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इनके जज्बे को सलामः 10 साल की उम्र में ही कट गए दोनों पैर, ... पर हौसला फौलादी

Sat, 19 Oct 2019 11:53 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 19 Oct 2019 11:53 AM IST
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the story of sadhana malik singh
साधना मलिक सिंह - फोटो : अमर उजाला

ये हैं जयपुर की 42 वर्षीय साधना मलिक सिंह। 10 साल की उम्र में ही ट्रेन हादसे में दोनों पैर कट गए... पर हौसला कम न हुआ।  तैराकी में ही जिंदगी ढूंढ ली।  (फोटो मनीष वर्मा)

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साधना मलिक सिंह - फोटो : अमर उजाला

शुक्रवार को लखनऊ साई सेंटर में नेशनल एक्वेटिक चैंपियनशिप में 100 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में जब उन्होंने पूल में छलांग लगाई तो लोगों ने तालियों से उनका हौसला बढ़ाया।

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साधाना मलिक सिंह - फोटो : अमर उजाला
जब तक उन्होंने स्पर्धा पूरी नहीं कर ली, साथी खिलाड़ी लगातार उन्हें उत्साहित करते रहे। जब वे पूल से बाहर आईं तो बधाई देने वालों का तांता लग गया।
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साधना मलिक सिंह - फोटो : अमर उजाला

साधना जब दस साल की थी तो कोलकाता रेलवे स्टेशन पर उनके दोनों पैर ट्रेन से एक हादसे में कट गए थे। इसके बावजूद साधना ने हिम्मत नहीं खोई और पिता के मना करने के बावजूद वर्ष 2009 में स्वीमिंग सीखनी शुरू की।

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साधना मलिक सिंह - फोटो : अमर उजाला
इस साल उन्होंने नेशनल पैरा स्वीमिंग में स्वर्ण जीतने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद तो साधना के लिए स्वीमिंग बेहद खास हो गई।
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