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Patiala News: सज्जन कुमार के बरी होने पर श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने उठाए सवाल

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 07:22 PM IST
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The Jathedar of Sri Akal Takht raised questions over Sajjan Kumar's acquittal.
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-1984 के सिख नरसंहार की जिम्मेदारी तय करने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने नवंबर 1984 के सिख नरसंहार से जुड़े जनकपुरी मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और अदालतें यह स्पष्ट करें कि यदि सज्जन कुमार निर्दोष हैं, तो फिर दिल्ली में सिखों का नरसंहार किसने किया। जत्थेदार ने कहा कि सज्जन कुमार भले ही सिख नरसंहार के अन्य दो मामलों में सजा काट रहे हों लेकिन एक मामले में बरी होना जांच एजेंसियों की ईमानदारी और गंभीरता पर सवालिया निशान है। यह फैसला पीड़ित सिख परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
ज्ञानी कुलदीप सिंह ने बताया कि जिस केस में सज्जन कुमार बरी हुए, उसमें 17 वर्षीय काका गुरचरण सिंह को उसके पिता नाथ सिंह की हत्या के लिए जिंदा जलते ट्रक में फेंक दिया गया था। काका गुरचरण सिंह ने 1984 से 2008 तक लगातार इंसाफ की गुहार लगाई और आरोप लगाया कि भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे, लेकिन उनकी गवाही को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने 2008 में गुरचरण सिंह का बयान दर्ज तो किया, लेकिन उसे केस का हिस्सा नहीं बनाया गया। वहीं दिल्ली पुलिस ने बयान दर्ज किए बिना ही केस बंद कर दिया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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अन्य गवाहों की भी अनदेखी
जत्थेदार के अनुसार दूसरे गवाह हरविंदर सिंह कोहली ने भी सज्जन कुमार की पहचान की थी, लेकिन उनका मामला भी बंद कर दिया गया। बाद में बयान दर्ज हुआ, पर उनकी मृत्यु हो गई। दोनों प्रमुख गवाहों के परिजनों ने भी आरोपों की पुष्टि की थी। ज्ञानी कुलदीप सिंह ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1984 में 2733 सिखों की हत्या हुई जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि दिल्ली और अन्य राज्यों में हुए हर सिख नरसंहार मामले में जिम्मेदारी तय कर दोषियों को सजा दी जाए।
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