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Google Doodle की दिलचस्प कहानी: कैसे बनता है हर खास दिन के लिए खास लोगो, क्या है इसका मकसद?

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Tue, 16 Jun 2026 07:14 PM IST
सार

Google Doodle History: हर खास मौके पर Google के होमपेज पर दिखने वाला Doodle सिर्फ एक रंगीन डिजाइन नहीं होता, बल्कि इतिहास, संस्कृति और महान हस्तियों को सम्मान देने का एक अनोखा तरीका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसे बनाने के पीछे पूरी प्रक्रिया क्या होती है?

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जानिए गूगल डूडल का रोचक इतिहास - फोटो : गूगल
यदि आपने गूगल सर्च करने के लिए होम पेज खोल होगा तो आपको FIFA World Cup 2026 से प्रेरित Doodle जरूर नजर आया होगा। गूगल हर साल किसी खास मौके, त्योहार का खेल के अवसर पर डूडल (Doodle) तैयार करता है। Google Doodle हमेशा लोगों में उस खास मौके के बारे में ज्यादा जानने को प्रेरित करता है। यह फीचर आपको गूगल के अलावा किसी और सर्च इंजन पर नहीं दिखता। लेकिन क्या आप जानते हैं गूगल ने इसकी शुरुआत कब की थी और इसके पीछे क्या मकसद था? आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी।
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क्या है गूगल डूडल? - फोटो : Google
क्या है गूगल डूडल?
जब भी किसी महान वैज्ञानिक, कलाकार, राष्ट्रीय पर्व या खास ऐतिहासिक दिन की वर्षगांठ होती है, Google अपने लोगो को एक नए और रचनात्मक रूप में पेश करता है। इसे Google Doodle कहा जाता है। गूगल डूडल का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के महत्वपूर्ण त्योहारों, वर्षगांठों, और इतिहास को नई दिशा देने वाले प्रसिद्ध कलाकारों, वैज्ञानिकों और महापुरुषों के जीवन और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाना है। यह गूगल के साफ-सुथरे होमपेज पर एक मजेदार और ज्ञानवर्धक बदलाव लाता है।
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एक स्टिक फिगर से शुरू हुआ था सफर - फोटो : Google
एक स्टिक फिगर से शुरू हुआ था सफर
डूडल का इतिहास काफी रोचक है। इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी, जब गूगल के संस्थापक लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन एक म्यूजिक फेस्टिवल में हिस्सा लेने जा रहे थे। उन्होंने यूजर्स को यह बताने के लिए कि वे ऑफिस से बाहर (Out of office) हैं, गूगल के दूसरे ‘O’ के पीछे एक 'स्टिक फिगर' (stick figure) बना दिया था।

यूजर्स को यह आइडिया बहुत पसंद आया। इसके बाद 1998 में थैंक्सगिविंग पर एक टर्की और 1999 में हैलोवीन के लिए पंपकिन वाले डूडल बनाए गए। साल 2000 में, लैरी और सर्गेई ने वेबमास्टर डेनिस ह्वांग से फ्रांस के 'बैस्टिल डे' के लिए डूडल बनाने को कहा। इसे इतनी सफलता मिली कि डेनिस को 'चीफ डूडलर' बना दिया गया। 2001 में मोने (Monet) और 2002 में पिकासो (Picasso) जैसे महान कलाकारों के जन्मदिन पर डूडल बनाकर व्यक्तियों को सम्मानित करने की शुरुआत हुई।
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कैसे बनता है डूडल और कौन चुनता है विषय? - फोटो : Google
कैसे बनता है डूडल और कौन चुनता है विषय?
डूडल के पीछे किसी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पेशेवर इलस्ट्रेटर, ग्राफिक डिजाइनर, एनिमेटर और इंजीनियरों की एक पूरी टीम काम करती है। डूडल के विषय गूगल के कर्मचारियों और आम यूजर्स के सुझावों से चुने जाते हैं। टीम हर हफ्ते विचार-विमर्श करती है और साल में चार बार आधिकारिक समीक्षा करके लगभग 90 डूडल का एक शेड्यूल तैयार किया जाता है।

किसी खास देश से जुड़े Doodle पर काम करते समय स्थानीय Google टीम भी सहयोग करती है ताकि डिजाइन उस देश की संस्कृति और भावनाओं के अनुरूप हो। तैयार होने के बाद Doodle कई चरणों की समीक्षा से गुजरता है। अंतिम रूप मिलने पर इसे Google होमपेज पर प्रदर्शित किया जाता है।
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2000 से ज्यादा डूडल बन चुके हैं - फोटो : google
2,000 से ज्यादा Doodle हो चुके हैं प्रकाशित
1998 से लेकर अब तक 2,000 से अधिक डूडल बनाए जा चुके हैं। समय के साथ डूडल के डिजाइन में भी काफी बदलाव आया है। पहले यह सिर्फ साधारण चित्र होते थे, लेकिन अब HTML5 और जावास्क्रिप्ट (JavaScript) का उपयोग करके इंटरैक्टिव गेम, डिजिटल एनिमेशन, वीडियो और यहां तक कि ओरिगामी के रूप में भी डूडल बनाए जाते हैं।
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