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चरस की सप्लाई का हब बनी ये कोचिंग मंडी, "आपका अपना कोई" शिकार तो नहीं हो रहा!

Sat, 10 Feb 2018 01:54 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 10 Feb 2018 01:54 PM IST
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Coaching market hub of Charas supply in kanpur
पुलिस हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
20 हजार युवाओं वाली कानपुर की काकादेव कोचिंग मंडी धीरे-धीरे चरस की सप्लाई का हब बनती जा रही है। युवाओं को चुनिंदा चाय की दुकानों, हॉस्टल में टिफिन सप्लाई करने वालों से चरस पहुंचाई जा रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब सीएम का ट्वीट कप्तान के पास पहुंचा। पुलिस ने गुरुवार को चरस तस्कर फरहद उर्फ अशरफ को गिरफ्तार किया है। जिसने चरस की अधिकतर सप्लाई काकादेव कोचिंग मंडी में करने की बात कबूली।

 
Coaching market hub of Charas supply in kanpur
पुलिस हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को एसपी पश्चिम डॉ. गौरव ग्रोवर ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि दो दिन पहले बजरिया इलाके के एक शख्स ने  मुख्यमंत्री को ट्वीट कर इलाके में चरस तस्करी की शिकायत की थी। सीएम ने एसएसपी को जांच के आदेश दिए थे। गुरुवार को बजरिया पुलिस ने चरस तस्कर फरहद को गुलाब घोसी मस्जिद के पास से दबोच लिया। उसके पास 315 बोर के आठ तमंचे, 30 कारतूस, 2 किलो चरस, दो मोबाइल फोन और एक लाख 30 हजार रुपये बरामद किए। 

 

बड़े घरवाले युवा भी हैं चरसी

Coaching market hub of Charas supply in kanpur
डेमो पिक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक फरहद ने पूछताछ में बताया कि पहले वह और उसके साथी बजरिया, चमनगंज, बेकनगंज जैसे घने इलाकों में चरस बेचते थे। यहां गरीब तबका ज्यादा होने से चरस की सप्लाई होती थी। लेकिन धीरे-धीरे चरस की लत बड़े और मध्यम घरों के युवाओं को लगने लगी। काकादेव की कोचिंग मंडी में चरस की खपत जल्दी और अधिक होती देख सप्लायरों ने इसे बड़ा बाजार बनता देखा और सप्लाई तेज कर दी। फरहद ने पुलिस को बताया कि मांग बढ़ने पर सप्लायरों ने काकादेव में ही ठिए तलाशे। चाय की दुकानें, टिफिन ब्वॉय के जरिए माल हॉस्टलों तक जाने लगा। 
 
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हुक्कों के मसाले में डालते थे चरस

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डेमो पिक
शहर के होटलों, लाउंज और रेस्टोरेंटों में खुलेआम युवाओं को हुक्का परोसा जाता रहा है। हुक्के के मसाले हर्बल, मिंट के फ्लेवर के होते हैं। युवा नशे के लिए इन हुक्कों के मसाले में चरस डलाते थे। यह चलन धीरे-धीरे पूरी मंडी तक फैलता चला गया। 

 
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बाराबंकी से लाता था चरस 

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डेमो पिक
कंघी मोहाल निवासी फरहद उर्फ अशरफ अली चरस की खेप बाराबंकी से ट्रेन के जरिए लाता था। फिर शहर में फैले सप्लायरों को बेचता था। 7 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से लाता था। पुलिस को उसने तस्करी से जुड़े तीन साथियों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।

 
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