इस मंदिर को बनाने की पीछे की कहानी बड़ी ही चौंकाने वाली है। काले बकरे ने इस जगह पर घुटने टेके थे जिसके बाद यहां भक्तों ने यह भव्य मंदिर बना दिया था। जब से यह मंदिर यहां बना तब से इलाके के लोग चैन की नींद सोते हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
इस मंदिर की है चौंकाने वाली कहानी, काले बकरे ने यहां टेक दिए थे घुटने
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कहा जाता है कि करीब 170 साल पहले वाल्मीकि परिवार से संबंध रखने वाले दो व्यक्तियों को सपने में एक अद्भुत शक्ति ने गुग्गा माड़ी की स्थापना करने को कहा। इसके बाद इन लोगों ने मंदिर बनाने की योजना बनाई लेकिन यह बनेगा कहां, इसे लेकर जगह तय करना आसान नहीं था।
गुग्गा जी के भक्त डींगा की इसमें अहम भूमिका रही और उन्होंने एक काले बकरे के गले में लाल डोर बांधकर खुला छोड़ दिया। पूरे सुबाथू का भ्रमण करने के बाद जहां बकरे ने घुटने टेके, वहीं माड़ी का स्थान निश्चित कर लिया गया।
कहते हैं राजस्थान के हनुमानगढ़ में बनी श्रीगुग्गामाड़ी से मिट्टी व ईंटें लाकर यहां माड़ी की आधारशिला रखी गई थी धीरे-धीरे इस पवित्र स्थान में लोगों की आस्था व श्रद्धा बढ़ती गई और वर्तमान में यहां श्रीगुग्गा जी का भव्य मंदिर स्थापित है। गुग्गा माड़ी मन्नतों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि सर्प दोष गुग्गा माड़ी के दरबार में आने से सर्पदोष से मुक्ति मिलती है।
हालांकि गुग्गा जी के संबंध में अनेक दंतकथाएं प्रचलित हैं। कहते हैं कि जब से यहां इस मंदिर की स्थापना की गई है तब से इलाके के लोगों को सांपों का भी कोई भय नहीं है। अब तक कभी भी यहां सांप के काटने का कोई मामला सामने नहीं आया। हर साल यहां गुग्गामाड़ी मेला लगता है।