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मान्यता: रात में रोता है एक राजकुमारी की समाधि पर उगा ये पेड़

Thu, 01 Sep 2016 12:15 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Sep 2016 12:15 PM IST
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rare parijat tree mythological stories
पार‌िजात का पेड़ - फोटो : amar ujala
यूपी के बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किमी दूर किंटूर गांव में स्थित बेहद दुर्लभ पेड़ पारिजात से जुड़ी मान्यताएं बेहद रोचक हैं। मंगलवार के दिन इस पेड़ से आशीर्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं। हरिवंश पुराण के मुताबिक ये इसे कल्पवृक्ष माना जाता है जो सभी मनोकामनाएं पूरी करता है।

 
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पार‌िजात का पेड़ - फोटो : amar ujala
माना जाता है इस गांव का नाम किंटूर कुंती के नाम पर पड़ा था। मान्यता है कि पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां अपना अज्ञातवास बिताया था। किंटूर में स्थित लंबे-चौड़े पारिजात की ज्यादातर शाखाएं मुड़ी हुई हैं। ये शाखाएं मुड़कर धरती को छूती हैं।
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पार‌िजात का पेड़ - फोटो : amar ujala
यूपी के कानपुर जिले के घाटमपुर में भी जनवरी के महीने में 250 साल पुराना पार‌िजात पेड़ पाया गया। ये अति दुर्लभ कल्प वृक्ष घाटमपुर क्षेत्र के नंदना और तेजपुर गांवों के बीच स्थ‌ित है। कृषि अनुसंधान केंद्र, दलीप नगर (कानपुर देहात) के कृषि वैज्ञानिकों ने पेड़ का निरीक्षण किया और बताया कि ऐसा ही एक वृक्ष कानपुर देहात जिले के भुजपुरा गांव के पास भी मिला है।
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पार‌िजात का पेड़ - फोटो : amar ujala
घाटमपुर-गजनेर मार्ग स्थित नंदना गांव में प्राचीन शिव मंदिर है। गांव के बुजुर्गों के मुताबिक कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण के समय यहां पेड़-पौधे लगवाए गए थे। तभी कल्प का पौधा भी लगवाया गया होगा। आगे जानें इस पेड़ से जुड़ी बेहद रोचक मान्यताएं...
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पार‌िजात का पेड़ - फोटो : amar ujala
पारिजात वृक्ष को कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि मंथन से निकलने के बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग में अपनी वाटिका में लगाया था।
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