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PHOTOS: शुक्रिया अमर उजाला, वास्तव में जोश सच का, रिकॉर्ड की साक्षी बनी ये सरजमीं
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 29 Sep 2018 05:43 PM IST
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नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
यूपी के हरदोई में 27वीं नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता के समापन के दिन एक समय ऐसा भी आया कि सभी प्रांतों से आए स्ट्रेंथ लिफ्टिंग खिलाड़ियों व कोच ने अमर उजाला की प्रतियों को हाथों में लेकर मंच से अखबार का धन्यवाद दिया। सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में बोला 'थैंक्स अमर उजाला'। उन्होंने कहा कि जो जोश भरा अंदाज अमर उजाला ने जिले में आयोजित कार्यक्रम को दिखाया है। उसका सभी 25 प्रांतों के खिलाड़ी तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
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नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
खेल की खातिर बर्फ भी बेची
खेल किसी के जीवन में कितना महत्व रखता है, यह कर्नाटक के रहने वाले दादापीर से सीखा जा सकता है। पिता मुनीर कुली हैं, उनकी कमाई से परिवार का गुजर बसर होता है। दादापीर के खिलाड़ी बनने के लिए बच्चों के लिए बर्फ की कुल्फी बेची। इससे प्राप्त रुपयों से उन्होंने कई प्रांतों में खेलकर अपने को राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। इसका श्रेय वह अपने गुरु एच गुरु स्वामी को देते हैं। इस प्रतियोगिता में 105 भार वर्ग बेंचप्रेस में उन्होंने 285 किलो उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया है।
खेल किसी के जीवन में कितना महत्व रखता है, यह कर्नाटक के रहने वाले दादापीर से सीखा जा सकता है। पिता मुनीर कुली हैं, उनकी कमाई से परिवार का गुजर बसर होता है। दादापीर के खिलाड़ी बनने के लिए बच्चों के लिए बर्फ की कुल्फी बेची। इससे प्राप्त रुपयों से उन्होंने कई प्रांतों में खेलकर अपने को राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया। इसका श्रेय वह अपने गुरु एच गुरु स्वामी को देते हैं। इस प्रतियोगिता में 105 भार वर्ग बेंचप्रेस में उन्होंने 285 किलो उठाकर सिल्वर मेडल हासिल किया है।
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नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
विकलांगता दिल में होती, शरीर में नहीं
कर्नाटक के थामस विजय एक पैर से निशक्त हैं लेकिन उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है। प्राइवेट जॉब करने वाले विजय के अनुसार विकलांगता दिल और दिमाग में होती है, यदि आपका संकल्प दृढ़ हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं। उन्होंने दिल्ली, आंध्रा समेत कई नेशनल खेलों में गोल्ड व सिल्वर पाए हैं। यहां भी उन्होंने 76 किलोग्राम भार वर्ग में 155 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड प्राप्त किया है।
कर्नाटक के थामस विजय एक पैर से निशक्त हैं लेकिन उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है। प्राइवेट जॉब करने वाले विजय के अनुसार विकलांगता दिल और दिमाग में होती है, यदि आपका संकल्प दृढ़ हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं। उन्होंने दिल्ली, आंध्रा समेत कई नेशनल खेलों में गोल्ड व सिल्वर पाए हैं। यहां भी उन्होंने 76 किलोग्राम भार वर्ग में 155 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड प्राप्त किया है।
नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल रेफरी के लिए हुई लिखित परीक्षा
27वीं नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता में इसके नेशनल रेफरी के लिए 20 कोच व नेशनल खिलाड़ियों ने लिखित परीक्षा दी। यह परीक्षा स्टेट ज्वाइंट सेक्रेटरी दिनावादास की देखरेख में संपन्न हुई। बताया कि इसके बाद जल्द ही प्रैक्टिकल कराया जाएगा और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
27वीं नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता में इसके नेशनल रेफरी के लिए 20 कोच व नेशनल खिलाड़ियों ने लिखित परीक्षा दी। यह परीक्षा स्टेट ज्वाइंट सेक्रेटरी दिनावादास की देखरेख में संपन्न हुई। बताया कि इसके बाद जल्द ही प्रैक्टिकल कराया जाएगा और परिणाम घोषित किए जाएंगे।
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नेशनल स्ट्रेंथ लिफ्टिंग प्रतियोगिता
- फोटो : अमर उजाला
27वीं राष्ट्रीय, मास्टर्स एवं दिव्यांग राष्ट्रीय स्ट्रेंथ लिफ्टिंग इंक्लाइन बेंचप्रेस महिला व पुरुष प्रतियोगिता में हरदोई का स्पोर्ट्स स्टेडियम कई नए राष्ट्रीय रिकार्डों का साक्षी बना। प्रतियोगिताओं में किसी प्रांत की बेटी तो किसी प्रदेश के बेटों ने अपना दमखम दिखाकर पुराने रिकार्डों को चुनौती दे दी।
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