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पंजाब विधानसभा में उठा मुद्दा: इंटरव्यू के नंबरों में हेरफेर का आरोप, यूपीएससी से रिपोर्ट तलब करेगा सदन

मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 12 Mar 2026 01:22 PM IST
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सार

स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने ग्यासपुरा से सभी तथ्य व आंकड़े उपलब्ध करवाने को कहा। स्पीकर ने कहा कि यह काफी गंभीर मसला प्रतीत हो रहा है, लिहाजा क्रमिक विभाग को निर्देशित किया जाएगा कि वे यूपीएससी से संपर्क करे।

Punjab Assembly Allegations of manipulation of interview marks House to call for report from UPSC
पंजाब विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान बुधवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए एक विवादित मुद्दा उठाया गया। 
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इस दौरान पायल सीट से आप विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने यूपीएससी पर दलित प्रत्याशियों को इंटरव्यू में देने वाले नंबरों में हेरफेर करने का आरोप लगाते हुए कुछ प्रत्याशियों के आंकड़े सदन में प्रस्तुत किए।

स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने ग्यासपुरा से सभी तथ्य व आंकड़े उपलब्ध करवाने को कहा। स्पीकर ने कहा कि यह काफी गंभीर मसला प्रतीत हो रहा है, लिहाजा क्रमिक विभाग को निर्देशित किया जाएगा कि वे यूपीएससी से संपर्क करे और पिछले 10 वर्षों का ब्रेकअप ले ताकि यह देखा जा सके कि दलित बच्चों ने परीक्षा में कितने अंक लिए हैं और इंटरव्यू में उन्हें कितने अंक मिले हैं।
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विधायक ग्यासपुरा ने कहा कि यह दलित समुदाय के बच्चों को आगे न बढ़ने देने की विकृत सोच है जिसे उन्होंने सदन में आंकड़ों और तथ्यों समेत उजागर किया है।

विधायक ने पेश किए आंकड़े

सदन में विधायक ग्यासपुरा ने दो प्रत्याशियों के अंकों को बिना उनका नाम रखा। उन्होंने बताया कि एक दलित अभ्यर्थी ने लिखित परीक्षा में 766 अंक लिए मगर उसे इंटरव्यू में 112 अंक दिए गए। इसके बाद उसका मेरिट रैंक 878 बन गया। उसी परीक्षा में सामान्य छात्र ने 725 अंक लिए मगर इंटरव्यू में उसे 194 अंक मिले। इसके बाद उसकी मेरिट 879 पहुंच गई।

एक अन्य मामले में एससी और सामान्य दोनों अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में 821-821 अंक हासिल किए। इंटरव्यू में सामान्य अभ्यर्थी को 210 अंक मिले और इससे उसकी मेरिट 1031 पहुंच गई। वे टॉप 10 रैंकिंग में आ गया जबकि एससी अभ्यर्थी को इंटरव्यू में 124 अंक मिले और वे 945 मेरिट रैंक पर रुक गया।

आस्था जैन का विवाद भी उठाया

पिछले साल सामान्य अभ्यर्थी कैटेगरी में 186 रैंक लेकर आईपीएस बनी आस्था जैन से जुड़ा नया विवाद भी सदन में उठाया गया। विधायक ने बताया कि यह अभ्यर्थी पहले सामान्य वर्ग से आईपीएस बनीं और अब आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) का सर्टिफिकेट लगाकर यूपीएससी की परीक्षा अच्छे रैंक से फिर पास कर ली। विधायक ग्यासपुरा ने बताया कि इस तरह चलता रहा तो दलित बच्चों को आगे बढ़ने का मौका कभी नहीं मिलेगा।
 
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