भारतीय शास्त्रों व परंपराओं के अनुसार नवरात्र साल में दो बार आते हैं। चैत्र महीने में आने वाले नवरात्र वासंतिक नवरात्र कहलाते हैं। जबकि आश्विन मास शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्र शुरू होते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले शारदीय नवरात्र में शक्ति या माता रानी की उपासना की जाती है। दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष अनुसंधान संस्थान शिमला के प्रमुख डॉ. मस्तराम शर्मा ने बताया कि रविवार सुबह 29 सितंबर से प्रथम नवरात्र शुरू होगा जो रात्रि 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। उनके अनुसार स्थिर व वृश्चिक लग्न सुबह 10 बजकर एक मिनट से 12 बजकर 22 मिनट के मध्य घट स्थापना करना सबसे शुभ रहेगा।
भारतीय गृहस्थ जीवन में शक्ति पूजन, शक्ति संवर्द्धन और शक्ति संग्रह करने के लिए नवरात्र को शुभ दिन माना जाता है। शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए इन नौ दिनों में व्रत रखने का विधान है और मां भगवती की अराधना का समय होता है। नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों मां के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और मां सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। सफलता पाने के लिए नवरात्रि के दौरान घरों में जौ बोने चाहिए। इसके साथ ही दुर्गा सप्तशती पाठ, वाल्मीकि रामायण व रामचरितमानस आदि का पाठ करने का विधान है।
शास्त्रों के अनुसार मां के इन नौ दिनों में हमें पूजा-अर्चना करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए। इन नियमों का अगर हम पालन करेंगे तो मां हमसे अवश्य ही प्रसन्न होगी और मनवांछित वरदान देगी। शास्त्रों के अनुसार अगर इन नियमों का पालन नहीं किया गया तो माता रानी का आशीर्वाद नहीं मिलता है।
ब्रह्मचर्य का पालन करें
नवरात्रि के दिनों में विषय वासनाओं से सदैव दूर रहना चाहिए। काम भावना पर नियंत्रण रखना अतिआवश्यक है। इन दिनो में महिलाओं और पुरुष दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मां की पूजा-अर्चना साफ मन से करने से ही मां प्रसन्न होती है। इसलिए इन दिनों शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए।
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ज्वाला मां
- फोटो : अमर उजाला
महिलाओं का सम्मान करना चाहिए
मां उन्हीं पर प्रसन्न होती है जो महिलाओं का सम्मान करते हैं। जिस घर-परिवार में सदैव ही महिलाओं का सम्मान होता है, वहां मां की कृपा हमेशा बनी रहती है। जो व्यक्ति महिलाओं का सम्मान करता है, उस पर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
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