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सावन का महीना शुरू, 30 दिन भूलकर भी न करें ये सब काम, शिव भगवान नाराज हो जाते हैं
28 जुलाई दिन शनिवार से सावन का महीना शुरू हो गया है और यह भगवान शिव को मनाने का समय है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है वरना नाराज हो जाएंगे भोलेनाथ।
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चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस बार सावन में भगवान शिव की पूजा में अधिक ध्यान लगाना होगा। इस साल सावन का शुभारंभ शनिवार से हुआ है और समापन रविवार को होगा। कई सालों के बाद राजसी योग लग रहा है। पूरे 30 दिनों का सावन है और इस बार चार सोमवार होंगे।
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सावन का महीना
सेक्टर-30 स्थित शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री बताते हैं कि सावन का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र, मकर राशि और कर्क लग्न में हो रहा है। मकर राशि का स्वामी शनि है। कर्क का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा और शनि सम शत्रु है, इसलिए सावन का शुभांरभ राजसी योग में हो रहा है। राजसी योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। पार्वती ने भी सावन में शिव जी को प्रसन्न करके उन्हें पति रूप में पाया था। इसलिए लड़कियां भी मनचाहा वर पा सकती हैं, बस सावन के महीने में सोमवार के व्रत रखने होंगे।
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- फोटो : अमरउजाला
अगर निर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर के साथ व्रत रखा जा सकता है। शिव पुराण का पाठ करें। इस पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र शामिल करें। तांबे का नाग भगवान शिव को अर्पित करें। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इससे कालसर्प, सर्प योग और राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव का ध्यान करें और नियमित शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
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- फोटो : अमरउजाला
सावन के महीने में मांस-मदिरा आदि के सेवन नहीं करना चाहिए। शादी जैसा शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। सावन के महीने में एक व्रती को हरी सब्जियां और साग नहीं खाना चाहिए। शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और न ही कांसे के बर्तन में खाना-खाना चाहिए। पूजा के समय में शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं। शिवलिंग पर न चढ़ाएं हल्दी।
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