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MP News: कौन हैं विकास मिश्रा? सीधी के नए कलेक्टर,महिला के हाथ पर लिख दिया था अपना मोबाइल नंबर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:11 AM IST
सार
सीधी जिले के नए कलेक्टर बने IAS विकास मिश्रा अपने संवेदनशील कामकाज के लिए जाने जाते हैं। डिंडौरी में उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनकर सीधे मदद की थी, जिससे उनकी अलग पहचान बनी।
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आईएएस विकास मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त रुख के बाद सीधी जिले में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को हटाकर 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा को जिले की कमान सौंपी गई है। विकास मिश्रा अपने संवेदनशील और अलग कार्यशैली के लिए जाने जाते रहे हैं। अब सीधी जिले की जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि विकास मिश्रा अपनी इसी संवेदनशील और सक्रिय कार्यशैली से जिले में बेहतर प्रशासनिक माहौल तैयार करेंगे। मिश्रा वर्तमान में मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव के साथ आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी का दायित्व संभाल रहे थे।
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विकास मिश्रा बच्चों के साथ केबीसी खेलते हुए
- फोटो : अमर उजाला
महिला के हाथ पर लिखा था मोबाइल नंबर
करीब एक साल पहले, जब विकास मिश्रा डिंडौरी जिले के कलेक्टर थे, तब उन्होंने जनसुनवाई के दौरान एक अनोखी पहल की थी। निरीक्षण के दौरान उनकी मुलाकात एक बैगा आदिवासी महिला से हुई, जो लकड़ी बेचकर जीवनयापन करती थी। महिला ने बताया था कि उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। इस पर मिश्रा ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उसे योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने महिला से पूछा था कि क्या उसके पास मोबाइल है। सकारात्मक जवाब मिलने पर उन्होंने उसके हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिख दिया था और कहा था कि यदि काम न हो तो सीधे कॉल करें।
ये भी पढ़ें- MP News: विकास मिश्रा सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल को गुना एसपी की कमान; सीएम के कड़े रुख के बाद बदलाव
बच्चों के लिए ‘केबीसी’ स्टाइल प्रतियोगिता कराई थी
डिंडौरी में कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की तर्ज पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित कराई थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं बच्चों से सवाल पूछे थे और सही जवाब देने वाले छात्रों को 300 से 1500 रुपये तक के पुरस्कार दिए थे। इस पहल से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी थी।
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छात्र को एक दिन का कलेक्टर बनाया था
इसी दौरान धनुआ सागर मॉडल स्कूल के निरीक्षण में उनकी मुलाकात 9वीं कक्षा के छात्र रुद्रप्रताप झारिया से हुई थी। छात्र ने कलेक्टर बनने की इच्छा जताई थी। इससे प्रभावित होकर मिश्रा ने उसे कलेक्ट्रेट बुलाकर एक दिन के लिए अपनी कुर्सी पर बैठाया था। इस पहल ने बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। डिंडौरी में ही उन्होंने एक रात विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास का औचक निरीक्षण किया था। वहां उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनी थीं, उनके साथ भोजन किया था और पढ़ाई में भी मदद की थी। उन्होंने बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवाल पूछे थे और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों से भी जानकारी ली थी।
करीब एक साल पहले, जब विकास मिश्रा डिंडौरी जिले के कलेक्टर थे, तब उन्होंने जनसुनवाई के दौरान एक अनोखी पहल की थी। निरीक्षण के दौरान उनकी मुलाकात एक बैगा आदिवासी महिला से हुई, जो लकड़ी बेचकर जीवनयापन करती थी। महिला ने बताया था कि उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। इस पर मिश्रा ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उसे योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने महिला से पूछा था कि क्या उसके पास मोबाइल है। सकारात्मक जवाब मिलने पर उन्होंने उसके हाथ पर अपना मोबाइल नंबर लिख दिया था और कहा था कि यदि काम न हो तो सीधे कॉल करें।
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बच्चों के लिए ‘केबीसी’ स्टाइल प्रतियोगिता कराई थी
डिंडौरी में कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की तर्ज पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित कराई थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं बच्चों से सवाल पूछे थे और सही जवाब देने वाले छात्रों को 300 से 1500 रुपये तक के पुरस्कार दिए थे। इस पहल से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी थी।
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छात्र को एक दिन का कलेक्टर बनाया था
इसी दौरान धनुआ सागर मॉडल स्कूल के निरीक्षण में उनकी मुलाकात 9वीं कक्षा के छात्र रुद्रप्रताप झारिया से हुई थी। छात्र ने कलेक्टर बनने की इच्छा जताई थी। इससे प्रभावित होकर मिश्रा ने उसे कलेक्ट्रेट बुलाकर एक दिन के लिए अपनी कुर्सी पर बैठाया था। इस पहल ने बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। डिंडौरी में ही उन्होंने एक रात विशेष पिछड़ी जनजाति छात्रावास का औचक निरीक्षण किया था। वहां उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनी थीं, उनके साथ भोजन किया था और पढ़ाई में भी मदद की थी। उन्होंने बच्चों से सामान्य ज्ञान के सवाल पूछे थे और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों से भी जानकारी ली थी।

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