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Mahakumbh 2025: महाकुंभ स्नान के दौरान करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगी समस्त पापों से मुक्ति

Mon, 20 Jan 2025 12:46 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Mon, 20 Jan 2025 12:46 PM IST
सार

महाकुंभ के दौरान गंगा माता की स्तुति करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को अनेक सकारात्मक फल मिलते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी महत्वपूर्ण माना गया है।

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Mahakumbh 2025 chant these powerful mantra jaap during mahakumbh snan
महाकुंभ स्नान के दौरान करें इन मंत्रों का जाप - फोटो : Amar Ujala
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।  महाकुंभ में हर बार की तरह इस बार भी देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में एक बार होता है और यह भारत के चार पवित्र स्थलों प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इस साल ये आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह भी माना जाता है कि स्नान के समय कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए जानते हैं महाकुंभ के दौरान जप किए जाने वाले इन मंत्रों के बारे में।

 

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Mahakumbh 2025 chant these powerful mantra jaap during mahakumbh snan
महाकुंभ स्नान के दौरान इन मंत्रों का करें जाप - फोटो : अमर उजाला
महाकुंभ स्नान के दौरान इन मंत्रों का करें जाप
महाकुंभ के दौरान गंगा माता की स्तुति करना अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से व्यक्ति को अनेक सकारात्मक फल मिलते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव के कुछ विशेष मंत्रों का जाप भी महत्वपूर्ण माना गया है। इन मंत्रों का जाप करने से देवी-देवता प्रसन्न होकर सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। पुराणों और शास्त्रों में इन मंत्रों का उल्लेख मिलता है, जिनके जाप से अनेक समस्याएं दूर हो जाती हैं।
 
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भगवान शिव के मंत्र - फोटो : freepik
भगवान शिव के मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
 

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गायत्री मंत्र - फोटो : adobe stock
गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं 
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
 

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गंगा माता स्तोत्रम् - फोटो : Amar Ujala
॥ गंगा माता स्तोत्रम् ॥
देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गेत्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे।
शङ्करमौलिविहारिणि विमले मममतिरास्तां तव पदकमले॥1॥
भागीरथिसुखदायिनि मातस्तवजलमहिमा निगमे ख्यातः।
नाहं जाने तव महिमानंपाहि कृपामयि मामज्ञानम्॥2॥
हरिपदपाद्यतरङ्गिण गङ्गेहिमविधुमुक्ताधवलतरङ्गे।
दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारंकुरु कृपया भवसागरपारम्॥3॥
तव जलममलं येन निपीतंपरमपदं खलु तेन गृहीतम्।
मातर्गंगे त्वयि यो भक्तःकिल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः॥4॥
पतितोद्धारिणि जाह्नविगङ्गे खण्डितगिरिवरमण्डितभङ्गे।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्येपतितनिवारिणि त्रिभुवनधन्ये॥5॥
कल्पलतामिव फलदां लोकेप्रणमति यस्त्वां न पतति शोके।
पारावारविहारिणि गङ्गेविमुखयुवतिकृततरलापाङ्गे॥6॥
तव चेन्मातः स्रोतः स्नातःपुनरपि जठरे सोपि न जातः।
नरकनिवारिणि जाह्नवि गङ्गेकलुषविनाशिनि महिमोत्तुड़े॥7॥
पुनरसदंगे पुण्यतरंगे जयजय जाह्नवि करुणापांगे।
इंद्रमुकुटमणिराजितचरणेसुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये॥8॥
रोगं शोकं तापं पापं हरहर मे भगवति कुमतिकलापम्।
त्रिभुवनसारे वसुधाहारेत्वमसि गतिर्मम खलु संसारे॥9॥
अलकानन्दे परमानन्दे कुरुकरुणामयि कातरवन्द्ये।
तव तटनिकटे यस्य निवासःखलु वैकुण्ठे तस्य निवासः॥10॥
वरमिह नीरे कमठो मीनःकिं वा तीरे शरटः क्षीणः।
अथवा श्वपचो मलिनो दीनस्तवन हि दूरे नृपतिकुलीनः॥11॥
भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्येदेवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये।
गङ्गास्तवमिमममलं नित्यंपठति नरो यः स जयति सत्यम्॥12॥
येषां हृदये गङ्गाभक्तिस्तेषांभवति सदा सुखमुक्तिः।
मधुराकान्तापज्झटिकाभिःपरमानन्दकलितललिताभिः॥13॥
गंगास्तोत्रमिदं भवसारंवाञ्छितफलदं विमलं सारम्।
शङ्करसेवकशङ्कररचितंपठति सुखीः तव इति च समाप्तः॥14॥

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं गङ्गास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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