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Moradabad: कोई तो बता दो... इन्हें रैन बसरे का पता दो, पूस की कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोने को मजबूर लोग

अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 03 Jan 2026 02:53 PM IST
सार

मुरादाबाद में कड़कड़ाती ठंड के बीच रैन बसेरों तक पहुंच और व्यवस्थाओं की कमी के चलते कई मजबूर लोग सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। पहचान पत्र न होने के कारण जरूरतमंद रैन बसेरों से दूर हैं। उधर, शहर में बने अस्थायी और स्थायी रैन बसेरों में कई बेड खाली पड़े हैं। 

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Moradabad: People forced to sleep in the open in the cold, unable to find space in night shelters
मुरादाबाद में कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोते लोग - फोटो : संवाद

पूस की कंपकंपाती रात में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान में खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले लोग कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि रैन बसेरा कहां है। कुछ ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें पनाह नहीं दी गई, तो किसी का आरोप है कि रैन बसेरे में ठहरने के लिए रुपये मांगे गए। कारण जो भी रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि ये लोग खुले में सड़क पर रात बिताने को मजबूर हैं। 

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Moradabad: People forced to sleep in the open in the cold, unable to find space in night shelters
मुरादाबाद में कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोते लोग - फोटो : संवाद

बुध बाजार में हिंदू मॉडल इंटर कॉलेज के बाहर सड़क किनारे रात गुजार रहे मो. आलम बताते हैं कि वह हापुड़ के रहने वाले हैं। यहां बेलदारी का काम करते हैं। उनके पास आधार कार्ड नहीं है। वह सड़क किनारे कंबल ओढ़कर लेटे थे, वहां से 200 मीटर दूर रैन बसेरा है। नईम का कहना था कि आधार कार्ड के बिना अंदर घुसने से मना कर दिया गया। मान मुनव्वल की तो उनसे रुपये मांगे गए।

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मुरादाबाद में कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोते लोग - फोटो : संवाद

इसके बाद उन्होंने कभी रैन बसेरे का रुख नहीं किया। इसी तरह दिल्ली रोड पर शोरूम के बाहर सोने वाले राजस्थानी लोगों का हाल है। वह कहते हैं कि सड़कों पर गुब्बारे बेचकर गुजारा करते हैं। दो महीने यहां इसी काम से रुपये कमाएंगे और सड़क पर रात बिताएंगे। इसके बाद अपने घर राजस्थान लौट जाएंगे। 

Moradabad: People forced to sleep in the open in the cold, unable to find space in night shelters
मुरादाबाद में कड़कड़ाती ठंड में खुले में सोते लोग - फोटो : संवाद

शुक्रवार की रात को 11:30 बजे मुरादाबाद डिपो के पास बना अस्थायी रैन बसेरा लगभग खाली था। सिर्फ चार बेड पर लोग लेटे थे। इसके अलावा कोई नहीं था। स्टेशन पर बने स्थायी रैन बसेरे में महिला कक्ष में सिर्फ तीन बेड भरे थे। जबकि पुरुष कक्ष में सभी बेड फुल रहे। 

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Moradabad: People forced to sleep in the open in the cold, unable to find space in night shelters
मुरादाबाद में रैन बसेरो में खाली पड़ा कमरा - फोटो : संवाद
लोगों ने बताया
हम लोग राजस्थान से आए हैं। पिछले 20 दिन से यहीं शोरूम के बाहर तिरपाल बिछाकर सो जाते हैं। दिन में गुब्बारे बेचते हैं। रैन बसेरे के बारे में हमें जानकारी नहीं है। - गोपी

मैं हापुड़ का रहने वाला हूं। यहां बेलदारी करता हूं। आधार कार्ड नहीं है इसलिए कोई किराये पर कमरा नहीं देता। रैन बसेरे वाले ठहराने के पैसे मांगते हैं। - मो. आलम
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