{"_id":"6a3f760e6f8f1115a001e5a2","slug":"mp-kukru-nestled-in-the-satpura-ranges-is-set-to-become-madhya-pradesh-s-new-tourism-hub-find-out-what-m-2026-06-27","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"MP: सतपुड़ा की वादियों में बसा 'कुकरू' बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन केंद्र, जानिए क्यों खास है यह हिल स्टेशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP: सतपुड़ा की वादियों में बसा 'कुकरू' बनेगा मध्यप्रदेश का नया पर्यटन केंद्र, जानिए क्यों खास है यह हिल स्टेशन
Sat, 27 Jun 2026 12:35 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sat, 27 Jun 2026 12:35 PM IST
सार
मध्य प्रदेश का बैतूल जिला अपने खूबसूरत पर्यटन स्थल कुकरू को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे के बाद इसे हिल स्टेशन, रूरल टूरिज्म और आदिवासी संस्कृति के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है।
विज्ञापन
सीएम दो दिवसीय दौरे पर बैतूल जिले के कुकरु जाएंगे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अब अपने एक नए पर्यटन स्थल कुकरू को लेकर चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दो दिवसीय दौरे के बाद यह हिल स्टेशन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सरकार और जिला प्रशासन का लक्ष्य कुकरू को केवल एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि रूरल टूरिज्म, स्थानीय उत्पादों और आदिवासी संस्कृति के मॉडल के रूप में विकसित करना है। सतपुड़ा की हरियाली, ठंडी जलवायु, मनमोहक सूर्योदय और सूर्यास्त के नजारों के कारण कुकरू को मध्यप्रदेश के उभरते हुए हिल स्टेशनों में गिना जाने लगा है।
कुकरु में वन विश्राम गृह
- फोटो : अमर उजाला
सतपुड़ा की गोद में बसा है कुकरू
कुकरू बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में एक शांत क्षेत्र हैं। इसकी समुद्र तल से 3668 फीट ऊंचाई है। यहां कॉफी, तेलिया सागौन, मिश्रित वन और अदना नदी का निकटवर्ती क्षेत्र मिलकर एक विशिष्ट वातावरण रचते हैं। समुद्र तल से ऊंचाई, वर्षा ऋतु का कोहरा और घने बादल इसे मध्य भारत के दुर्लभ पर्वतीय अनुभवों में बदल देते हैं। यह क्षेत्र सालभर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। चारों ओर घने जंगल, पहाड़ियां और प्राकृतिक हरियाली इसे खास बनाती हैं। मानसून और सर्दियों के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है।
ये भी पढ़ें- Bhopal News: भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, 27 करोड़ रुपये की जमीन से हटाए गए अवैध निर्माण
कुकरु की पहचान कॉफी बगान से जुड़ी हुई है
कुकरू की पहचान उसके कॉफी बगान से जुड़ी है। 1944 में मिस फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने यहां कॉफी रोपण की शुरुआत की। स्थानीय सहयोग से विकसित यह बागान एक समय उल्लेखनीय उत्पादन देता था। कुकरू की सबसे बड़ी पहचान यहां के सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट हैं। सुबह सूरज की पहली किरणों और शाम को डूबते सूरज का दृश्य देखने का अलग अनुभव हैं।
कुकरू प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज, रबड़ी, मावा और स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आसपास के जंगलों में मिलने वाली वन उपज और लकड़ी से बने हस्तशिल्प स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ये भी पढ़ें- MP: सीएम ने हॉकी खिलाड़ियों का किया सम्मान, स्वर्ण को 3-3 लाख और कांस्य पदक विजेताओं को 1-1 लाख देने की घोषणा
'कुकरू ब्रांड' बनाने की तैयारी
बैतूल प्रशासन ने कुकरू को नई पहचान देने के लिए "कुकरू ब्रांड" विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत वन धन योजना के माध्यम से लकड़ी से बने उत्पाद, कोदो-कुटकी, रबड़ी, मावा और डेयरी उत्पादों की ब्रांडिंग की जाएगी। साथ ही स्व-सहायता समूहों को बकरी पालन, डेयरी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने पर भी काम हो रहा है।
ये भी पढ़ें- MP News: यूसीसी विधेयक का प्रारूप अंतिम चरण में, दिल्ली में हुई बैठक, सरकार को जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट
कैसे पहुंचे कुकरू?
