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कमाई है, पर बचत नहीं!: ‘आज में जीने’ की सोच बन रही आर्थिक सुरक्षा में बाधा, पंजाबी यूनिवर्सिटी का शोध
Mon, 17 Aug 2026 09:54 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: Nivedita
Updated Mon, 17 Aug 2026 09:54 AM IST
सार
अध्ययन से पता चला है कि बचत करने की इच्छा और आदत में व्यक्तिगत बचत मापदंडों का खास महत्व है। शख्सियत के लक्षण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आज में जीने की आदत से बचत करने की आदत कम होती है।
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- फोटो : Istock
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विस्तार
पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के एक हालिया शोध में यह सामने आया है कि सिर्फ आज में जीने की आदत लोगों की बचत करने की प्रवृत्ति को कम करती है। इस अध्ययन में मौजूदा आर्थिक दौर में बचत के संकल्पों और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका पर विशेष पड़ताल की गई है।
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यह शोध यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में शोधकर्ता राहुल शर्मा ने बिजनेस स्टडीज विभाग के शिक्षक संदीप सिंह विरदी की देखरेख में किया।
संदीप सिंह विरदी ने बताया कि अध्ययन से पता चला है कि बचत करने की इच्छा और आदत में व्यक्तिगत बचत मापदंडों का खास महत्व है। शख्सियत के लक्षण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आज में जीने की आदत से बचत करने की आदत कम होती है। इसके अलावा, आय का स्तर, काम और परिवार में निर्भर लोगों की संख्या भी सीधे तौर पर बचत व्यवहार पर असर डालती है। हालांकि, उम्र और लिंग का बचत के फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ता है। ये बेअसर कारक पाए गए हैं।
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विरदी ने 1960 और 70 के दशक का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों ने साधारण बचत से शुरुआत की थी। उन्होंने ऐसी संपत्ति बनाई जो पीढ़ियों का पेट भर सकें। अनिश्चित भविष्य के लिए पैसा बनाने और उसका एक हिस्सा बचाने का यही एकमात्र तरीका था। वे ऐसी संपत्ति बनाने में सफल रहे, जो आज के निवेशों से ज्यादा कीमती हैं। यह स्थिति इन्सान को बुनियादी नियमों की तरफ वापस जाने और निवेशों के बजाय बचत की दिशा में काम करने का संदेश देती है।
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शोधकर्ता राहुल शर्मा ने एक स्तरीय प्रश्नावली के जरिये 500 जवाब देने वालों से डेटा इकट्ठा किया। इस विश्लेषण से कई महत्वपूर्ण रुझान सामने आए हैं। अध्ययन से पता चलता है कि वित्तीय संस्थाओं और बैंकों को विभिन्न व्यवसायों की जरूरतों को समझना चाहिए। उन्हें उद्यमियों, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों और इंजीनियरों जैसे पेशेवरों के लिए अलग-अलग तरह की स्कीमें शुरू करनी चाहिए। कम आय वाले लोगों के लिए बिना न्यूनतम बैलेंस वाले खाते और आपातकालीन ओवरड्राफ्ट्स जैसी योजनाएं बनाई जानी चाहिए। बच्चों की स्कीमें जैसी परिवार विशेष योजनाएं भी शुरू की जा सकती हैं।
बचत को बढ़ावा देने के उपाय
शोध में यह भी सुझाव दिया गया है कि जो लोग आज में जीना पसंद करते हैं, उन्हें भविष्य की आपात स्थितियों के लिए बचत करने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए। वित्तीय संस्थाओं को ऐसे ग्राहकों के लिए इनाम और नियमित सेवाओं जैसी स्कीमें लानी चाहिए। यह उन्हें दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए प्रेरित करेगा। कुलपति जगदीप सिंह ने शोध टीम को उनकी कड़ी मेहनत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह शोध अपनी बचत की आदतों को मजबूत करने के इच्छुक लोगों और वित्तीय संस्थाओं को व्यावहारिक जानकारी के आधार पर नई स्कीमें तैयार करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करता है।