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Jalore News: जर्जर स्कूल भवन बने खतरे की घंटी, बेखबर जिम्मेदार; क्या किसी बड़े हादसे का है इंतजार?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 25 Jul 2025 08:45 PM IST
सार

आज सवेरे झालावाड़ के स्कूल हादसे ने पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति की तरफ सबका ध्यान खींचा है। जालौर जिले के विभिन्न इलाकों से आई जर्जर स्कूल भवनों की तस्वीरें सीधे तौर पर इनकी हालत बयां कर रही है।

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Jalore News: Crumbling School Buildings Ring Alarm Bells- Are Authorities Waiting for Another Tragedy?
जर्जर स्कूल भवन बने खतरे की घंटी - फोटो : अमर उजाला

झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति को उजागर करके रख दिया है। सरकार भले ही जर्जर स्कूल भवनों को लेकर अब संवेदनशीलता दिखाने के दावे कर रही हो, लेकिन जालौर जिले के हालात इन दावों की सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। यहां के कई स्कूल भवन बेहद जर्जर हालत में हैं, जिनमें बच्चों की पढ़ाई किसी खतरे से कम नहीं है।

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हादसे के इंतजार में बेहाल छत - फोटो : अमर उजाला
जिले के आहोर उपखंड क्षेत्र के भाद्राजून कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में है। कई कमरों की दीवारों में दरारें हैं, छतें कमजोर हो चुकी हैं और किसी भी वक्त गिर सकती हैं। इसके बावजूद प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से न कोई मरम्मत करवाई गई है और न ही भवन को उपयोग से बाहर घोषित किया गया है। स्थानीय लोग लगातार इस ओर ध्यान दिला रहे हैं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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टपकती छत और दरकती दीवारें - फोटो : अमर उजाला
बारिश में टपकती छत और दरकती दीवारें

आहोर के ही मंडला गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की हालत भी कुछ अलग नहीं है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता है और दीवारों से होकर भीतर घुसता है। दीवारों में गहरी दरारें आ चुकी हैं, जिससे कभी भी दीवार गिरने का खतरा बना हुआ है। स्कूल स्टाफ और ग्रामीण कई बार मरम्मत की मांग कर चुके हैं, मगर नतीजा शून्य।

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क्लासरूम की स्थिति - फोटो : अमर उजाला
भामाशाह ने बनवाया था स्कूल, अब बन चुका है खतरा

मांडवला गांव के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी गंभीर है। एक भामाशाह द्वारा बनवाया गया भवन अब बिलकुल जर्जर हो चुका है। स्थानीय विद्यालय प्रशासन का कहना है कि 2023 से 2025 तक तीन बार शिक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन न तो मरम्मत हुई और न ही किसी प्रकार की स्वीकृति मिली।
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फर्श पर से भी उखड़ा प्लास्टर - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि सरकार ने स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है लेकिन जालौर जैसे इलाकों के स्कूलों में मरम्मत का यह पैसा पहुंचने और इन जर्जर स्कूलों के हालात सुधरने में अभी काफी समय है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार को किसी और बड़े हादसे का इंतजार है?
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