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यहां खुलेआम होता है जुआ-सट्टा, छलकते हैं जाम, कार्रवाई कीजिए कप्तान साहब, परेशान है अवाम
Mon, 18 Nov 2019 10:01 AM IST
मुकेश कुमार
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 18 Nov 2019 10:01 AM IST
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खुलेआम होता है जुआ-सट्टा
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में एक तरफ पुलिस का दावा है कि सटोरियों और जुआरियों को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किया जा रहा है तो दूसरी ओर एत्माद्दौला स्मारक के ठीक पीछे यमुना किनारे दिनभर जुआ और सट्टा खेला जा रहा है। सटोरियों के नाम से गद्दी चल रही हैं, जुआरियों ने अड्डे (फड़) बना लिए हैं। अमर उजाला की टीम रविवार दोपहर यहां पहुंची तो लोगों ने बताया कि पुलिस इन अड्डों और गद्दियों पर छह महीने में एक बार भी नहीं आई है।
जुआ-सट्टा से महिलाएं परेशान
- फोटो : अमर उजाला
सुबह छह बजे से आने लगते हैं जुआरी
जुए के अड्डे सुबह छह बजे से लग जाते हैं। जुआरी भी आने लगते हैं। रात में मजदूरी करने वाले लोग इन जुआरियों के जाल में फंसे हुए हैं। गांधी स्मारक के पास महिलाओं ने बताया कि मजदूरों को दिहाड़ी 300 से 400 रुपये मिलती ही। इनमें से 100 रुपये जुए में और 50 टिंचर में गंवा देते हैं। पत्नी के हाथ में 150-200 रुपये थमाते हैं। वो घर चलाने के लिए और पैसे मांगती है, तो उसे पीटते हैं। एत्माद्दौला थाने में अक्तूबर माह में ऐसी 34 शिकायतें हैं जिनमें पत्नी ने शराब पीकर पत्नी को पीटा।
जुए के अड्डे सुबह छह बजे से लग जाते हैं। जुआरी भी आने लगते हैं। रात में मजदूरी करने वाले लोग इन जुआरियों के जाल में फंसे हुए हैं। गांधी स्मारक के पास महिलाओं ने बताया कि मजदूरों को दिहाड़ी 300 से 400 रुपये मिलती ही। इनमें से 100 रुपये जुए में और 50 टिंचर में गंवा देते हैं। पत्नी के हाथ में 150-200 रुपये थमाते हैं। वो घर चलाने के लिए और पैसे मांगती है, तो उसे पीटते हैं। एत्माद्दौला थाने में अक्तूबर माह में ऐसी 34 शिकायतें हैं जिनमें पत्नी ने शराब पीकर पत्नी को पीटा।
कैमरा देखते ही भागे जुआ खेलने वाले लोग
- फोटो : अमर उजाला
फोटो खिंचते ही भाग गए जुआरी
अमर उजाला टीम दोपहर तीन बजे श्रीमद् दयानंद अनाथालय के ठीक पीछे यमुना किनारे पहुंची। यहां जुए की दो फड़ लगी थीं। फोटो खिंचते ही जुआरी भाग गए। इस अड्डे के बराबर में खंडहर के भीतर टिंचर पी रहे दो युवक भी टिंचर की शीशी को छोड़कर भाग गए। एत्माद्दौला, गांधी स्मारक, आंबेडकर पुल के नीचे भी जुए के फड़ लगे हुए थे।
अमर उजाला टीम दोपहर तीन बजे श्रीमद् दयानंद अनाथालय के ठीक पीछे यमुना किनारे पहुंची। यहां जुए की दो फड़ लगी थीं। फोटो खिंचते ही जुआरी भाग गए। इस अड्डे के बराबर में खंडहर के भीतर टिंचर पी रहे दो युवक भी टिंचर की शीशी को छोड़कर भाग गए। एत्माद्दौला, गांधी स्मारक, आंबेडकर पुल के नीचे भी जुए के फड़ लगे हुए थे।
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एत्माद्दौला क्षेत्र में जुआ खेलते युवक
- फोटो : अमर उजाला
सट्टे से बर्बाद लोग फंसे सूदखोरों के जाल में
आंबेडकर पुल के पास बस्ती में अमर उजाला टीम ने महिलाओं से पूछा कि यहां जुआ, सट्टा तो नहीं होता है? जवाब मिला- यहां और होता ही क्या है? मजदूर, कारीगर, ठेकेदार सब सट्टे में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं। ये लोग एक के सौ करने के लालच में पूरी कमाई गंवा रहे हैं। परिवार में कोई बीमार हो, शादी हो, बच्चे का जन्म हो तो सूदखोरों से पैसा लेते हैं। इसके बाद सूदखोर इन्हें निचोड़ देते हैं।
आंबेडकर पुल के पास बस्ती में अमर उजाला टीम ने महिलाओं से पूछा कि यहां जुआ, सट्टा तो नहीं होता है? जवाब मिला- यहां और होता ही क्या है? मजदूर, कारीगर, ठेकेदार सब सट्टे में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं। ये लोग एक के सौ करने के लालच में पूरी कमाई गंवा रहे हैं। परिवार में कोई बीमार हो, शादी हो, बच्चे का जन्म हो तो सूदखोरों से पैसा लेते हैं। इसके बाद सूदखोर इन्हें निचोड़ देते हैं।
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एत्माद्दौला क्षेत्र स्थित चौबुर्जी स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
चौबुर्जी को बना लिया जुआरियों ने अड्डा
यमुना पार में प्राचीन स्मारक है चौबुर्जी। मुगल सम्राज्य के संस्थापक बादशाह बाबर की मृत्यु हो जाने पर पहले यहीं चौबुर्जी में कुछ समय के लिए दफनाया गया था। बाद में शव को काबुल ले जाकर स्मारक बनाया गया। स्मारक के दरवाजे पर ताला लगा है। अंदर ताश के पत्ते पड़े हैं। ठीक पीछे लोग जुआ खेल रहे हैं। पास के लोगों ने बताया कि स्मारक में अब जुआरी, नशेड़ी ही आते हैं।
यमुना पार में प्राचीन स्मारक है चौबुर्जी। मुगल सम्राज्य के संस्थापक बादशाह बाबर की मृत्यु हो जाने पर पहले यहीं चौबुर्जी में कुछ समय के लिए दफनाया गया था। बाद में शव को काबुल ले जाकर स्मारक बनाया गया। स्मारक के दरवाजे पर ताला लगा है। अंदर ताश के पत्ते पड़े हैं। ठीक पीछे लोग जुआ खेल रहे हैं। पास के लोगों ने बताया कि स्मारक में अब जुआरी, नशेड़ी ही आते हैं।