मध्य प्रदेश के दमोह में हिंदू छात्राओं को हिजाब जैसा स्कार्फ पहनाने के मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने गंगा जमुना स्कूल की मान्यता निलंबित कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले को लेकर सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी। वहीं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने आरोप लगाया कि स्कूल संचालक हाजी इदरीस ने मीडिया को प्रभावित कर जनभावनाएं भड़काकर सहानुभूति हासिल करने के लिए खेद जताया। वह स्कार्फ नहीं सिर्फ हिजाब था।
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Damoh Hizab Case: हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाने वाले स्कूल की मान्यता निलंबित, बाल आयोग पहुंचा जांच करने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह/भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 02 Jun 2023 08:49 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के दमोह में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाने के मामले में गंगा जमुना स्कूल की मान्यता रद्द कर दी गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के ट्वीट के बाद इस मामले में राज्य बाल संरक्षण आयोग भी सक्रिय हो गया।
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दमोह में हिंदू छात्रों को कथित हिजाब पहनाने के मामले में प्रबंधन ने माफी मांगी।
- फोटो : अमर उजाला
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दमोह में जांच करते बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
कानूनगो ने कहा- शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई होगी
इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दो ट्वीट किए। इसमें स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी पत्र को झूठ बताया। उन्होंने लिखा- स्कार्फ नहीं था हिजाब था। झूठ मत फैलाओ हाजी इदरीस! जांच चल रही है। आज (शुक्रवार को) राज्य बाल आयोग की टीम दमोह पहुंचेगी। जो कहना है, उससे कहना। मीडिया को प्रभावित कर जनभावनाएं भड़काकर सहानुभूति हासिल करने का ड्रामा चलने वाला नहीं है। चार्ल्स डारविन के मानव विकास क्रम के वैज्ञानिक सिद्धांत के विपरीत इस स्कूल में मानव उत्पत्ति का रूढ़िवादी इस्लामिक सिद्धांत सिखाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के जिन अधिकारियों ने इस स्कूल को मान्यता देते समय इन गम्भीर मुद्दों को नज़रंदाज़ किया उन पर कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर दमोह कलेक्टर जांच कर रहे हैं। हाजी इदरीस बिल्डिंग की पुताई कर साक्ष्य मिटा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जा रहा है।
क्या है विवाद
गंगा जमना स्कूल ने हाईस्कूल परीक्षा परिणाम को लेकर फ्लेक्स लगाया था। इसमें सफल छात्र-छात्राओं की तस्वीरें थी। छात्राओं ने स्कार्फ लगाया था, लेकिन क्लोजअप में वह हिजाब जैसा लग रहा है। इस पर कुछ परिजनों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। हिंदू संगठन भी सक्रिय हुए और आरोप लगाया कि हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाया गया। प्रदर्शन कर कलेक्टर को कार्रवाई के लिए ज्ञापन भी सौंपा था। इससे पहले कलेक्टर ने जांच कराई तो पता चला कि वह स्कार्फ है, जिसे पहनना छात्राओं के लिए स्वैच्छिक है। स्कूल प्रबंधन का भी कहना है कि उसने कभी भी स्कार्फ को अनिवार्य नहीं किया है। यह मामला बढ़ा तो गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने दोबारा जांच कर कार्रवाई करने को कहा है।
राज्य बाल आयोग पहुंचा स्कूल
