{"_id":"635a4de4024c3834135297d9","slug":"homemade-recipe-to-save-two-hundred-year-old-rajwada-jute-belphal-and-lime-will-save-the-foundation-from-rat","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Indore: दो सौ साल पुराने राजवाड़ा को बचाने देसी नुस्खा, जूट, बेलफल और चूना चूहों से बचाएगा नींव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore: दो सौ साल पुराने राजवाड़ा को बचाने देसी नुस्खा, जूट, बेलफल और चूना चूहों से बचाएगा नींव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 27 Oct 2022 02:52 PM IST
सार
Indore: दो सौ साल पुराने राजवाड़ा को बचाने देसी नुस्खा, जूट, बेलफल और चूना चूहों से बचाएगा नींव
विज्ञापन
1 of 4
दो सौ साल पुराना है राजवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
Link Copied
इंदौर की दो सौ साल पुरानी विरासत राजवाड़ा को एक बार फिर 17 करोड़ रुपये खर्च कर नई उम्र नगर निगम ने दी है। राजवाड़ा की सात मंजिलों के पिलरों को विशेष तरह के नट बोल्ड से कस कर मजबूती दी गई है और राजवाड़ा की नींव को मजबूत करने के लिए जूट, बेलफल, चूना, उड़द दाल, इमली का पानी, पूजा में काम आने वाले गूगल के घोल से मजबूत किया जा रहा है, ताकि चूहे नींव के आसपास अपने बिल न बना सकें। यह घोल बारिश के पानी से भी नींव को बचाएगा।
Trending Videos
2 of 4
17 करोड़ रुपये खर्च कर किया गया है जीर्णोद्धार
- फोटो : अमर उजाला
राजवाड़ा के जीर्णोंद्धार का काम लगभग पूरा हो गया है। आगे वाले हिस्से से लोहे के एंगल निकाले जा चुके हैं और राजवाड़ा के भीतर के हिस्से से भी एंगल हटाए जा रहे हैं। चार साल पहले राजवाड़ा के बाएं भाग का जो हिस्सा टूटकर गिर गया था, उसे हूबहू बना दिया गया है। राजवाड़ा को मजबूत करने वाली टीम के इंजीनियर्स के अनुसार हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौति राजवाड़ा की उपरी चार मंजिलें थी। यहां लकड़ी का सबसे ज्यादा काम है और ज्यादातर लकडि़यां खराब हो चुकी थी। उन्हें हटाकर नई लकड़िया और स्टील लगाया गया। सातवीं मंजिल का नए सिरे से निर्माण किया गया। इसके अलावा छत से भी अनावश्यक बोझ हटाया गया है। दो महीने बाद राजवाड़ा पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 4
बेल,उड़द दाल, चूने के पानी से दी जा रही मजबूती
- फोटो : अमर उजाला
खुदाई कर देखी थी, किस नींव पर खड़ा है राजवाड़ा
तीन साल पहले जब राजवाड़ा का नए सिरे से काम शुरू हुआ तो एक हिस्से में इंजीनियर्स ने खुदाई कर देखा था कि किस तरह की नींव पर राजवाड़ा की सात मंजिलों को खड़ा किया गया है। 200 साल पहले राजवाड़ा को ओपन फाउंडेशन में बड़े पत्थरों को जोड़कर नींव तैयार की गई थी। अब राजवाड़ा के तीनों तरफ तीन-तीन फुट की नालियां खोदकर उसमें जूट, बेलफल, चूने, उड़द दाल, इमली के पानी के मिश्रण को डाला जा रहा है, ताकि नींव को मजबूती मिल सके। इसके अलावा राजवाड़ा के रंग में भी चूने और विशेष प्रकार के रसायन की कोटिंग की गई है, जो दीवारों को सीलन, दीमक और काई से बचाएगा।
4 of 4
नींव में डाला जा रहा घोल
- फोटो : अमर उजाला
दो बार जल चुका है राजवाड़ा
राजवाड़ा का निर्माण 1833 में चार लाख रुपये की लागत से मल्हारराव होलकर ने कराया था। दौलतराव सिंधिया के ससुर सरजेराव घाडगे ने यशवंत राव होलकर को सबक सिखाने के उद्देश्य से राजवाड़ा में आग लगा दी थी। तब प्रवेश द्वार की सात मंजिलों में से दो मंजिल जल गई थी। इसके बाद 1984 के दंगों के दौरान राजवाड़ा के पिछले हिस्से में आग लग गई थी।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X