एलयू में नया सत्र 16 जुलाई से ही शुरू हो गया। पर, क्लासेज नहीं। ज्यादातर टीचर्स का एक ही बहाना स्टूडेंट्स नहीं आ रहे तो हम क्या करें। बहाना तो यह भी कि ऐसा तो हर साल शुरुआती हफ्ते में होता है।
लाइव रिपोर्टः एलयू के हाल देख चौंक पड़े राउंड पर निकले वीसी
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ये हाल है अपनी यूनिवर्सिटी का
सुबह 10.40 बजे: कुलपति प्रो. एसबी निमसे समाजशास्त्र विभाग पहुंचे। कोई भी कक्षा नहीं चल रही थी। विभागाध्यक्ष का कमरा बंद था। प्रो निमसे ने पूछा-क्लासेज क्यों नहीं चल रहीं। जवाब आया- छात्र नहीं आए और विभागाध्यक्ष प्रो. राम गणेश सचिवालय गए हैं।
सुबह 10.50 बजे: प्रो. निमसे समाजकार्य विभाग पहुंचे और एचओडी रूम में सीधे पहुंच गए। कुलपति के आने की भनक लगते ही शिक्षक भी वहां पहुंच गए। उन्होंने सवाल दागा-क्लासेज क्यों नहीं चल रहीं।
एक प्रोफेसर ने जवाब दिया- सर, सुबह एक क्लास हुई थी, जिसमें बीए प्रथम वर्ष के 19 बच्चे आए थे। कुलपति ने दूसरा सवाल दागा क्या 19 ही बच्चे हैं।
जवाब आया-नहीं दो सेक्शन में 80-80 स्टूडेंट हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. डीके सिंह के बारे में पूछने पर जवाब आया कि वे 11 बजे तक आएंगे। यह सुनकर वीसी उनका इंतजार करने के लिए वहीं रुक गए लेकिन 11.15 तक वे नहीं आए।
सुबह 11.20 बजे: वीसी अर्थशास्त्र विभाग पहुंचे तो पीजी ब्लॉक के कमरा नंबर 5 में डॉ. शशिलता सिंह बीए प्रथम वर्ष की इकोनॉमिक्स की क्लास ले रही थीं। लेकिन विभागाध्यक्ष प्रो. एके अवस्थी तब तक नहीं पहुंचे थे।
सुबह 11.23 बजे: प्रो. निमसे इंग्लिश विभाग पहुंचे तो विभागाध्यक्ष प्रो. वीपी सिंह का कमरा अंदर से बंद था। वीसी ने इस पर सवाल किया तो बताया गया कि विभागाध्यक्ष अभी नहीं आए हैं।
वीसी ने कमरा खुलवाया तो एसी चलता मिला। इसपर वीसी नाराज हुए। हालांकि कमरा नंबर 30 में डॉ. मीनाक्षी पाहवा बीए ऑनर्स प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स की क्लास ले रही थीं।
सुबह 11.30 बजे: मनोविज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. पल्लवी भटनागर समेत ज्यादातर फैकल्टी मौजूद थीं। कुलपति को रजिस्टर दिखाया गया कि वहां सुबह क्लास हो चुकी।
सुबह 11.35 बजे: दर्शनशास्त्र विभाग पहुंचे तो वहां भी कोई क्लास नहीं चल रही थी। हालांकि विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश चंद्रा व कुछ शिक्षक मौजूद थे।
समाजकार्य विभाग में कुलपति प्रो. निमसे के पहुंचने पर एक प्रोफेसर ने बताया कि छात्र एमफिल की परीक्षा दे रहे हैं। इस पर प्रो. निमसे ने कहा- परीक्षा में आना तो छात्र की मजबूरी है। यह बताओ, यूजी की क्लासेज कहां चल रही हैं।
इस पर मौजूद शिक्षकों ने कहा-सर, अभी ज्यादातर बच्चे नहीं आ रहे हैं। इतना सुनते ही वीसी ने दो टूक कहा- जब बच्चे ही नहीं आते तो फिर नई नियुक्तियां क्यों करवाई? आखिर इतने शिक्षकों की क्या जरूरत है?