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Navratri 2025: केंद्रीय संग्रहालय में है देवी की मूर्तियों का अद्भुत संग्रह, जानें इंदौर में कब शुरू हुए गरबे

Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Wed, 01 Oct 2025 04:56 PM IST
सार

शहर में स्थित केंद्रीय संग्रहालय में मंदसौर के हिंगलाजगढ़ और आसपास से प्राप्त देवी की मूर्तियों का अनोखा संग्रह है। ये मूर्तियां चौथी, पांचवीं, दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी की बताई जाती हैं।
 

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Navratri 2025: Marvelous Collection of Goddess Idols at Central Museum, Discover When Garba Began in Indore
केंद्रीय संग्रहालय में है देवी की मूर्तियों का अद्भुत संग्रह - फोटो : अमर उजाला

शहर में ऐतिहासिक सामग्री को संग्रह करने की योजना का पहला उल्लेख 1918 में इंदौर के प्रसिद्ध नगर नियोजक पैट्रिक गिडीज की योजना में किया गया था। इसके तहत महाराजा तुकोजीराव होलकर ने कृष्णपुरा पुल के पास नर रत्न मंदिर के नाम से एक संग्रहालय बनवाया, जिसमें इतिहास से जुड़ी सामग्री संजोई गई। आजादी के बाद इसे जीपीओ के पास स्थित केंद्रीय संग्रहालय में समायोजित कर दिया गया।

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केंद्रीय संग्रहालय में है देवी की मूर्तियों का अद्भुत संग्रह - फोटो : अमर उजाला
हिंगलाजगढ़ से प्राप्त देवी मूर्तियों का संग्रह
संग्रहालय में मंदसौर जिले के हिंगलाजगढ़ किले और आसपास से प्राप्त देवी मूर्तियों का अनमोल संग्रह है। हिंगलाजगढ़ किले का नाम देवी हिंगलाज पर आधारित है, जिनका प्रमुख मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। किले से प्राप्त मूर्तियां चौथी, पांचवीं, दसवीं और ग्यारहवीं शताब्दी की हैं, जो मौर्य, गुप्त और परमारकालीन कालीन कला की अद्भुत मिसाल हैं।
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परमारकालीन मूर्तियों का अनोखा संग्रह - फोटो : अमर उजाला
परमारकालीन मूर्तियों का अनुपम उदाहरण
केंद्रीय संग्रहालय में हिंगलाजगढ़ से प्राप्त सप्तदेवी मूर्तियों का संग्रह है। इसमें ब्रह्माणी, महेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, इंद्राणी और चामुंडा शामिल हैं। विशेष रूप से देवी चामुंडा की ग्यारहवीं शताब्दी की प्रतिमा अत्यंत प्रभावशाली है। इस प्रतिमा में देवी के बारह हाथों में नरमुंड हैं और आसपास सुंदर चित्रांकन किया गया है। मूर्तिकार ने देवी को दुबला बनाया है, जिससे उनकी अस्थियां स्पष्ट दिख रही हैं। यह प्रतिमा परमारकालीन मूर्ति कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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कला की अद्भुत मिसाल - फोटो : अमर उजाला
देवी सरस्वती और पार्वती की प्राचीन प्रतिमाएं
संग्रहालय में 11वीं सदी की देवी सरस्वती की मूर्तियां भी प्रदर्शित हैं। इस प्रतिमा में देवी सरस्वती वीणा और पांडुलिपि लिए विराजित हैं। इसी काल की देवी पार्वती की प्रतिमा और महिषासुरमर्दिनी की 11वीं शताब्दी की मूर्ति भी दर्शनीय हैं।
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देवी की मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
1932 में पहली बार हुए थे इंदौर में गरबे
शारदीय नवरात्र के दौरान शहर में गरबों की धूम रहती है। गली-मोहल्लों के साथ नगर की टाउनशिप और गार्डनों में भी गरबों के भव्य आयोजन होते हैं। इंदौर में गरबों की शुरुआत जेल रोड पर कुछ गुजराती परिवारों द्वारा की गई थी। इंदौर में पहली बार गरबों का आयोजन 1932 में महात्मा गांधी मार्ग पर गली नंबर 6 में किया गया था। इसके प्रमुख आयोजकों में बालाजी भोजा, लालाराम जी आइसक्रीम वाले, निर्भय राम गांधी, चतुर्भुज मामा और पोपट भाई वाघेला थे।
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