)
अधिकतर प्राइवेट वैन वाले अलग से सीएनजी किट लगाकर संचालन करते हैं। जो सुरक्षा की दृष्टि से काफी खतरनाक होता है। वहीं अमूमन एक स्कूल बस में 72 सीटें होती हैं। लेकिन इनमें भी क्षमता से अधिक 90 से ज्यादा छात्रों को बैठाया जाता है। (बस में मौजूद परिचालक की नजर इस बच्चे पर नहीं है।)
अधिकतर प्राइवेट वैन वाले अलग से सीएनजी किट लगाकर संचालन करते हैं। जो सुरक्षा की दृष्टि से काफी खतरनाक होता है। वहीं अमूमन एक स्कूल बस में 72 सीटें होती हैं। लेकिन इनमें भी क्षमता से अधिक 90 से ज्यादा छात्रों को बैठाया जाता है। (खतरनाक तरीके से बस पर चढ़ता बच्चा और टैंपो में भूसे की तरह बच्चे।)