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बीकानेर के नमकीन कारोबार पर US-ईरान युद्ध का असर: संघर्ष के चलते निर्यात प्रभावित, 20 रुपये महंगी हुई भुजिया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर Published by: बीकानेर ब्यूरो Updated Tue, 07 Apr 2026 09:06 PM IST
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सार

Bikaner News: पश्चिम एशिया तनाव के चलते बीकानेर के नमकीन निर्यात पर असर पड़ा है। बढ़ती लागत, शिपिंग देरी और महंगे कच्चे माल के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है, जिससे स्थानीय बाजार में भी कीमतें बढ़ीं और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

Impact of US-Iran Conflict on Bikaner's Namkeen Trade: Exports Hit Due to Conflict; Bhujia Prices Rise by ₹20
बीकानेर के नमकीन कारोबार पर US-ईरान युद्ध का पड़ा बुरा असर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के बीकानेर में मशहूर नमकीन उद्योग पर पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान-अमेरिका-इस्राइल तनाव का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बीकानेर से खाड़ी और यूरोप के देशों में बड़ी मात्रा में भुजिया, पापड़ और अन्य नमकीन का निर्यात किया जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के चलते निर्यात गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई देशों में बीकानेरी नमकीन की सप्लाई घटने लगी है और आने वाले समय में इसकी कमी महसूस होने की आशंका जताई जा रही है।

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लागत बढ़ने से व्यापारियों की चिंता
व्यापारियों के अनुसार, डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी के कारण खाद्य तेल पिछले एक महीने में करीब 20 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। इसके साथ ही युद्ध जैसे हालात के चलते समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे माल भाड़े में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन लागत बढ़ने से निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
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शिपिंग में देरी और कंटेनरों की कमी
मौजूदा स्थिति में कंटेनरों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। पहले जो माल 25 से 30 दिनों में गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब उसे 50 से 60 दिन लग रहे हैं। जहाजों को सुरक्षित मार्ग अपनाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और लागत दोनों में बढ़ोतरी हो रही है। इससे निर्यात की गति धीमी पड़ गई है।
 
स्थानीय बाजार में भी दिखा असर
भुजिया नमकीन कारोबारी राधेश्याम स्वामी के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे हालात के कारण डीजल की खपत बढ़ी है, जिससे लागत पर असर पड़ा है। खाद्य तेल के दाम बढ़ने के चलते स्थानीय बाजार में भुजिया के दामों में करीब 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी करनी पड़ी है। इसके अलावा पॉलिथीन, कार्टन और अन्य पैकिंग सामग्री की कीमतों में भी इजाफा हुआ है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।



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निर्यात सीजन पर मंडराता संकट
वहीं, नमकीन निर्यात से जुड़े वेद प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि आगामी तीन महीने उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान खाड़ी देशों और यूरोप में सबसे अधिक मांग रहती है। हालांकि बढ़ते किराए, लंबी ट्रांजिट टाइम और अनिश्चित हालात के कारण व्यापारी अब अपनी रणनीति में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं।
 
विदेशी बाजार में भी बढ़ी अनिश्चितता
दूसरी ओर विदेशी खरीदार भी बढ़ती कीमतों को लेकर मोलभाव कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो बीकानेर के नमकीन कारोबार पर व्यापक असर पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीकानेरी उत्पादों की उपलब्धता सीमित हो सकती है।


 
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