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UP: गौर पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर में महाभिषेक; फूलों की हुई होली

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 04 Mar 2026 09:13 AM IST
सार

वृन्दावन स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में श्री चैतन्य महाप्रभु के 540वें प्राकट्य महोत्सव पर महाभिषेक, अखंड हरिनाम संकीर्तन और पुष्प होली का भव्य आयोजन हुआ। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति-रस में डूबकर गौर पूर्णिमा को प्रेम और समर्पण के उत्सव के रूप में मनाया।

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Devotion at Gaur Purnima: Grand Abhishek and Kirtan at Vrindavan Chandrodaya Temple
गौर पूर्णिमा महोत्सव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
 ब्रजमंडल की विश्वविख्यात होली के उल्लास के मध्य फाल्गुन पूर्णिमा के पावन दिवस पर श्री चैतन्य महाप्रभु का 540वां प्राकट्य महोत्सव वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में दिव्य आध्यात्मिक आभा के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकाल से ही मंदिर प्रांगण में भक्तों की अविरल धारा प्रवाहित होती रही। नवीन प्रांगण में सुसज्जित फूल बंगला, छप्पन भोग, भव्य पालकी उत्सव, दिव्य महाभिषेक, अखंड हरिनाम संकीर्तन और पुष्पों की होली ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया।


महाभिषेक के दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भक्ति-रस से सराबोर वातावरण में “हरि बोल” और “गौर हरि” के जय घोष से सम्पूर्ण परिसर गूंज उठा। देश के विभिन्न नगरों मथुरा, आगरा, लखनऊ, दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, हरियाणा, ग्वालियर एवं मुरैना से आए भक्तों ने इस अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव में सहभागिता की।
 
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Devotion at Gaur Purnima: Grand Abhishek and Kirtan at Vrindavan Chandrodaya Temple
गौर पूर्णिमा महोत्सव  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने कलियुग में हरिनाम संकीर्तन की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रीमद्भागवतम् के द्वादश स्कंध से उद्धृत प्रसिद्ध श्लोक प्रस्तुत करते हुए कहा कि
“ कलेर्दोषनिधे राजन् अस्ति ह्येको महान् गुणः।
कीर्तनादेव कृष्णस्य मुक्तसङ्गः परं व्रजेत्॥   (श्री.भा. 12.3.51)॥
 
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गौर पूर्णिमा महोत्सव  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीचंचलापति दास ने श्लोक का भावार्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि यद्यपि कलियुग समस्त दोषों का भंडार है, तथापि इसमें एक महान गुण निहित है। केवल भगवान श्रीकृष्ण के नाम का संकीर्तन करने मात्र से मनुष्य समस्त सांसारिक आसक्तियों से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक पराक्रमी राजा असंख्य दस्युओं का विनाश कर देता है, उसी प्रकार हरिनाम संकीर्तन मनुष्य के जीवन में संचित दोषों और पापों का नाश कर देता है। संकीर्तन आत्मा को शुद्ध कर उसे भगवान की प्रेमाभक्ति से जोड़ देता है।
 
Devotion at Gaur Purnima: Grand Abhishek and Kirtan at Vrindavan Chandrodaya Temple
गौर पूर्णिमा महोत्सव  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मंदिर परिसर में सुसज्जित फूल बंगले की सुरभि और छप्पन भोग की दिव्य रचना ने भक्तों को अलौकिक अनुभव प्रदान किया। पालकी उत्सव में गौरांग महाप्रभु की मनोहारी झांकी ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। पुष्पों की वर्षा के मध्य जब हरिनाम संकीर्तन हुआ, तब ऐसा प्रतीत हुआ मानो सम्पूर्ण ब्रजभूमि स्वयं प्रेम-रस में स्नान कर रही हो।
 
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Devotion at Gaur Purnima: Grand Abhishek and Kirtan at Vrindavan Chandrodaya Temple
गौर पूर्णिमा महोत्सव  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गौर पूर्णिमा का यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बन गया। जहाँ हर हृदय में श्रीकृष्ण चैतन्य का प्रकाश आलोकित होता दिखाई दिया।
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