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राम मंदिर चढ़ावा चोरी में नया खुलासा: एफआईआर कराने पहुंचे थे चंपत राय, एक फोन कॉल के बाद वापस लौट आए; नई कहानी
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 01 Jul 2026 09:22 AM IST
सार
राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। चढ़ावा चोरी का मामला 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस के संज्ञान में आ गया था। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर कराने पहुंचे थे। लेकिन फोन आते ही थाने से लौट आए थे। अब कई बड़े सवाल उठ रहे हैं।
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब एक नया दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक रिपोर्ट के अनुसार, चोरी का मामला 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस के संज्ञान में आ गया था। पुलिस ने तत्काल लवकुश, मनीष यादव, करुणेश, रामशंकर समेत छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी और उन्हें हिरासत में भी लिया गया था।
दावा यह भी है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने फोन पर उनकी किसी से बातचीत कराई। जिसके बाद वह बिना तहरीर दिए वापस लौट गए।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
इसके बाद करीब 10 दिनों तक यह मामला सार्वजनिक नहीं हुआ। सात जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। अगले दिन आठ जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामला उठाया।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
इसके बाद यह प्रकरण राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया तथा राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे। हालांकि अब इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी की टीम जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में दोषी पाए गए आठ लोगों को जेल भी भेज दिया गया है।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा
- फोटो : PTI
अब यह सवाल उठा रहा है कि जब मामला 27 मई को ही सामने आ गया था तो इस मामले को दबाने का प्रयास क्यों किया गया और वह फोन किसका था जिसके दबाव में आकर चंपत राय ने एफआईआर नहीं कराई थी।
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रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
आरोपियों ने करोड़ों की चोरी कबूली अनिल मिश्रा, टिन्नू के नाम लिए
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अवनीश शुक्ला से की गई। आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया।
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