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सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट : मेंटेनेंस के 1.20 करोड़ जमा, सुविधाएं जीरो, लोगों ने किया प्रदर्शन
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जीरकपुर। करीब 1.20 करोड़ रुपये मेंटेनेंस चार्ज जमा होने के बावजूद सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट सोसाइटी में सुविधाओं का अकाल है। बंद लिफ्ट, बड़ी-बड़ी झाड़ियां, सोसाइटी के कार्यालयों पर लटके ताले, सीसीटीवी न गार्ड यह सब सोसाइटी की अव्यवस्था की कहानी कहते हैं। लोगों का दर्द है कि सपनों का घर ही उनकी सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। परेशान लोगों ने रविवार को सोसाइटी के गेट के पास एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। नाराज सोसाइटी के मुनीष, कमलेश, अजय सिंह ठाकुर, विजय शरण, हरिंद्र सोनू, प्रीति और अर्जुन का कहना है कि जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर आशियाना खरीदा, लेकिन आज बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुषमा बिल्डर्स पर गंभीर आरोप लगाकर सोसाइटी के निवासियों ने कहा कि बिल्डर ने पहले फ्लैट की पूरी कीमत वसूली और उसके बाद दो साल का भारी-भरकम मेंटेनेंस चार्ज भी ले लिया, लेकिन बदले में सुविधाएं देने की जिम्मेदारी पूरी नहीं की।
सोसाइटी निवासियों ने बताया कि कुल 236 फ्लैट हैं। करीब 110 में परिवार रह रहे हैं। इन सौ से अधिक परिवारों से प्रति फ्लैट करीब 1.20 लाख रुपये मेंटेनेंस के नाम पर लिए गए, जो कुल मिलाकर लगभग 1.20 करोड़ रुपये बनते हैं। बावजूद इसके हालात ऐसे हैं कि लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। निवासियों का कहना है कि बुजुर्गों और बच्चों को रोजाना सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। अभी तक पार्क तक नहीं बनाया गया है। जहां बच्चों के खेलने के लिए साफ-सुथरी जगह होनी चाहिए थी, वहां घास और झाड़ियां उगी हैं। लोगों का कहना है कि इन झाड़ियों से सांप और बिच्छू निकलते हैं। अंबाला-चंडीगढ़ हाइवे से सामने बनी सुषमा इनफीनियम से आने वाला मुख्य गेट भी बंद कर दिया है। गेट बंद होने की वजह से करीब एक किमी का चक्कर काटकर आना पड़ रहा है।
सोसाइटी में बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों पर ताले लटके हैं। स्विमिंग पूल भी चालू नहीं किया गया है। अधूरे निर्माण कार्य के कारण कई फ्लैट अब भी खाली पड़े हैं। आसपास का माहौल असुरक्षित महसूस होता है। -महेंद्र सिंह, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
2017 से लगातार बिल्डर से मूलभूत सुविधाएं पूरी करने की मांग कर रहे हैं। बार-बार शिकायतें दीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुषमा मालिक फोन नहीं उठाते हैं। मिलने के लिए जाओ तो दफ्तरों से गायब हो जाते हैं। -सौरभ अग्रवाल, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
फ्लैट लिए एक साल हो गया है। अभी तक जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं। सोसाइटी के पास फायर एनओसी तक नहीं है। आज स्थिति यह हो गई है कि करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने वाले परिवार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। -यशा अरोरा, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
सोसाइटी में सुरक्षा व्यवस्था एकदम ध्वस्त है। न सीसीटीवी लगे हैं न ही कोई चौकीदार तैनात रहता है। मैं एक महिला हूं। रात के समय सोसाइटी से अपने फ्लैट तक जाने में डर लगता है। किसी दिन कुछ भी हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। -हरप्रीत कौर, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
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सोसाइटी निवासियों ने बताया कि कुल 236 फ्लैट हैं। करीब 110 में परिवार रह रहे हैं। इन सौ से अधिक परिवारों से प्रति फ्लैट करीब 1.20 लाख रुपये मेंटेनेंस के नाम पर लिए गए, जो कुल मिलाकर लगभग 1.20 करोड़ रुपये बनते हैं। बावजूद इसके हालात ऐसे हैं कि लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। निवासियों का कहना है कि बुजुर्गों और बच्चों को रोजाना सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है। अभी तक पार्क तक नहीं बनाया गया है। जहां बच्चों के खेलने के लिए साफ-सुथरी जगह होनी चाहिए थी, वहां घास और झाड़ियां उगी हैं। लोगों का कहना है कि इन झाड़ियों से सांप और बिच्छू निकलते हैं। अंबाला-चंडीगढ़ हाइवे से सामने बनी सुषमा इनफीनियम से आने वाला मुख्य गेट भी बंद कर दिया है। गेट बंद होने की वजह से करीब एक किमी का चक्कर काटकर आना पड़ रहा है।
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सोसाइटी में बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों पर ताले लटके हैं। स्विमिंग पूल भी चालू नहीं किया गया है। अधूरे निर्माण कार्य के कारण कई फ्लैट अब भी खाली पड़े हैं। आसपास का माहौल असुरक्षित महसूस होता है। -महेंद्र सिंह, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
2017 से लगातार बिल्डर से मूलभूत सुविधाएं पूरी करने की मांग कर रहे हैं। बार-बार शिकायतें दीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। सुषमा मालिक फोन नहीं उठाते हैं। मिलने के लिए जाओ तो दफ्तरों से गायब हो जाते हैं। -सौरभ अग्रवाल, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
फ्लैट लिए एक साल हो गया है। अभी तक जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं। सोसाइटी के पास फायर एनओसी तक नहीं है। आज स्थिति यह हो गई है कि करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने वाले परिवार सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। -यशा अरोरा, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट
सोसाइटी में सुरक्षा व्यवस्था एकदम ध्वस्त है। न सीसीटीवी लगे हैं न ही कोई चौकीदार तैनात रहता है। मैं एक महिला हूं। रात के समय सोसाइटी से अपने फ्लैट तक जाने में डर लगता है। किसी दिन कुछ भी हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। -हरप्रीत कौर, निवासी सुषमा ग्रांडे नेक्स्ट