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प्रतापगढ़: राम से गले मिले भरत, नम हुईं आंखें
Sat, 12 Oct 2019 12:54 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 12 Oct 2019 12:54 AM IST
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बेल्हा के ऐतिहासिक भरत मिलाप में चौक घंटमघर में गले मिलते राम भरत व लक्ष्मण शत्रुघन।
- फोटो : pratapgarh
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बेल्हा का ऐतिहासिक भरत मिलाप शुक्रवार को सकुशल संपन्न हुआ। शहर के घंटाघर चौक पर भोर में राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्र सहित चारों भाइयों का मिलन हुआ तो पुष्प वर्षा के साथ ही जयकारे गूंजने लगे। भगवान राम, भाई भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्र का भातृत्व प्रेम देख हर किसी की आंखें भर आईं।
भरत मिलाप मेले में झांकी देखने को जेल रोड पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : pratapgarh
ऐतिहासिक स्थल पर हजारों की भीड़ भरत मिलाप की साक्षी बनी। विद्युत मंडल की डिजिटल लाइटिंग, दलों व मंडलों की कलात्मक चौकियों एवं झांकियां रातभर लोगों को रोमांचित करती रहीं। रोशनी की चकाचौंध के बीच लोगों ने मेले का आनंद उठाया।
ऐतिहासिक भरत मिलाप मेले में निकली चौकी में कलात्मक झांकी में नृत्य करते कलाकार।
- फोटो : pratapgarh
वैसे तो गुरुवार को शाम होते ही भरत मिलाप अपनी ऊंचाइयों को छूने लगा था। आकर्षक लाइटिंग से पूरा शहर जगमग हो उठा था। शाम सात बजे के बाद कलात्मक चौकियां व झांकियां निकलना शुरू हुईं तो पूरा शहर थम सा गया। रामदल की झांकी से भरत मिलाप का आगाज हुआ। झाकियों को देखने व चौकियों को देखने सडक़ों पर भीड़ उमडने लगी। रात 10 बजे के बाद भीड़ बढने लगी।
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भरत मिलाप मेले में निकली झांकी में मां काली तांडव नृत्य करती कलाकार।
- फोटो : pratapgarh
विद्युत मंडल की आकर्षक लाइटिंग की रोशनी कलात्मक चौकियों व झांकियों पर पड़ती पर वह जीवंत हो उठतीं। रामदल, भरत दल, लवकुश दल, हनुमान दल की झांकियों के बीच मंडलों की प्रस्तुति देख लोग रोमांचित हो उठते। रातभर झांकियों व कलात्मक चौकियों का दौर जारी रहा। चप्पे- चप्पे पर पुलिस की नजर रही। युवाओं, महिला, बच्चों व बुजुर्गों सभी भरत मिलाप को देखने को लेकर उत्साहित दिखे।
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भरत मिलाप मेले में निकली कलात्मक चौकी में प्रस्तुति देता कलाकार।
- फोटो : pratapgarh
भोर में दर्शकों की भीड़ घंटाघर चौक स्थित ऐतिहासिक स्थल पर जुटने लगी। भोर में 6 बजे के करीब अयोध्या-प्रयागराज राजमार्ग पर दोनों छोर पर हजारों की भीड़ जमा हो गई। तिल रखने तक की जगह नहीं थी। सभी को इंतजार था भगवान राम व भाई भरत, लक्षमण व शत्रुघ्र सहित चारों भाइयों के मिलन का। सुबह करीब 7 बजे भगवान राम, लक्ष्मण, मां जानकी, भरत शत्रुघ्र सभी अपने दलों से उतरकर चौकघंटाघर पहुंचे तो हर कोई इस अद्भुत दृश्य को निहारने लगा।