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मध्य प्रदेश: सीएम को कटघरे में खड़ा करने वाले व्यापमं को शिवराज ने खत्म किया, जानिए अंदर की कहानी
Sun, 20 Feb 2022 02:36 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 20 Feb 2022 02:36 PM IST
सार
मध्य प्रदेश सरकार ने व्यापमं का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इसका नाम कर्मचारी चयन बोर्ड होगा। व्यापमं का नाम दूसरी बार बदलने का कारण व्यापमं घोटाला है। जिसने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ही कटघरे में खड़ा कर दिया था।
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व्यापमं का नाम बदलने सरकार ने दी मंजूरी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश सरकार ने व्यापमं का नाम बदलने के प्रस्ताव को हाल ही में स्वीकृति दे दी है। अब इसका नाम कर्मचारी चयन बोर्ड होगा। व्यापमं का नाम दूसरी बार बदलने का कारण व्यापमं घोटाला है। जिसने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। इस बड़ी मुश्किल से बाहर निकलने के बाद सरकार ने इसका नाम प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) किया, लेकिन इसकी परीक्षाओं में भी घोटाले के आरोप लगने के बाद सरकार ने इसका नाम बदलने के साथ ही संचालन की जिम्मेदारी भी सामान्य प्रशासन विभाग को दे दी है।
भोपाल: व्यापमं घोटाले का विरोध करती राजनैतिक पार्टी (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
सालों बिना अधिनियम चलता रहा व्यापमं
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए सरकार ने 1970 में प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड और 1981 में इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्री-इंजीनियरिंग बोर्ड की स्थापना की। 1982 में इन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मध्य प्रदेश व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रवेश परीक्षा मंडल का गठन किया गया। बाद में इसे मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल व्यापमं का नाम दिया गया। खास बात यह है कि 2007 तक व्यापमं बिना अधिनियम के ही चलता रहा। व्यापमं घोटाले की बदनामी से निकलने और छवि सुधारने 2016 में फिर इसका नाम प्रोफेशन एग्जामिनेशन बोर्ड किया गया।
व्यापमं घोटाले के खिलाफ धरना प्रदर्शन में बैठे छात्र (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे आया घोटाला सामने
व्यापमं की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में किसी दूसरे की जगह बैठाकर परीक्षा दिलाने को लेकर भोपाल में 2009-10 में एमपी नगर और कोहेफिजा थाने में शिकायत दर्ज हुई, लेकिन इसकी जांच ठंडे बस्ते में ही रही। 2013 की परीक्षा के पहले रात को इंदौर पुलिस ने होटलों की जांच की। यहां से कुछ संदिग्ध छात्र पकड़ाएं, जिन्होंने पुलिस पूछताछ में बड़ा खुलासा किया। जिसकी एफआईआर 7 जुलाई 2013 को राजेन्द्र नगर थाना इंदौर में दर्ज की गई। इसके बाद घोटाले की परत दर परत खुलती गई।
सेंट्रल सर्वर की हार्ड डिस्क ने मचाया हंगामा
इंदौर पुलिस ने जुलाई 2013 में व्यापमं के सेंट्रल सर्वर की हार्ड डिस्क जब्त की। इसके बाद गिरफ्तारियां शुरू हुईं। उस समय ग्वालियर क्षेत्र के रहने वाले डॉ. जगदीश सागर को गिरफ्तार किया गया। हार्ड डिस्क के बाद पॉलिटिशियन के साथ ही कई अधिकारी और बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद हंगामा मच गया। इसकी जांच में इंदौर पुलिस पर भी सवाल उठने लगे। फिर इसकी जांच एसटीएफ को दे दी गई।
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व्यापमं का मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सागर (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
बड़े बड़े लोगों के नाम आए
व्यापमं घोटाले में एसटीएफ ने 2014 में पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा राज्यपाल राम नरेश यादव उनके ओएसडी और बेटों पर भी गड़बड़ी के आरोप लगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती समेत भाजपा और आरएसएस से जुड़े कई नेता और पदाधिकारियों पर भी आरोप लगे। वहीं, शिवराज सिंह पर एक समय इस्तीफे तक का दबाव आ गया। हालांकि उनका कई वरिष्ठ नेताओं ने बचाव किया। उनको अपने आप को बेदाग साबित करने के लिए दिल्ली तक दौड़ लगानी पड़ी। हालांकि उन पर लगे आरोप बेबुनियाद निकले, लेकिन व्यापमं की छवि ने उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
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व्यापमं घोटाले में सीएम शिवराज के साथ तत्कालीन राज्यपाल राम नरेश यादव का नाम भी जुड़ा था (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
शिक्षा जगत का सबसे बड़ा घोटाला
व्यापमं को शिक्षा जगत का सबसे बड़ा घोटाला कहा जाता है। 45 संदिग्ध मौतों ने इस घोटाले को राष्ट्रीय स्तर पर हाईलाइट कर दिया। सीबीआई अब तक 55 से ज्यादा केस दर्ज कर चुकी है। इसमें 2500 से ज्यादा आरोपी बनाए गए हैं। जिनमें से करीब 2 हजार लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
