...तस्वीरों में देखें, बूचड़खानों पर योगी सरकार का ‘ताबड़तोड़ एक्शन’
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23 दिसंबर 2013 को प्रदूषण बोर्ड ने प्रदूषण फैलने का हवाला देते हुए कानपुर के सारे बूचड़खाने बंद करा दिए थे। लेकिन, कसाइयों के हंगामे के बाद अफसरों ने दोबारा बूचड़खानों की तरफ रुख नहीं किया और उसके बाद से अवैध रूप से यहां जानवरों का कटान होने लगा था।
बुधवार को कुलीबाजार में स्लाटर हाउस में काम करने वाले लोगों ने जमकर उत्पात मचाया लेकिन पुलिस की सख्ती की वजह से उनकी एक न चल पाई। उधर फर्रुखाबाद में स्लाटर हाउसों को बंद करने के लिए भारी पुलिसबल बुलाया गया है।
कानपुर शहर के सारे बूचड़खाने 2013 से बंद हैं। पर यहां अवैध कटान धड़ल्ले से जारी है। नगर निगम ने मंगलवार को जब छापा मारा तो यहां 100 मवेशी कटाने के लिए लाए गए थे। इसके बार में नगर निगम के अफसरों को भी मालूम था। इसकी पुष्टि खुद कसाइयों ने की, लेकिन अफसरों का कुछ और ही कहना है।