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Congress Chintan Shivir: एक परिवार एक टिकट के प्रस्ताव से आर्थिक नीतियों पर सवाल तक, 10 पॉइंट्स में चिंतन शिविर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर/जयपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 14 May 2022 06:01 PM IST
सार
Congress Chintan Shivir in Rajasthan: कांग्रेस का चिंतन शिविर शुक्रवार को उदयपुर में शुरू हुआ। इसमें कई प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। सबसे अहम है संगठनात्मक फेरबदल से जुड़े प्रस्ताव।
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चिंतन शिविर के पहले दिन राहुल गांधी और सोनिया गांधी।
- फोटो : सोशल मीडिया
लोकसभा और विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही हार और संगठनात्मक कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर शुक्रवार को शुरू हुआ। संगठनात्मक स्तर पर कई बदलावों की उम्मीद की जा रही है। इसके कुछ प्रस्ताव अब तक सामने आए हैं। आइए, 10 पॉइंट्स में जानते हैं कि चिंतन शिविर में अब तक क्या-क्या हुआ?
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चिंतन शिविर का आगाज सोनिया गांधी के भाषण से हुआ।
- फोटो : सोशल मीडिया
3. सोनिया ने नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा
चिंतन शिविर का आगाज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उद्घाटन भाषण से हुआ। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में लोग डर और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। मोदी सरकार राजनीतिक विरोधियों को धमकाने के लिए जांच संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
4. पार्टी ने बहुत कुछ दिया, अब उसे देने का वक्त
सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि अब तक पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, अब उसे लौटाने का वक्त आ गया है। संगठन स्तर पर कई बदलाव होने हैं। असाधारण चुनौतियों का सामना करने के लिए असाधारण कदम उठाने पड़ते हैं। कांग्रेस नेता भी इसके लिए तैयार रहे, तभी हम दोबारा उस स्थिति में पहुंच सकेंगे जिसकी उम्मीद जनता कर रही है।
5. शिविर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं
अजय माकन ने यह साफ कर दिया था कि किसी भी सदस्य को चिंतन शिविर में मोबाइल के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। नौ पैनल बने हैं, जो अलग-अलग प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं। इन चर्चाओं के बाद चिंतन शिविर में अंतिम फैसले होंगे।
चिंतन शिविर का आगाज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उद्घाटन भाषण से हुआ। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश में लोग डर और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। मोदी सरकार राजनीतिक विरोधियों को धमकाने के लिए जांच संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
4. पार्टी ने बहुत कुछ दिया, अब उसे देने का वक्त
सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि अब तक पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, अब उसे लौटाने का वक्त आ गया है। संगठन स्तर पर कई बदलाव होने हैं। असाधारण चुनौतियों का सामना करने के लिए असाधारण कदम उठाने पड़ते हैं। कांग्रेस नेता भी इसके लिए तैयार रहे, तभी हम दोबारा उस स्थिति में पहुंच सकेंगे जिसकी उम्मीद जनता कर रही है।
5. शिविर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं
अजय माकन ने यह साफ कर दिया था कि किसी भी सदस्य को चिंतन शिविर में मोबाइल के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। नौ पैनल बने हैं, जो अलग-अलग प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं। इन चर्चाओं के बाद चिंतन शिविर में अंतिम फैसले होंगे।
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राहुल गांधी पूरे समय सोनिया गांधी के साथ रहे। वहीं, प्रियंका गांधी अन्य नेताओं के साथ दिखाई दीं।
- फोटो : सोशल मीडिया
6. जिन राज्यों में चुनाव है, वहां रहेगा फोकस
चिंतन शिविर में उन राज्यों पर भी फोकस है, जहां इस साल या अगले साल चुनाव होने हैं। इनमें से दो राज्यों- राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें हैं। इसके बाद भी इन राज्यों के विधायकों और बड़े नेताओं को शिविर से दूर रखा गया है।
7. युवाओं की बात ज्यादा
इस चिंतन शिविर के जरिए पार्टी यह बताने की कोशिश कर रही है कि युवाओं को अधिक से अधिक मौके दिए जाएंगे। जाहिर है कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवाओं के पार्टी छोड़ने और राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच रहने वाली गहमागहमी को लेकर यह कदम उठाए जा रहे हैं। गहलोत ने भी वीडियो संदेश जारी कर यह जताने की कोशिश की कि युवाओं को मौके दिए जा रहे हैं। प्रवक्ता रागिनी नायक के नेतृत्व में पार्टी ने युवा नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे किया, जिन्होंने मोदी सरकार की युवाओं से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए।
8. मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोला। शिविर के दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार किसान विरोधी है। इसी वजह से गेहूं का उत्पादन बढ़ने के बावजूद निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां पूरी तरह से नाकाम रही है। इसी वजह से महंगाई बढ़ रही है।
चिंतन शिविर में उन राज्यों पर भी फोकस है, जहां इस साल या अगले साल चुनाव होने हैं। इनमें से दो राज्यों- राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें हैं। इसके बाद भी इन राज्यों के विधायकों और बड़े नेताओं को शिविर से दूर रखा गया है।
7. युवाओं की बात ज्यादा
इस चिंतन शिविर के जरिए पार्टी यह बताने की कोशिश कर रही है कि युवाओं को अधिक से अधिक मौके दिए जाएंगे। जाहिर है कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवाओं के पार्टी छोड़ने और राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच रहने वाली गहमागहमी को लेकर यह कदम उठाए जा रहे हैं। गहलोत ने भी वीडियो संदेश जारी कर यह जताने की कोशिश की कि युवाओं को मौके दिए जा रहे हैं। प्रवक्ता रागिनी नायक के नेतृत्व में पार्टी ने युवा नेताओं को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे किया, जिन्होंने मोदी सरकार की युवाओं से जुड़ी नीतियों पर सवाल उठाए।
8. मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोला। शिविर के दूसरे दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार किसान विरोधी है। इसी वजह से गेहूं का उत्पादन बढ़ने के बावजूद निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियां पूरी तरह से नाकाम रही है। इसी वजह से महंगाई बढ़ रही है।
कांग्रेस महासचिवों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी।
- फोटो : अमर उजाला
9. राहुल गांधी शामिल होंगे ग्रुप डिस्कशन में
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शनिवार को होने वाले सभी ग्रुप डिस्कशन में शामिल रहेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग समूहों में आए प्रस्तावों को जानेंगे और उन पर अपनी राय देंगे। साथ ही भविष्य की रणनीति बनाने पर अपनी बात भी कहेंगे।
10. नजर रहेगी फैसलों पर
कांग्रेस के चिंतन शिविर में अब तक सिर्फ प्रस्ताव और मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना ही सामने आई है। अब तक पार्टी संगठन में होने वाले बदलावों को सामने नहीं रखा गया है। बताया जाता है कि चिंतन शिविर के तीसरे और निर्णायक दिन अंतिम फैसले होंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी शनिवार को होने वाले सभी ग्रुप डिस्कशन में शामिल रहेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग समूहों में आए प्रस्तावों को जानेंगे और उन पर अपनी राय देंगे। साथ ही भविष्य की रणनीति बनाने पर अपनी बात भी कहेंगे।
10. नजर रहेगी फैसलों पर
कांग्रेस के चिंतन शिविर में अब तक सिर्फ प्रस्ताव और मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना ही सामने आई है। अब तक पार्टी संगठन में होने वाले बदलावों को सामने नहीं रखा गया है। बताया जाता है कि चिंतन शिविर के तीसरे और निर्णायक दिन अंतिम फैसले होंगे।

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