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किडनी कांड में नया खुलासा: इन मरीजों को चुनते थे दलाल; इसलिए सुबह के 3 से चार बजे के बीच करते थे ट्रांसप्लांट
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 01 Apr 2026 03:01 PM IST
सार
कानपुर के मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था।
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Kanpur Illegal kidney racket
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कानपुर में केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में करीब दो साल से अनधिकृत तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा है। यहां दिल्ली, मेरठ, नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से मरीजों व डोनरों को लाकर किडनी प्रत्यारोपित की जा रही थी। इसकी जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीम को प्रारंभिक जांच में हुई है। इस वर्ष तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका की किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्पताल के रिकार्ड में भी ब्योरा नहीं मिला
स्वास्थ्य विभाग को भी चौकन्ना किया गया था। अनधिकृत तरीके से अंग प्रत्यारोपण का खेल किस नर्सिंगहोम में हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी नहीं आई। इसी साल तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का अंग प्रत्यारोपण हुआ था। एलआईयू और क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जानकारी जुटाई, लेकिन महिला व उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था। अस्पताल के रिकार्ड में भी किसी तरह की सर्जरी का ब्योरा नहीं मिला।
स्वास्थ्य विभाग को भी चौकन्ना किया गया था। अनधिकृत तरीके से अंग प्रत्यारोपण का खेल किस नर्सिंगहोम में हो रहा है, इसकी सटीक जानकारी नहीं आई। इसी साल तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का अंग प्रत्यारोपण हुआ था। एलआईयू और क्राइम ब्रांच ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जानकारी जुटाई, लेकिन महिला व उनके परिजनों का पता नहीं चल सका था। अस्पताल के रिकार्ड में भी किसी तरह की सर्जरी का ब्योरा नहीं मिला।
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प्रिया हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
आरोपियों ने अरेबिका को कुछ दिन कल्याणपुर के नर्सिंगहोम के आईसीयू में रखा फिर दिल्ली ले गए। दिल्ली के नर्सिंगहोम के बाद नोएडा के निजी अस्पताल में डेढ़ से दो माह के लिए उनका इलाज चला। अब तक आहूजा हॉस्पिटल में सात किडनी प्रत्यारोपण की जानकारी हुई है। इस अस्पताल के कुछ स्टाफ कई अधिकृत और अनधिकृत तरीके से संचालित हो रहे कल्याणपुर, काकादेव और पनकी क्षेत्र के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए थे। वहां से मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का खेल चल रहा था।
मेड लाइफ हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्टाफ को छुट्टी देकर देर रात किया जाता था ट्रांसप्लांट
कानपुर के मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी। यह जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों को जांच में मिली है।
कानपुर के मसवानपुर चौराहा स्थित आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट देर रात या सुबह के तीन से चार बजे के बीच होता था। यह वह समय था जब अधिकतर मरीज व तीमारदार नींद में होते थे। सर्जरी के बाद किडनी रोगी व डोनर को शिफ्ट करना आसान रहता था। किडनी प्रत्यारोपण वाले दिन पूरे स्टाफ को छुट्टी दे दी जाती थी। यह जानकारी पुलिस और सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों को जांच में मिली है।
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आहूजा हॉस्पिटल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए देर रात का समय निर्धारित किया जाता था। इस दौरान सभी स्टाफ की छुट्टी कर दी जाती थी। केवल मेरठ और नोएडा के डॉक्टरों व पैरामेडिकल टीम रहती थी।