कुकरू परिसर में कैफेटेरिया/ कैंटीन और आवासीय सुविधा उपलब्ध है। सड़क मार्ग से यह बैतूल-भैंसदेही-घटांग-परतवाड़ा मार्ग से जुड़ा है। भैंसदेही से कुकरु की दूरी 30 किमी है और बैतूल से 90 किमी के आसपास है। इसके निकटतम हवाई अड्डा नागपुर और भोपाल हैं।
ये भी पढ़ें- MP News: बैतूल के हिल स्टेशन कुकरू में कल रात्रि चौपाल लगाएंगे मुख्यमंत्री यादव, ग्रामीणों से करेंगे सीधा संवाद
कुकरू बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में एक शांत क्षेत्र हैं। इसकी समुद्र तल से 3668 फीट ऊंचाई है। यहां कॉफी, तेलिया सागौन, मिश्रित वन और अदना नदी का निकटवर्ती क्षेत्र मिलकर एक विशिष्ट वातावरण रचते हैं। समुद्र तल से ऊंचाई, वर्षा ऋतु का कोहरा और घने बादल इसे मध्य भारत के दुर्लभ पर्वतीय अनुभवों में बदल देते हैं। यह क्षेत्र सालभर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। चारों ओर घने जंगल, पहाड़ियां और प्राकृतिक हरियाली इसे खास बनाती हैं। मानसून और सर्दियों के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है।
ये भी पढ़ें- Bhopal News: भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर चला बुलडोजर, 27 करोड़ रुपये की जमीन से हटाए गए अवैध निर्माण
कुकरु की पहचान कॉफी बगान से जुड़ी हुई है
कुकरू की पहचान उसके कॉफी बगान से जुड़ी है। 1944 में मिस फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने यहां कॉफी रोपण की शुरुआत की। स्थानीय सहयोग से विकसित यह बागान एक समय उल्लेखनीय उत्पादन देता था। कुकरू की सबसे बड़ी पहचान यहां के सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट हैं। सुबह सूरज की पहली किरणों और शाम को डूबते सूरज का दृश्य देखने का अलग अनुभव हैं।
कुकरू प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। यहां कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाज, रबड़ी, मावा और स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आसपास के जंगलों में मिलने वाली वन उपज और लकड़ी से बने हस्तशिल्प स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
ये भी पढ़ें- MP: सीएम ने हॉकी खिलाड़ियों का किया सम्मान, स्वर्ण को 3-3 लाख और कांस्य पदक विजेताओं को 1-1 लाख देने की घोषणा
'कुकरू ब्रांड' बनाने की तैयारी
बैतूल प्रशासन ने कुकरू को नई पहचान देने के लिए "कुकरू ब्रांड" विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत वन धन योजना के माध्यम से लकड़ी से बने उत्पाद, कोदो-कुटकी, रबड़ी, मावा और डेयरी उत्पादों की ब्रांडिंग की जाएगी। साथ ही स्व-सहायता समूहों को बकरी पालन, डेयरी और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ने पर भी काम हो रहा है।
ये भी पढ़ें- MP News: यूसीसी विधेयक का प्रारूप अंतिम चरण में, दिल्ली में हुई बैठक, सरकार को जल्द सौंपी जाएगी रिपोर्ट
कैसे पहुंचे कुकरू?
कुकरू परिसर में कैफेटेरिया/ कैंटीन और आवासीय सुविधा उपलब्ध है। सड़क मार्ग से यह बैतूल-भैंसदेही-घटांग-परतवाड़ा मार्ग से जुड़ा है। भैंसदेही से कुकरु की दूरी 30 किमी है और बैतूल से 90 किमी के आसपास है। इसके निकटतम हवाई अड्डा नागपुर और भोपाल हैं।
ये भी पढ़ें- MP News: बैतूल के हिल स्टेशन कुकरू में कल रात्रि चौपाल लगाएंगे मुख्यमंत्री यादव, ग्रामीणों से करेंगे सीधा संवाद
