एफएमजी फर्जीवाड़ा: कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने वाला डॉक्टर गिरफ्तार, 10 लाख में बनवाया फर्जी प्रमाणपत्र
एसओजी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर नितिन कुमार को फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में 100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों और बड़े फर्जीवाड़े के नेटवर्क का खुलासा हुआ।
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एसओजी ने एक और बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर चुके डॉक्टर नितिन कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए अनिवार्य एफएमजी (Foreign Medical Graduate) स्क्रीनिंग परीक्षा में कई बार असफल होने के बावजूद अवैध तरीके से पंजीयन हासिल करने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र का सहारा लिया।
एसओजी राजस्थान के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भारत में प्रैक्टिस शुरू करने से पहले एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। हालांकि, कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन करा लिया। इस संबंध में एसओजी थाना, जयपुर में प्रकरण संख्या 08/2026, दिनांक 4 फरवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त कर चुके लेकिन एफएमजी परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों को निशाना बनाता था। गिरोह के सदस्य कथित रूप से भानाराम माली के माध्यम से फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र तैयार करवाते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे। कई मामलों में यह राशि 10 लाख से 30 लाख रुपये तक पाई गई है।
इन कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर न केवल राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया गया, बल्कि कई आरोपियों ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कुछ प्रशासनिक कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसकी गहन जांच की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, अब तक विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त 100 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनके दस्तावेजों में अनियमितता और फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की आशंका है। इससे पहले इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली, एक दलाल और 24 डॉक्टरों सहित कुल 29 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ताजा कार्रवाई में दिल्ली के शाहदरा जिले के ज्योति नगर थाना क्षेत्र निवासी 27 वर्षीय नितिन कुमार को विशेष टीम ने गिरफ्तार किया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे 24 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया। नितिन ने वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और भारत लौटने के बाद एफएमजी परीक्षा में कई बार असफल रहा।
इसके बाद उसने दौसा निवासी शुभम गुर्जर के संपर्क में आकर 10 लाख रुपये में फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र बनवाया। इसी कूटरचित दस्तावेज के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया और करौली स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप भी शुरू कर दी। इस मामले में शुभम गुर्जर को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा चुका है।
एसओजी अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर की सक्रिय भूमिका सामने आई है। ये लोग फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने से लेकर मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने तक की प्रक्रिया को प्रभावित करते थे। जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाने के संकेत भी मिले हैं। फिलहाल एसओजी इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा अब तक कितने लोगों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल प्रैक्टिस शुरू की है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।