गंगा स्मरण करते हुए सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और रवियोग में राजराजेश्वर का विधिवत पूजन कर काशी विश्वनाथ धाम भक्तों को समर्पित किया। शाम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ नौकाविहार कर विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती देखी।
सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे क्रूज से उतरकर पीएम मोदी ने गंगा को साक्षी मानकर संकल्प लिया और फिर भक्त के रूप में गंगा की गोद में विधिवत पूजा की। हाथों में गंगाजल से भरा रजत कलश लेकर पीएम पैदल ही गर्भगृह पहुंचे।
यहां गंगाजल सहित देश की प्रमुख नदियों के जल से काशीपुराधिपति का अभिषेक कर रजोपचार विधि से पूजन किया। संतों की मौजूदगी में मंदिर चौक पर लगे शिलापट्ट का रेवती नक्षत्र में अनावरण कर धाम का लोकार्पण किया। काशी के कोतवाल से अनुमति लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को राजघाट से क्रूज पर सवार होकर गंगा विहार करते हुए ललिता घाट पहुंचे। यहां पीएम ने गेरुआ वस्त्र, रुद्राक्ष की माला और मौन संकल्प धारण कर गंगा पूजन किया।
गंगा में तीन डुबकी और सूर्य सहित सभी देवों को गंगाजल अर्पित कर प्रधानमंत्री सनातन वेशभूषा में धाम की ओर बढ़े। गेट वे ऑफ कॉरिडोर से पीएम हाथों में गंगाजल का रजत कलश लेकर पैदल ही आगे बढ़े। इस बीच शंख, डमरू, घंटा, घड़ियाल और संतों के हर हर महादेव के जयघोष के बीच गर्भगृह में करीब 22 मिनट पूजन करने के बाद पीएम संतों के बीच आकर बैठे।
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पीएम मोदी काशी
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इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए हर भारतवासी ईश्वर का अंश है। उन्होंने देशवासियों से तीन संकल्प स्वच्छता, सृजन और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनवरत प्रयास मांगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का हर नागरिक जब कुछ नया करेगा, इनोवेटिव करने की कोशिश करेगा तब देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए।
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धाम में संबोधति करते पीएम मोदी।
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उन्होंने बाबा विश्वनाथ धाम के एतिहासिक क्षण पर देशवासियों को गर्व की अनुभूति कराते हुए कहा, आतातायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए। इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए। औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है। जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की। लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं।
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काशी विश्वनाथ धाम में पीएम मोदी
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पीएम मोदी आगे बोल, अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए ही कहा, जब मैं बनारस आया तो एक विश्वास लेकर आया था। विश्वास अपने से ज्यादा बनारस के लोगों का था। तब कुछ लोग जो बनारस के लोगों पर संदेह करते थे। वह कहते थे कि कैसे होगा? होगा ही नहीं।
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काशी विश्वनाथ धाम में पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
कहते थे कि यहां तो ऐसा ही चलता है। मोदी जैसे बहुत आकर चले गए। मुझे आश्चर्य होता था कि बनारस के लिए कैसे इस तरह की धारणाएं बना दी गई थीं। पीएम ने कहा कि यह जड़ता बनारस की नहीं थी। इसमें थोड़ा बहुत राजनीति और थोड़ा निजी स्वार्थ था।