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हाशिमपुरा कांड की असली कहानी... नाम लेते ही कांप जाती है लोगों की रूह

Wed, 31 Oct 2018 04:10 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 31 Oct 2018 04:10 PM IST
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hashimpura massacre Delhi High Court sentenced 16 soldiers of PAC to life imprisonment
मेरठ न्यूज

जिस हाशिमपुरा कांड का नाम लेते ही लोगों की रूह कांपने लगती है। आज उसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में 16 पीएसी जवानों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 22 मई 1987 की तारीख यहां के लोग आज तक भी भूल नहीं पाते हैं। वो भयावह मंजर उनके दिल से निकल नहीं पाता है। इस कांड में 42 लोगों के घर उजड़ गए थे। आगे जानिए पूरी कहानी...

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मेरठ न्यूज

यहां के लोग आज भी पूछते हैं कि उनकी क्या खता थी जो उन्हें जिंदगी भर का गम दे दिया गया। मेरठ के सांप्रदायिक दंगों के इतिहास में हाशिमपुरा कांड हमेशा लोगों के दिलों- दिमाग में रहता है, क्योंकि यह ऐसी घटना थी जो हर हद तक सोचने को मजबूर करती है।

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मेरठ न्यूज

बता दें कि मारे गए 42 लोग विशेष समुदाय के थे। इनमें किसी का पति, पिता, पुत्र और किसी का भाई था। इस मामले में पीएसी के 19 जवानों को आरोपी बनाया गया था। इनपर आरोप था कि तलाशी अभियान में पकड़े गए लोगों में से 40 से 50 को पीएसी के जवान एक ट्रक में भरकर ले गए थे। इन्हें मुरादनगर की गंगनहर और गाजियाबाद हिंडन नदी में एक- एक को गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। इनमें से बाबुद्दीन, मोहम्मद उस्मान, जुल्फिकार, मुजीबुर्रहमान और नईम गोली लगने के बाद भी बच गए थे।

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hashimpura massacre Delhi High Court sentenced 16 soldiers of PAC to life imprisonment
मेरठ न्यूज

वहीं अशफाक का कहना है कि मुझे पुलिस वाले पकड़ कर सिविल लाइन थाने ले गए थे। वहां से अन्य लोगों के साथ अब्दुल्लापुर जेल और फिर फतेहगढ़ जेल ट्रांसफर कर दिया गया था। आज भी वह लम्हा याद कर आंखें भर आती हैं, जब पुलिस और मिलिट्री वालों ने बेकसूरों को घर से पकड़ा और यातनाएं दीं।

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हाशिमपुरा दंगा

हाजी जहीरुद्दीन ने दावा किया कि मुझे पुलिस वाले पकड़ कर सिविल लाइन थाने ले गए थे। लोहे की रॉड मारकर मेरी टांग और एक बाजू तोड़ दी थी। इसके बाद जेल में डाल दिया था। ऐसा कृत्य करने वाले पुलिसकर्मियों को पहले ही सजा मिल जानी चाहिए थी।

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