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‘हत्यारे आए, पैर छुए, माफी मांगी और फिर कमलेश तिवारी को मार दिया’

Sat, 19 Oct 2019 11:15 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 19 Oct 2019 11:15 AM IST
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This is how Kamlesh Tiwari was murdered.
कमलेश तिवारी हत्याकांड। - फोटो : amar ujala

कमलेश तिवारी की हत्या से पहले हत्यारों ने उनके पैर छुए थे। माफी भी मांगी थी। चाय पी। दही बड़ा खाया। फिर हत्या करके चले गए। कमलेश तिवारी के घर पर ठहरे कुशीनगर के सौराष्ट्रजीत सिंह बताते हैं कि दोपहर करीब साढ़े बारह बजे दो व्यक्ति भइया (कमलेश तिवारी) से मिलने ऑफिस आए थे।



दोनों ने आते ही भइया के पैर छुए और माफी मांगी। भइया ने उनके लिए चाय मंगाई। हमने खुद दोनों को चाय और दही-बड़े परोसे। इसके बाद भइया ने सिगरेट-गुटखा लाने को कहा। मैं बाहर चला गया। करीब आठ-10 मिनट बाद लौटा तो भइया को खून से लथपथ जमीन पर पड़ा देख होश उड़ गए।

This is how Kamlesh Tiwari was murdered.
कमलेश तिवारी हत्याकांड। - फोटो : amar ujala

मैंने तो उन्हें मेहमान समझा...
सौराष्ट्रजीत सिंह ने बताया कि ‘जिन्हें मेहमान समझकर चाय पिलाई। दही-बड़े खिलाए। क्या पता था वही भइया को मारकर भाग जाएंगे।’ सौराष्ट्रजीत सिंह ने बताया कि वह तीन साल से कमलेश तिवारी से जुड़ा था। पांच दिन पहले ही वह कार्यक्रम के सिलसिले में उनके घर आया था।

एक कार्यक्रम 15 को हुआ था जबकि 20 अक्तूबर को एक बैठक होनी थी। उसकी ही तैयारी चल रही थी। इसके बाद 22 अक्तूबर को कमलेश तिवारी को पश्चिम बंगाल में कार्यक्रम करने जाना था। सौराष्ट्रजीत ने बताया कि कमलेश तिवारी ने उसे सोशल मीडिया की जिम्मेदारी सौंपी थी।

This is how Kamlesh Tiwari was murdered.
- फोटो : amar ujala

सुरक्षा में तैनात दीवान मुसाफिर प्रसाद बेखबर रहा कमलेश के किराएदार ने सुनी फायरिंग की आवाज
कमलेश की सुरक्षा में तैनात दीवान मुसाफिर प्रसाद को उनकी हत्या के बारे में कोई खबर ही नहीं थी। उसने न ही गोली की आवाज सुनी और न ही किसी को भागते हुए देखा। सिर्फ कमलेश तिवारी के मकान के ऊपरी हिस्से में रहने वाली किरायेदार नीतू सिंह ने गोली की आवाज सुनी। उसने पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी भी दी।

उधर, आला अधिकारियों ने दीवान से पूछताछ की तो वह कोई जवाब नहीं दे पाया। उसने कहा कि गोली की आवाज सुनी न ही किसी को भागते हुए देखा। दीवान की बातें सुनकर अधिकारियों का पारा चढ़ गया। उन्होंने उसे जमकर फटकार लगाई। उधर, परिवारीजनों ने भी गोली की आवाज नहीं सुनी। कमलेश के ऑफिस में गोली चली। इसके बाद चाकू से उन पर ताबड़तोड़ वार किए गए। लेकिन इस बारे में पुलिस और परिवारीजनों में से किसी को भनक तक नहीं लगी।

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This is how Kamlesh Tiwari was murdered.
कमलेश तिवारी हत्याकांड। - फोटो : amar ujala

पैदल ही आए थे हत्यारे, पहचानते थे खुर्शेदबाग की गलियां
खुर्शेदबाग में कमलेश तिवारी का मकान जिस जगह पर है, वह काफी घना बसा हुआ है। उनके घर तक चार पहिया वाहन से पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है। पुलिस को अब तक तीन स्थानों की सीसीटीवी फुटेज मिली हैं जिसमें हत्यारे पैदल जाते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि, कमलेश के कर्मचारी सौराष्ट्रजीत सिंह का कहना है कि हत्यारे बाइक से आए थे। कमलेश के घर तक पहुंचने के दो सर्वाधिक प्रचलित रास्ते हैं। एक उनके घर से सटी हुई गली है जबकि दूसरी गणेशगंज वाली सड़क पर स्थित पुराना गेट है। हत्यारे कहां से आए?

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This is how Kamlesh Tiwari was murdered.
कमलेश तिवारी हत्याकांड। - फोटो : amar ujala

इस बारे में जानकारी नहीं है लेकिन वह कहां से भागे? इसकी जानकारी पुलिस को मिल गई है। पुलिस के हाथ लगी पहली फुटेज गणेशगंज के पुराने गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की है। यह जगह कमलेश के घर से करीब 500 मीटर दूर है। वहां जाने के लिए दो मोड़ आते हैं। हत्यारे यहां तक पैदल ही आते दिखे हैं। इससे साफ है कि हत्या करने आए बदमाशों को इलाके की गलियों और रास्तों के बारे में अच्छी तरह से जानकारी थी।

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