एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को अंतरराज्यीय खून तस्कर गिरोह का खुलासा करते हुए राजधानी से सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 302 यूनिट खून बरामद किया गया है। एसटीएफ का दावा है कि यह गिरोह कूट रचित दस्तावेजों के सहारे राजस्थान से यूपी में खून की तस्करी करता है। एसटीएफ एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक सातों आरोपियों को ठाकुरगंज के मिड लाइफ ब्लड बैंक से गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में पांच लखनऊ के, एक-एक कुशीनगर व उन्नाव के रहने वाले हैं।
ये हैं सात दरिंदे: राजस्थान से यूपी तक फैलाए खून तस्करी के तार, लोगों की जिंदगी से ऐसे करते थे खिलवाड़, 302 यूनिट खून बरामद
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एसटीएफ ने राजस्थान से यूपी में खून की तस्करी करने वाले लखनऊ के जिस गिरोह का खुलासा किया है, उसके एजेंट लखनऊ व आसपास के जिलों के अस्पतालों व ब्लड बैंकों में खून की आपूर्ति करते थे। एसटीएफ के मुताबिक तस्करी में मिड लाइफ ब्लड बैंक के मालिक मो. अम्मार और नारायणी ब्लड बैंक के मालिक अजीत दुबे शामिल हैं।
एसटीएफ के एसपी प्रमेश शुक्ला ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने राजस्थान के जयपुर स्थित तुलसी ब्लड बैंक, पिंक सिटी ब्लड बैंक, रेड ड्रॉप ब्लड सेंटर, गुरुकुल ब्लड सेंटर, ममता ब्लड बैंक चौमू, दुषात ब्लड बैंक चौमू, मानवता ब्लड बैंक सीकर, शेखावटी ब्लड बैंक चुरू से खून की खरीद फरोख्त की बात कबूल की है। इन ब्लड बैंकों के टेक्नीशियनों के जरिए 700-800 रुपये में ब्लड बैग खरीदकर खून की तस्करी कर इन्हें ऊंचे दाम पर बेचते थे। बरामद ब्लड बैग पर मित्रा कंपनी का स्टिकर लगा था। लेकिन उस पर न तो डोनर का नाम था और न ही कलेक्शन करने वाले का नाम।
औषधि विभाग की जांच में पता चला कि गत्तों में ठूंसकर भरे ब्लड बैगों पर न एक्सपाइरी की तिथि अंकित है और न ही जरूरी तापमान की व्यवस्था। बैगों पर किसी ब्लड बैंक का लेबल भी नहीं लगा मिला। इससे साफ है कि यह अवैध रूप से तस्करी कर लाया गया था। एसटीएफ ने इस गिरोह के खिलाफ ठाकुरगंज थाने में जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करना और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
गिरफ्तार तस्कर नौशाद ने एसटीएफ को बताया कि वह रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस प्रयागराज से 2018 में डीएमएलटी की डिग्री हासिल की है। इसके बाद जोधपुर के अंबिका ब्लड बैंक में बतौर लैब टेक्नीशियन कुछ माह तक काम किया। इसी दौरान राजस्थान के कई ब्लड बैंको के चिकित्सकों व टेक्नीशियनों के संपर्क में आया। फिर चैरेटेबिल ट्रस्टों के माध्यम से संचालित ब्लड बैंकों द्वारा आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप से खून जुटाते थे। ज्यादातर बैगों की इंट्री ब्लड बैंक के दस्तावेजों में नहीं होती थी। उनको तस्करों के जरिए अधिक कीमत पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरे राज्य में बेच देते थे। इस कारोबार में उसे बिना मेहनत के मोटी रकम मिलने लगी तो फिर उसने तस्करी को अपना कारोबार बना लिया।
लखनऊ में चौक के तोप दरवाजा चौपटिया दरगाह निवासी असद, कुशीनगर के रामकोला के पकरी टोला का नौशाद अहमद, उन्नाव के फतेहपुर चौरासी के पट्टी हमीद का रोहित, मड़ियांव के फैजुल्लागंज रूकमणीपुरम निवासी करन मिश्र, बाजारखाला के भदेवा का मो. अम्मार, गुडंबा के कल्याणपुर राजीवनगर का संदीप कुमार और कृष्णानगर के इंद्रलोक कॉलोनी का अजीत दुबे तस्करी में शामिल है। एसटीएफ एसएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि इस गिरोह के बारे में एसटीएफ के एसपी प्रमेश कुमार शुक्ला की टीम को इनपुट मिला था। पूरी जानकारी जुटाने के बाद टीम ने 29 जून को ठाकुरगंज के मिड लाइफ ब्लड बैंक पर छापा मारा था। इनके पास से एक बॉक्स में रखे ब्लड बैग मिले थे जिनपर जरूरी जानकारी नहीं थी।