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जयपुर-सीकर हाईवे हुआ जाम: भारतमाला और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसानों का कूच
Mon, 27 Jul 2026 01:14 PM IST
Sourabh Bhatt
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Sourabh Bhatt
Updated Mon, 27 Jul 2026 01:14 PM IST
सार
कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भारतमाला परियोजना के विरोध में किसानों ने सैंकड़ों ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच किया। पुलिस प्रशासन ने किसानों को रोका तो जयपुर-सीकर हाईवे जाम हो गया-
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किसानों का जयपुर कूच
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भरतपुर-ब्यावर भारतमाला परियोजना के विरोध में सोमवार को किसानों का आंदोलन तेज हो गया। किसान महापंचायत के आह्वान पर 500 ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच के दौरान किसानों ने जयपुर-सीकर हाईवे पर जाम लगा दिया। बड़ी संख्या में किसान ढोढसर से चौमूं की ओर बढ़े। प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल तैनात कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर वार्ता के लिए आगे नहीं आती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसान उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर जयपुर कूच का फैसला लिया गया।
मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, परियोजनाएं रद्द करने की मांग
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भरतपुर-ब्यावर भारतमाला परियोजना को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने सरकार को इन परियोजनाओं की उपयोगिता और जनहित पर खुली बहस की चुनौती भी दी है। किसानों का आरोप है कि सरकार इन परियोजनाओं को जनहितैषी बताकर उनका महिमामंडन कर रही है, जबकि वास्तविकता में ये किसान, गांव और पर्यावरण विरोधी हैं।
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भूमि अधिग्रहण से किसान की मौत का मामला उठाया
किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से उपजे तनाव और अवसाद के कारण किसान ने आत्महत्या की। किसानों ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता और पुनर्वास की मांग उठाते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। किसान महापंचायत का कहना है कि 17 जुलाई को ही प्रशासन को रैली और वार्ता के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन सरकार ने संवाद शुरू नहीं किया। संगठन का आरोप है कि प्रशासन आंदोलन को रोकने और दबाने की कोशिश कर रहा है, जबकि किसानों की मांग केवल बातचीत और परियोजनाओं पर पुनर्विचार की है।
हाईवे पर बढ़ी आवाजाही की परेशानी
जयपुर कूच के दौरान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर हाईवे पर उतरने से जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस यातायात को डायवर्ट कराने और स्थिति सामान्य बनाने में जुटी रही। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार परियोजनाओं पर पुनर्विचार और वार्ता के लिए आगे नहीं आती तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा।
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किसानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर वार्ता के लिए आगे नहीं आती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसान उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर जयपुर कूच का फैसला लिया गया।
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मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, परियोजनाएं रद्द करने की मांग
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजकर कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भरतपुर-ब्यावर भारतमाला परियोजना को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने सरकार को इन परियोजनाओं की उपयोगिता और जनहित पर खुली बहस की चुनौती भी दी है। किसानों का आरोप है कि सरकार इन परियोजनाओं को जनहितैषी बताकर उनका महिमामंडन कर रही है, जबकि वास्तविकता में ये किसान, गांव और पर्यावरण विरोधी हैं।
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भूमि अधिग्रहण से किसान की मौत का मामला उठाया
किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से उपजे तनाव और अवसाद के कारण किसान ने आत्महत्या की। किसानों ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता और पुनर्वास की मांग उठाते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। किसान महापंचायत का कहना है कि 17 जुलाई को ही प्रशासन को रैली और वार्ता के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन सरकार ने संवाद शुरू नहीं किया। संगठन का आरोप है कि प्रशासन आंदोलन को रोकने और दबाने की कोशिश कर रहा है, जबकि किसानों की मांग केवल बातचीत और परियोजनाओं पर पुनर्विचार की है।
हाईवे पर बढ़ी आवाजाही की परेशानी
जयपुर कूच के दौरान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर हाईवे पर उतरने से जयपुर-सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस यातायात को डायवर्ट कराने और स्थिति सामान्य बनाने में जुटी रही। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार परियोजनाओं पर पुनर्विचार और वार्ता के लिए आगे नहीं आती तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा।