कानपुर के घाटमपुर हादसे में पानी से भरी लबालब खंती से जब ट्रॉली हटाई गईं, तो लाशें ही लाशें पड़ी थीं। परिजन रो रहे थे, चिल्ला रहे थे, खंती में फंसे लोगों को बचाने की गुहार लगा रहे थे। मौके पर पहुंचे आसपास के गांवों के लोग पानी से लबालब खंती में घुसे, तो पैरों से शव टकराए तो वे सहम उठे। कांपते हाथों से ग्रामीण एक-एक करके शव खंती से बाहर ला रहे थे। किसी के हाथ में बच्चे का शव तो किसी के हाथ में बच्चे की मां का शव... चारों ओर करुण क्रंदन और चीत्कार।
Kanpur Ghatampur Accident: पानी में खो गईं थीं लाशें, बच्चों के शव उठाने में रूह कांपी, तीन परिवार उजड़े
कोई सांस दे रहा था, तो कोई भगवान से प्रार्थना
एक-एक कर लोग बाहर निकाले जा रहे थे। लोग किसी तरह से जिंदगियां बचाने के लिए जूझते रहे। डूबे लोगों को कोई मुंह से सांस देने में जुटा रहा, तो कोई छाती दबाकर पानी निकालने की कोशिश करता रहा। सब ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह से ये लोग बच जाएं।
हादसे में तीन परिवार पूरी तरह से उजड़े
हादसे में गांव के तीन परिवार ऐसे हैं जो पूरी तरह से उजड़ गए। कोरथा गांव निवासी कल्लू की पत्नी विनीता अपने दोनों बच्चों शिवम व सानवी के साथ कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। वहीं, लीलावती अपनी बेटी मनीषा व बेटे छोटू के साथ और जयदेवी अपने बेटे रवि के साथ मुंडन संस्कार में गई थीं। इन सभी की हादसे में मौत हो गई। इनके परिवार में सिर्फ विनीता, लीलावती व जयदेवी के पति बचे हैं। उनको यकीन नहीं हो रहा था कि चंद पलों में पूरा परिवार उजड़ गया।
अंधेरे से रेस्क्यू ऑपरेशन में हुई दिक्कत
रात के अंधेरे में हादसा हुआ। खंती में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। ग्रामीण टॉर्च लेकर पहुंचे। तमाम लोग गाड़ियों की हेडलाइट जलाए रहे। तब किसी तरह से रेस्क्यू ऑपरेशन चला। सिंगल रोड होना भी हादसे की बड़ी वजह रही।
मौत का ऐसा मातम... शव देखकर रह गए सन्न
एक ही गांव के 26 लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया। चारों तरफ से बस चीत्कार ही चीत्कार सुनाई दे रही थी। आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं घटना की सूचना पर जब आला अफसर और जनप्रतिनिधि पहुंचे तो एक साथ 24 शवों को देखकर सन्न रह गए। दो लोगों की मौत हैलट में हुई।