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बांदा के स्कूल में चंदे से मंगवाए थे मोमोज और फिंगर चिप्स: सोचा था पढ़कर करेंगे उजाला, बेटों को निगल गई अंधेरी
Tue, 18 Aug 2026 02:45 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
अमर उजाला नेटवर्क, बांदा
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 18 Aug 2026 02:45 PM IST
सार
बांदा के आवासीय विद्यालय में हुई बेटों की मौत से परिवार बेहाल है। दोनों परिवार बच्चों की पढ़ाई और रहने के लिए सालाना 80 हजार रुपये फीस दे रहे थे। परिवार ने सोचा था कि बच्चे पढ़कर उजाला करेंगे, लेकिन बच्चों को अंधेरी रात निगल गई।
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residential school in banda
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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साधारण किसान परिवार के नितिन और अरुण। जिनके परिवार ने अपनी खुशियों को दांव पर लगाकर बेटों के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखा था। दो-दो बेटों को बांदा के आवासीय विद्यालय में भेजकर 80 हजार रुपये सालाना फीस दे रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनके बेटों को रविवार रात का अंधेरा निगल जाएगा। घरवालों को केवल इस बात की तकलीफ सबसे अधिक है कि विद्यालय की ओर से बच्चों के बीमार होने की खबर रात में क्यों नहीं दी गई।
छात्रों की मौत पर विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी तरह से थाना चिल्ला के गांव महेंदु निवासी पुष्कर उर्फ जयकिशोर कुशवाहा ने भी दो बेटों अरुण और उत्कर्ष को आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाया था। पुष्कर भी सामान्य किसान हैं और पिता विजयपाल कुशवाहा पूर्व सैनिक है। पुष्कर ने बताया कि दोनों बेटों की शिक्षा का खर्च उनके दादा विजयपाल उठा रहे थे। पुष्कर ने बताया कि घर में पत्नी प्रीती व बेटी दीपिका है।
छात्रों की मौत पर विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटों की मौत की खबर सोमवार की सुबह जब उन्हें मिली तो उनके सामने अंधेरा छा गया। समझ नहीं आया कि आखिर कुछ घंटे में ऐसा क्या हुआ कि उनके बच्चे अब उन्हें दोबारा देखने को नहीं मिलेंगे। बेसुध हुआ परिवार सब कामकाज छोड़कर मेडिकल कॉलेज पहुंचा।
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residential school in banda
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिजनों ने कहा कि स्कूल प्रबंधक ने उन्हें अगर रात में ही खबर दी होती तो शायद वह बेहतर इलाज का प्रयास करके अपने कलेजे के टुकड़ों को बचाने का भरसक प्रयास करते लेकिन विद्यालय की ओर से की गई लापरवाही ने उनके घरों के चिराग को बुझा दिया। जिनका दुख अंतिम सांस तक उन्हें रहेगा।
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विद्यालय में बने कमरे में खाली पड़े तख्त
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं, विसरा सुरक्षित
बांदा के मेडिकल कॉलेज बांदा में सोमवार को नितिन और अरुण का पोस्टमार्टम हुआ। देर शाम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिली। बताया गया कि दोनों छात्रों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। मौत का कारण जानने के लिए उनके विसरा को सुरक्षित कर प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिससे विस्तृत जांच कर मौत का कारण पता किया जा सके। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर बलराम सिंह ने बताया कि प्रकरण में अभी तक परिवार की तरफ से शिकायत नहीं की गई। अगर शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बांदा के मेडिकल कॉलेज बांदा में सोमवार को नितिन और अरुण का पोस्टमार्टम हुआ। देर शाम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिली। बताया गया कि दोनों छात्रों की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। मौत का कारण जानने के लिए उनके विसरा को सुरक्षित कर प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिससे विस्तृत जांच कर मौत का कारण पता किया जा सके। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर बलराम सिंह ने बताया कि प्रकरण में अभी तक परिवार की तरफ से शिकायत नहीं की गई। अगर शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।