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राममंदिर पर पुनर्विचार याचिका अदालत के समय की बर्बादी, संत बोले-सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वमान्य
Tue, 03 Dec 2019 11:22 AM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 03 Dec 2019 11:22 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट से रामलला के पक्ष में आए फैसले के खिलाफ सोमवार को मौलाना सैयद अशद राशिदी ने पक्षकार एम सिद्दीक की ओर से 217 पेज की पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इसे लेकर अयोध्या के संत-धर्माचार्यों का कहना है कि इस तरह की याचिका का अब कोई औचित्य नहीं है। याचिका केवल अदालत के समय की बर्बादी है। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में जो निर्णय दिया है कि उसको हिंदू-मुस्लिमों सभी ने माना है। फैसले में मुस्लिम पक्ष को भी पांच एकड़ जमीन देने की बात है, यह फैसला इतिहास का सबसे अच्छा फैसला है।
कमलनयन
- फोटो : अमर उजाला
अब कोई नहीं रोक सकता राममंदिर निर्माण : कमलनयन
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि रामजन्मभूमि के फैसले से पूरा राष्ट्र प्रसन्न है यहां तक कि मुस्लिम भी खुश हैं। कुछ लोग अपनी दुकान चलाने के लिए पुनर्विचार याचिका अदालत में डलवा रहे हैं। अब कुछ नहीं होने वाला है। हम सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, हमारी पूरी तैयारी है। अब राममंदिर निर्माण कोई नहीं रोक सकता।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि रामजन्मभूमि के फैसले से पूरा राष्ट्र प्रसन्न है यहां तक कि मुस्लिम भी खुश हैं। कुछ लोग अपनी दुकान चलाने के लिए पुनर्विचार याचिका अदालत में डलवा रहे हैं। अब कुछ नहीं होने वाला है। हम सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, हमारी पूरी तैयारी है। अब राममंदिर निर्माण कोई नहीं रोक सकता।
फाइल फोटो
याचिका का कोई औचित्य नहीं: सुरेश दास
-रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य पक्षकार महंत सुरेश दास ने कहा कि अब पुनर्विचार याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है। ये लोगों की नई चाल है। अधिसंख्य मुस्लिम भी फैसले से संतुष्ट हैं। याचिका डालकर अदालत के समय की बर्बादी की जा रही है। अब कोर्ट को ही निर्णय करना वह याचिका का क्या करती है, यह तो तय है कि राममंदिर जल्द बनेगा।
-रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य पक्षकार महंत सुरेश दास ने कहा कि अब पुनर्विचार याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है। ये लोगों की नई चाल है। अधिसंख्य मुस्लिम भी फैसले से संतुष्ट हैं। याचिका डालकर अदालत के समय की बर्बादी की जा रही है। अब कोर्ट को ही निर्णय करना वह याचिका का क्या करती है, यह तो तय है कि राममंदिर जल्द बनेगा।
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महंत दिनेंद्र दास
- फोटो : अमर उजाला
पहले कहा, फैसला मानेंगे, अब मुकर गए : दिनेंद्र दास
मामले में पक्षकार और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि मुस्लिम पक्ष अदालत का निर्णय आने से पूर्व कहता था जो भी निर्णय आएगा उसे मानेंगे लेकिन अब मुकर गया है। अदालत ने बहुत अच्छा फैसला दिया है। पांच एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को भी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आया है राजनीति से नहीं इसलिए अब राजनीति बंद होनी चाहिए, ऐसी याचिका का कोई मतलब नहीं।
मामले में पक्षकार और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि मुस्लिम पक्ष अदालत का निर्णय आने से पूर्व कहता था जो भी निर्णय आएगा उसे मानेंगे लेकिन अब मुकर गया है। अदालत ने बहुत अच्छा फैसला दिया है। पांच एकड़ जमीन मुस्लिम पक्ष को भी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आया है राजनीति से नहीं इसलिए अब राजनीति बंद होनी चाहिए, ऐसी याचिका का कोई मतलब नहीं।
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फाइल फोटो
सस्ती लोकप्रियता के लिए डाली याचिका : विहिप
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि यह सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए याचिका दाखिल की गई है। अदालत याचिका को खारिज कर देगी। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अपमान तो है ही साथ ही साथ जो शांति सद्भाव चाहते हैं उन तमाम मुस्लिमों का भी अपमान है, ऐसी याचिका को औचित्यहीन करार दिया जाना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि यह सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए याचिका दाखिल की गई है। अदालत याचिका को खारिज कर देगी। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अपमान तो है ही साथ ही साथ जो शांति सद्भाव चाहते हैं उन तमाम मुस्लिमों का भी अपमान है, ऐसी याचिका को औचित्यहीन करार दिया जाना चाहिए।