राज्य बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह और मेघा पवार शुक्रवरा शाम को स्कूल पहुंचे। बच्चों को स्कार्फ पहनाने का कारण पूछा। इस पर स्कूल प्रिंसिपल अफसा शेख ने कहा कि अभी तक किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। यह सुनते ही आयोग के सदस्य नाराज हो गए। कहा कि किसी ने आपत्ति नहीं दर्ज कराई तो क्या बुर्का पहना देंगे? स्कूल संचालक इदरीस खान ने कहा कि यह स्कूल का ड्रेस कोड है। जब कहा गया कि हिंदू धर्म में बच्चियों का सिर ढंकने की परंपरा नहीं है। इस आयोग के सदस्यों ने अभिभावकों से बात की, जिन्होंने आरोप लगाए थे। टीम के साथ दमोह तहसीलदार मोहित जैन और जिला शिक्षा अधिकारी एसके मिश्रा मोजूद रहे। टीम के सदस्यों ने स्कूल की किताबों की जानकारी भी ली।
इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दो ट्वीट किए। इसमें स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी पत्र को झूठ बताया। उन्होंने लिखा- स्कार्फ नहीं था हिजाब था। झूठ मत फैलाओ हाजी इदरीस! जांच चल रही है। आज (शुक्रवार को) राज्य बाल आयोग की टीम दमोह पहुंचेगी। जो कहना है, उससे कहना। मीडिया को प्रभावित कर जनभावनाएं भड़काकर सहानुभूति हासिल करने का ड्रामा चलने वाला नहीं है। चार्ल्स डारविन के मानव विकास क्रम के वैज्ञानिक सिद्धांत के विपरीत इस स्कूल में मानव उत्पत्ति का रूढ़िवादी इस्लामिक सिद्धांत सिखाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के जिन अधिकारियों ने इस स्कूल को मान्यता देते समय इन गम्भीर मुद्दों को नज़रंदाज़ किया उन पर कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर दमोह कलेक्टर जांच कर रहे हैं। हाजी इदरीस बिल्डिंग की पुताई कर साक्ष्य मिटा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जा रहा है।
चार्ल्स डारविन के मानव विकास क्रम के वैज्ञानिक सिद्धांत के विपरीत इस स्कूल में मानव उत्पत्ति का रूढ़िवादी इस्लामिक सिद्धांत बच्चों को सिखाया जा रहा है।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) June 2, 2023
शिक्षा विभाग के जिन अधिकारियों ने इस स्कूल को मान्यता देते समय इन गम्भीर मुद्दों को नज़रंदाज़ किया उन पर कार्यवाही की जाएगी।… https://t.co/9yEGKMuRb2 pic.twitter.com/k03jW0jsJl
क्या है विवाद
गंगा जमना स्कूल ने हाईस्कूल परीक्षा परिणाम को लेकर फ्लेक्स लगाया था। इसमें सफल छात्र-छात्राओं की तस्वीरें थी। छात्राओं ने स्कार्फ लगाया था, लेकिन क्लोजअप में वह हिजाब जैसा लग रहा है। इस पर कुछ परिजनों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। हिंदू संगठन भी सक्रिय हुए और आरोप लगाया कि हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाया गया। प्रदर्शन कर कलेक्टर को कार्रवाई के लिए ज्ञापन भी सौंपा था। इससे पहले कलेक्टर ने जांच कराई तो पता चला कि वह स्कार्फ है, जिसे पहनना छात्राओं के लिए स्वैच्छिक है। स्कूल प्रबंधन का भी कहना है कि उसने कभी भी स्कार्फ को अनिवार्य नहीं किया है। यह मामला बढ़ा तो गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ने दोबारा जांच कर कार्रवाई करने को कहा है।
राज्य बाल आयोग पहुंचा स्कूल
राज्य बाल आयोग के सदस्य ओंकार सिंह और मेघा पवार शुक्रवरा शाम को स्कूल पहुंचे। बच्चों को स्कार्फ पहनाने का कारण पूछा। इस पर स्कूल प्रिंसिपल अफसा शेख ने कहा कि अभी तक किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई है। यह सुनते ही आयोग के सदस्य नाराज हो गए। कहा कि किसी ने आपत्ति नहीं दर्ज कराई तो क्या बुर्का पहना देंगे? स्कूल संचालक इदरीस खान ने कहा कि यह स्कूल का ड्रेस कोड है। जब कहा गया कि हिंदू धर्म में बच्चियों का सिर ढंकने की परंपरा नहीं है। इस आयोग के सदस्यों ने अभिभावकों से बात की, जिन्होंने आरोप लगाए थे। टीम के साथ दमोह तहसीलदार मोहित जैन और जिला शिक्षा अधिकारी एसके मिश्रा मोजूद रहे। टीम के सदस्यों ने स्कूल की किताबों की जानकारी भी ली।

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